लाल सागर में भारतीय जहाज पर हूती हमला: 'फैजे नूरे ओलिया' डूबा, सभी 13 भारतीय नागरिक सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त को लाल सागर में भारतीय ध्वजवाहक मालवाहक जहाज 'फैजे नूरे ओलिया' पर हूती विद्रोहियों के हमले की कड़ी निंदा की। विस्फोटकों से लदी एक नाव के ज़रिए किए गए इस हमले के बाद जहाज यमन के पश्चिमी तट के निकट लाल सागर में डूब गया। जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
हमले का घटनाक्रम
मालवाहक जहाज 'फैजे नूरे ओलिया' पर यह हमला मंगलवार को हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर होदेइदाह से लगभग 13 समुद्री मील दक्षिण में हुआ। हूती विद्रोहियों ने विस्फोटकों से भरी एक नाव से हमला किया, जिसके बाद जहाज डूब गया। यह हमला उस क्षेत्र में हुआ जहाँ पिछले कई महीनों से वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।
चालक दल का बचाव
सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (एनआरएफ) के अनुसार, तटरक्षक बल और नौसेना की इकाइयों ने संयुक्त अभियान चलाकर जहाज पर मौजूद सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचाया और सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। बचाए गए लोगों को चिकित्सकीय सहायता भी प्रदान की गई। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क और समन्वय कर रहा है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप समुद्री मार्गों पर बिना किसी रुकावट के आवाजाही और व्यापार जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने यमन के अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग और सहायता के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।
हूतियों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
एनआरएफ ने इस हमले के लिए यमन के हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया है, हालाँकि अभी तक हूतियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में हूती हमलों की वजह से वैश्विक समुद्री व्यापार पहले से ही बाधित है और कई बड़ी शिपिंग कंपनियाँ इस मार्ग से बचने के लिए मजबूर हो रही हैं। भारत के लिए यह मामला विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि लाल सागर मार्ग यूरोप और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार की एक प्रमुख धमनी है।
आगे की स्थिति
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय स्थिति पर निरंतर नज़र रखे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लाल सागर में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने की अपील की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यमन संघर्ष का राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा बना रहेगा।