भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: फल, सोयाबीन, वाइन को बाज़ार-पहुँच के बदले टैरिफ राहत, रुबियो 20 अक्टूबर को जयशंकर से मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। बातचीत के केंद्र में एक स्पष्ट लेन-देन का फ़ॉर्मूला है — अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाएगा, और बदले में भारत अमेरिकी उत्पादों — खासकर फल, मेवे, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य शराब उत्पादों — के लिए अपना बाज़ार खोलेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 अक्टूबर से 22 अक्टूबर 2026 तक भारत दौरे पर हैं और 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात होनी है।
समझौते की रूपरेखा और टैरिफ संरचना
फरवरी 2026 में घोषित रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लागू पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया। इसके साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से जुड़े अतिरिक्त 25% शुल्क को भी हटाया गया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट को लागू करने और रूसी तेल खरीदारों पर उसके टैरिफ को माफ करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।
बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर टैरिफ घटाने या समाप्त करने पर सहमति जताई है। इनमें मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य शराब उत्पाद शामिल हैं।
सरकार की स्थिति और वार्ता की प्रगति
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और फिलहाल कानूनी दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते को लागू करने से पहले भारत को अपने प्रतिस्पर्धी लाभ से जुड़े कुछ पहलुओं पर स्पष्टता चाहिए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि बातचीत अब अंतिम पड़ाव के काफी करीब पहुँच चुकी है। दूसरी तरफ, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने 2 अक्टूबर को कहा था कि समझौता तत्काल नहीं होने वाला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आशा व्यक्त की कि यह समझौता जल्द पूरा होगा, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।
व्यापार असंतुलन और बड़ी खरीद की संभावना
व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए भारत अमेरिका से वाणिज्यिक विमान, कोकिंग कोल, सोना, ऊर्जा और रक्षा उपकरण जैसी बड़ी खरीद कर सकता है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर जानकारी दी कि सितंबर 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 23% बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि व्यापार घाटे में भी कमी आई है।
ऊर्जा क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियाँ
ऊर्जा के मोर्चे पर भारत के सामने तकनीकी अड़चनें भी हैं। भारत की अधिकांश रिफाइनरियाँ मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल के लिए अनुकूलित हैं, जो मुख्यतः खाड़ी देशों और रूस से मिलता है। अमेरिकी हल्के कच्चे तेल को इनमें सीमित अनुपात में मिलाया जा सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाला जहाज़रानी मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे रूसी तेल की आपूर्ति को तत्काल किसी वैकल्पिक स्रोत से बदलना आसान नहीं है। दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी एलएनजी की खरीद उल्लेखनीय रूप से बढ़ाई है — 'केप्लर' के आँकड़ों के अनुसार, मार्च से मई 2026 की तिमाही में अमेरिका पहली बार भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बना। अगस्त 2026 में भारत के एलपीजी आयात का आधे से अधिक हिस्सा अमेरिका से आया, हालाँकि सितंबर में खाड़ी देशों की आपूर्ति बढ़ने पर यूएई फिर सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।
डेयरी विवाद और रुबियो यात्रा का महत्व
समझौते की सबसे बड़ी अड़चन अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाज़ार में अधिक पहुँच देने का मुद्दा बना हुआ है, जिस पर भारत की ओर से अभी तक सहमति नहीं बनी है। यह ऐसे समय में आया है जब 3 नवंबर 2026 को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं और बढ़ती ईंधन कीमतें वाशिंगटन के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बनी हुई हैं। ऐसे में अमेरिका भी आपूर्ति-श्रृंखला में किसी बड़े व्यवधान से बचना चाहता है।
विदेश मंत्री रुबियो की 20 अक्टूबर की मुंबई यात्रा इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है — वे समरकंद और जामनगर भी जाएंगे। दोनों पक्षों के बीच यह उच्च-स्तरीय संपर्क बताता है कि पहले चरण के समझौते को जल्द से जल्द औपचारिक रूप देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों ओर मौजूद है।