भारत-अमेरिका ट्रेड डील: व्हाइट हाउस ने बातचीत को बताया 'सकारात्मक', गोयल बोले — ज़्यादातर मुद्दे सुलझे
सारांश
मुख्य बातें
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की पुष्टि करते हुए व्हाइट हाउस ने 27 अक्टूबर 2026 को कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत 'सकारात्मक' रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हेग (नीदरलैंड) में आयोजित भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम में स्वीकार किया कि वार्ता का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और अब अंतिम प्रारूप को परिष्कृत करने का काम जारी है।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता मैथ्यू मिडलटन ने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भारत के अधिकारियों के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहा है, ताकि ऐसा ऐतिहासिक व्यापार समझौता सुनिश्चित किया जा सके जो अमेरिका और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीबी व्यक्तिगत संबंध हैं और दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गोयल की टिप्पणी और यात्रा का संदर्भ
गोयल वर्तमान में जर्मनी और नीदरलैंड की यात्रा पर गए भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हेग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले साढ़े चार वर्षों में नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो देश की व्यापार कूटनीति की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका वार्ता के अगले कदम पर दोनों देशों के व्यापारिक जगत की निगाहें टिकी हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि और प्रमुख घटनाक्रम
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की थी। उस घोषणा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी टैरिफ नीति में हुए बदलावों — जिनमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद की परिस्थितियाँ भी शामिल हैं — ने बातचीत के एक नए दौर की ज़रूरत उत्पन्न की।
वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए हाल के महीनों में कई उच्चस्तरीय संपर्क हुए। गोयल ने 1 अक्टूबर को मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात की। इसके बाद वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों के एक दल ने 15 से 17 अक्टूबर तक वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत की।
रूबियो का संकेत और विदेश विभाग की भूमिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 20 अक्टूबर को मुंबई यात्रा के दौरान पत्रकारों को बताया था, 'समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कुछ ही मुद्दे बाकी हैं और उन्हें जल्द सुलझाए जाने की उम्मीद है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश विभाग व्यापार समझौतों पर सीधे बातचीत नहीं करता, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में उसकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
दोनों देशों के हित और आगे की राह
अमेरिका चाहता है कि भारत ऊर्जा उत्पादों, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी खरीद बढ़ाए। भारत ने अगले पाँच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान एवं विमान के कलपुर्जे, बहुमूल्य धातुएँ, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। वहीं, भारतीय निर्यातक अमेरिकी टैरिफ में राहत की उम्मीद करते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। समझौते को अंतिम रूप मिलने के बाद यह भारत के निर्यात क्षेत्र और कूटनीतिक संतुलन दोनों को नई दिशा दे सकता है।