भारत अमेरिका व्यापार समझौता 98 99% पूरा, ट्रंप मोदी स्तर पर जारी है बातचीत: वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुँच गया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन में विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि बातचीत का केवल एक से दो प्रतिशत हिस्सा अभी बाकी है और सबसे बड़े मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। यह बयान कई महीनों की उच्चस्तरीय वार्ता के बाद आया है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सीधी चर्चा भी शामिल रही है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, "सबसे बड़े मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। यह लगभग पूरा हो चुका है — अब केवल एक या दो प्रतिशत काम बाकी है।" उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें प्रस्तावित समझौते को लेकर हर सप्ताह सक्रिय रूप से बातचीत कर रही हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच भी उच्चस्तरीय चर्चाएं नियमित रूप से जारी हैं।
देरी की वजह क्या रही
अधिकारी के अनुसार, पहले की एक सहमति को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) से जोड़ा गया था। बाद में इस कानून को निरस्त किए जाने के कारण कानूनी ढाँचे पर दोबारा विचार करना पड़ा, जिसने वार्ता को कई महीने और आगे खींच दिया। इन जटिलताओं के बावजूद अधिकारी ने उम्मीद जताई कि शेष मतभेद जल्द सुलझा लिए जाएंगे। गौरतलब है कि IEEPA एक अमेरिकी राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक कानून है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने शुल्क आधारित व्यापार नीति के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया था।
रुबियो की भारत यात्रा और वाणिज्यिक कूटनीति
यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले आया है। रुबियो पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, जहाँ वह मध्य एशियाई देशों के नेताओं से मिलेंगे, और इसके बाद भारत दौरे पर आएंगे। मुंबई में वह भारतीय सरकारी अधिकारियों और देश की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली के बजाय मुंबई चुने जाने का फैसला अमेरिकी प्रशासन की वाणिज्यिक कूटनीति और अमेरिका में भारतीय निवेश को बढ़ावा देने पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। रुबियो जामनगर का भी दौरा करेंगे।
किन क्षेत्रों पर फोकस
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, वाशिंगटन सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा सहयोग और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारत के साथ संबंध और मजबूत करना चाहता है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों सरकारों के बीच संबंध मजबूत करने के प्रयासों के तहत अगले वर्ष अमेरिका के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की भारत यात्राएं भी प्रस्तावित हैं।
क्या होगा आगे
यदि शेष एक दो प्रतिशत मुद्दे सुलझ जाते हैं तो यह समझौता भारत अमेरिका के व्यापारिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। रुबियो की आगामी यात्रा को इस दिशा में निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते की अंतिम रूपरेखा IT, फार्मा और रक्षा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकती है।