लोम्बोक स्ट्रेट में चीनी अंडरसी मॉनिटरिंग सिस्टम की खोज: महत्वपूर्ण जानकारी
सारांश
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जकार्ता, १९ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंडोनेशिया के लोम्बोक और बाली के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में एक चीनी अंडरसी मॉनिटरिंग सिस्टम का खुलासा हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया की एबीसी न्यूज के मुताबिक, यह ३.७ मीटर लंबा उपकरण लोम्बोक स्ट्रेट में गिली ट्रावंगन द्वीप के उत्तर में मछुआरों को मिला। इसके बाद इंडोनेशियाई नौसेना ने इसे जांच के लिए लोम्बोक के मातरम नेवल बेस में स्थानांतरित कर दिया।
इंडोनेशियाई नौसेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल तुंग्गुल ने बताया कि इस उपकरण की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि यह क्या है, इसका उद्देश्य क्या है, इसमें क्या डेटा है, और यह कहाँ से आया है।
डिफेंस एनालिस्ट एचआई सटन के अनुसार, यह उपकरण “डीप-सी रियल-टाइम ट्रांसमिशन मूरिंग सिस्टम” है, जिसे चीन के ७१० रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है।
सटन ने कहा कि यह इंस्टीट्यूट पानी के नीचे हमले और बचाव की तकनीकों पर काम करता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह उपकरण समुद्र की धारा, गहराई, तापमान, और “आवाज और लक्ष्यों से संबंधित जानकारी” की निगरानी करता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ७१० रिसर्च इंस्टीट्यूट पहले चीन की सरकारी कंपनी चाइना शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (सीएसआईसी) का हिस्सा था, जो अब चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन (सीएसएससी) में सम्मिलित हो चुका है।
इस उपकरण पर सीएसआईसी के अक्षर और कंपनी का लोगो भी अंकित है।
यह सिस्टम इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र की सतह पर स्थित एक कम्युनिकेशन बुआ (तैरता उपकरण) के माध्यम से डेटा भेज सकता है, जबकि खुद उपकरण समुद्र की गहराई में एक एंकर से जुड़ा रहता है।
सटन ने कहा कि इसका उपयोग सैन्य कार्यों में भी किया जा सकता है, इसलिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है कि ऐसा चीनी सेंसर बुआ इस क्षेत्र में मिला है।
चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस मामले की विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन चीन हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री रिसर्च करता है और ऐसे उपकरणों का उपयोग करता है।
प्रवक्ता ने एबीसी से कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सामान्य बात है कि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से ऐसे रिसर्च उपकरण दूसरे देशों के समुद्री क्षेत्र में पहुँच जाते हैं। इसमें कोई ज्यादा संदेह या गलत अर्थ निकालने की आवश्यकता नहीं है।”
सिंगापुर के एक समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ कॉलिन कोह ने कहा कि इस सिस्टम में लगे सेंसर और डेटा भेजने की क्षमता इसे “अंडरसी वॉरफेयर” के लिए उपयुक्त बनाती है।
उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से पनडुब्बियों का पता लगाया जा सकता है, लेकिन उस सिग्नल को प्रोसेस करने के लिए किनारे पर स्थित स्टेशन तक भेजना आवश्यक है।
ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) के अनुसार, इस उपकरण का मिलना चिंता का विषय है और यह दर्शाता है कि भविष्य में सैन्य गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए चीन कुछ आक्रामक कदम उठा सकता है।