24 अक्टूबर 2026
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भारत 'विश्व बंधु' के रूप में ग्लोबल साउथ को परमाणु विज्ञान का लाभ पहुँचा रहा है: संगीता कुमारी सिंह देव

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भारत 'विश्व बंधु' के रूप में ग्लोबल साउथ को परमाणु विज्ञान का लाभ पहुँचा रहा है: संगीता कुमारी सिंह देव

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने 'विश्व बंधु' की भूमिका में भारत की परमाणु उपलब्धियाँ गिनाईं — कल्पक्कम का 500 MW फास्ट ब्रीडर रिएक्टर दुनिया का दूसरा 'क्रिटिकल' रिएक्टर बना और NPCIL ने 55,190 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया। यह भारत के ग्लोबल साउथ नेतृत्व की बढ़ती दावेदारी का संकेत है।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने 24 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की परमाणु उपलब्धियाँ और ग्लोबल साउथ सहयोग प्रस्तुत किया।
भारत ने मई 2026 में 22 सदस्य देशों वाले रीजनल कोऑपरेटिव एग्रीमेंट (RCA) की अध्यक्षता संभाली।
अप्रैल 2026 में भारत दुनिया का दूसरा देश बना जिसने कल्पक्कम स्थित 500 MW प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को 'क्रिटिकल' अवस्था तक पहुँचाया।
जून 2026 में इस रिएक्टर ने विश्व में पहली बार ऊष्मा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन का सफल प्रदर्शन किया।
NPCIL ने पिछले वर्ष 55,190 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन किया; औसत प्लांट लोड फैक्टर 80% रहा।
टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई बिम्सटेक ढाँचे के तहत बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को कैंसर उपचार प्रशिक्षण दे रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं भाजपा सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने 24 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि 'विश्व बंधु' — अर्थात दुनिया के मित्र — की भूमिका में भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना सहयोग और गहरा कर रहा है। उनके अनुसार, इस साझेदारी का उद्देश्य परमाणु विज्ञान के लाभ हर उस देश तक पहुँचाना है जिसे इसकी आवश्यकता है।

आरसीए अध्यक्षता: दक्षिण दक्षिण सहयोग की नई इबारत

सिंह देव ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ भारत का दीर्घकालिक सहयोग इस वर्ष रीजनल कोऑपरेटिव एग्रीमेंट (RCA) के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ हुआ है। यह समझौता परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने से जुड़ा है। उन्होंने कहा, "आरसीए की अध्यक्षता भारत की इस मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि हम दक्षिण दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि परमाणु विज्ञान के लाभ हर उस देश तक पहुँचें जो इसका उपयोग करना चाहता है।"

गौरतलब है कि भारत ने मई 2026 में 22 सदस्य देशों वाले RCA की अध्यक्षता ग्रहण की थी। उस अवसर पर भारत ने विज्ञान, नवाचार और साझा प्रगति के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने का संकल्प लिया था।

'पड़ोसी पहले' नीति और टाटा मेमोरियल सेंटर का योगदान

सिंह देव ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का एक ठोस उदाहरण पेश करते हुए मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह केंद्र बिम्सटेक सहयोग ढाँचे के तहत कैंसर उपचार से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। टाटा मेमोरियल सेंटर भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्वास्थ्य और ऊर्जा सहयोग में अपनी भूमिका को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा है।

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर: ऐतिहासिक उपलब्धि

सिंह देव ने बताया कि अप्रैल 2026 में भारत दुनिया का केवल दूसरा देश बना जिसने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को सफलतापूर्वक 'क्रिटिकल' अवस्था तक पहुँचाया। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित यह 500 मेगावाट क्षमता का रिएक्टर पूर्णतः भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। 'क्रिटिकल' होने का अर्थ है कि रिएक्टर ने स्थिर और निरंतर संचालन की क्षमता अर्जित कर ली है।

इससे भी आगे, जून 2026 में इस रिएक्टर ने विश्व में पहली बार ऊष्मा (हीट) आधारित हाइड्रोजन उत्पादन का सफल प्रदर्शन किया — जो स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम है।

एनपीसीआईएल का उत्पादन रिकॉर्ड

सिंह देव ने बताया कि पिछले वर्ष न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने 55,190 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। इस अवधि में उसके संयंत्रों का औसत प्लांट लोड फैक्टर 80 प्रतिशत रहा और सुरक्षा का रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि भारत न केवल अपनी परमाणु क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि विकासशील देशों के साथ ज्ञान और तकनीक साझा कर वैश्विक सहयोग को भी नई दिशा दे रहा है। आने वाले समय में भारत की यह भूमिका और अधिक विस्तृत होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि RCA अध्यक्षता और IAEA सहयोग वास्तव में ग्लोबल साउथ के देशों में क्षमता निर्माण में बदलते हैं या नहीं। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का 'क्रिटिकल' होना निस्संदेह एक तकनीकी मील का पत्थर है, परंतु व्यावसायिक ऊर्जा उत्पादन तक की राह अभी लंबी है। 'विश्व बंधु' की छवि को विश्वसनीयता तभी मिलेगी जब परमाणु ज्ञान साझेदारी के ठोस और सत्यापन योग्य परिणाम सामने आएँ, न कि केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत 'विश्व बंधु' के रूप में परमाणु विज्ञान में कैसे सहयोग कर रहा है?
भारत IAEA के साथ रीजनल कोऑपरेटिव एग्रीमेंट (RCA) की अध्यक्षता करते हुए ग्लोबल साउथ के 22 देशों को परमाणु विज्ञान, अनुसंधान और प्रशिक्षण का लाभ पहुँचा रहा है। इसके अलावा टाटा मेमोरियल सेंटर के जरिए पड़ोसी देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को कैंसर उपचार का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
कल्पक्कम का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता का यह रिएक्टर पूर्णतः भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। अप्रैल 2026 में यह 'क्रिटिकल' अवस्था तक पहुँचा, जिससे भारत दुनिया का केवल दूसरा देश बन गया जिसने यह उपलब्धि हासिल की। जून 2026 में इसने विश्व में पहली बार ऊष्मा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन का सफल प्रदर्शन भी किया।
RCA की अध्यक्षता भारत ने कब और क्यों संभाली?
भारत ने मई 2026 में 22 सदस्य देशों वाले रीजनल कोऑपरेटिव एग्रीमेंट (RCA) की अध्यक्षता संभाली। इसका उद्देश्य दक्षिण दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु विज्ञान के लाभ विकासशील देशों तक पहुँचें।
NPCIL ने पिछले वर्ष कितनी बिजली उत्पादन की और उसका प्रदर्शन कैसा रहा?
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने पिछले वर्ष 55,190 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। इस दौरान उसके संयंत्रों का औसत प्लांट लोड फैक्टर 80 प्रतिशत रहा और सुरक्षा का रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा।
टाटा मेमोरियल सेंटर किन देशों के विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दे रहा है?
मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर बिम्सटेक सहयोग ढाँचे के तहत बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को कैंसर उपचार से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। यह केंद्र भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
राष्ट्र प्रेस
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