पश्चिम एशिया त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर भारत सतर्क, विदेश मंत्रालय बोला — 'करीब से नजर रख रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 21 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उभरते भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी रख रहा है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब बांग्लादेश ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हाल ही में संपन्न हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, 'हम पश्चिम एशिया में हो रहे डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं।'
त्रिपक्षीय रक्षा समझौते की पृष्ठभूमि
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हाल ही में एक त्रिपक्षीय रक्षा पैक्ट संपन्न हुआ है। अब बांग्लादेश ने भी इस समझौते में भागीदारी की इच्छा व्यक्त की है। यह गठजोड़ ऐसे समय में सामने आया है जब दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में सामरिक पुनर्संरेखण की प्रक्रिया तेज हो रही है। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश का इस पैक्ट की ओर झुकाव नई दिल्ली के लिए एक संवेदनशील कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर बैरिकेड हटाने का मामला
20 अगस्त को नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर से अनधिकृत ढाँचे, ट्रैफिक बोलार्ड और सुरक्षा बैरिकेड हटाए गए। इस पर प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तान में जो भारतीय उच्चायोग है, उसके सामने से कुछ स्ट्रक्चर पार्किंग की सहूलियत के लिए हटाया गया। हालांकि, हमने अनुरोध किया था कि इसे न किया जाए। लेकिन वो जब हो गया, तो हमने इसकी प्रतिक्रिया में भारत में पाकिस्तानी उच्चायोग की लेन में कुछ अस्थायी ढाँचा था, जिसे वहाँ से हटाया।' यह कदम भारत-पाकिस्तान कूटनीतिक संबंधों में पारस्परिकता के सिद्धांत को रेखांकित करता है।
भारतीय सेना प्रमुख का नेपाल दौरा
प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय थलसेनाध्यक्ष की हालिया नेपाल यात्रा अत्यंत सफल रही। उन्हें नेपाल में मानद जनरल का रैंक प्रदान किया गया, जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच दीर्घकालिक मित्रता की परंपरा को दर्शाता है। जायसवाल ने कहा, 'यह दोनों देशों और दोनों सेनाओं के बीच दोस्ती को दिखाता है, जो बहुत लंबे समय से है।' अग्निपथ योजना के संदर्भ में उन्होंने विस्तृत टिप्पणी से परहेज करते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय इस पर बेहतर जानकारी दे सकता है।
भारतीय नाविक समुदाय की सुरक्षा पर जोर
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में जायसवाल ने दोहराया कि भारतीय नाविक समुदाय की भलाई और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा, 'जब भी हमारे नाविक समुदाय या हमारे नाविकों से जुड़ा कोई मुद्दा होता है, तो हम उसे संबंधित अधिकारियों के सामने उठाते हैं।' यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब विभिन्न देशों में भारतीय नाविकों के फँसे होने की खबरें सामने आती रही हैं।
आगे क्या होगा
भारत की 'करीब से नजर' वाली भाषा कूटनीतिक सतर्कता का संकेत है, न कि सीधी आपत्ति का। विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश का इस त्रिपक्षीय ढाँचे की ओर झुकाव भारत की पड़ोस-प्रथम नीति के लिए एक नई परीक्षा है। नई दिल्ली से उम्मीद है कि वह इस घटनाक्रम पर अपनी कूटनीतिक प्रतिक्रिया को आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट करेगी।