1 नवंबर 2026
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आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा, भारत-ग्रीस नौसैनिक सहयोग को मिलेगी नई ताकत

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आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा, भारत-ग्रीस नौसैनिक सहयोग को मिलेगी नई ताकत

सारांश

भूमध्य सागर में तैनात आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे पहुंचा — ब्रिटेन के साथ 'कोंकण-26' अभ्यास के बाद यह अगला कूटनीतिक पड़ाव है। NATO प्रशिक्षण सुविधाओं के दौरे और वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों से मुलाकात के साथ, यह यात्रा भूमध्यसागरीय क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति का संकेत देती है।

मुख्य बातें

आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में तैनाती के दौरान 31 अक्टूबर 2026 को ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा।
चालक दल ग्रीस नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मिलेगा और दोनों देशों के युद्धपोतों का आदान-प्रदान होगा।
नाटो के NMIOTC और सूदा बे नौसैनिक सहायता केंद्र की सुविधाओं से भारतीय नौसैनिक परिचित होंगे।
इससे पहले आईएनएस त्रिशूल ने 8 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच प्लायमाउथ में रॉयल नेवी के साथ 'कोंकण-26' युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया था।
सूदा बे युद्ध समाधि स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और युद्धपोत को आम नागरिकों के लिए खोला जाएगा।

भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में अपनी चल रही तैनाती के दौरान 31 अक्टूबर 2026 को ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पर पहुंचा। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नौसेना और ग्रीस की नौसेना के बीच समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करना तथा दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संबंधों को प्रगाढ़ बनाना है।

बंदरगाह पर होने वाली गतिविधियाँ

आईएनएस त्रिशूल के चालक दल के सदस्य ग्रीस की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी और नौसैनिक एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा करेंगे। साथ ही, सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भी आपसी समझ को मज़बूत करने के अवसर मिलेंगे।

इसके अतिरिक्त, सूदा बे स्थित नौसैनिक सहायता केंद्र (NSA) और नाटो के समुद्री अवरोधन अभियान प्रशिक्षण केंद्र (NMIOTC) की सुविधाओं से भी भारतीय नौसैनिक परिचित होंगे, जिससे उन्हें वहाँ उपलब्ध प्रशिक्षण गतिविधियों की करीबी जानकारी मिलेगी।

शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि एवं जन-दर्शन

चालक दल के सदस्य सूदा बे युद्ध समाधि स्थल पर पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे — यह परंपरा भारतीय नौसेना की विदेश यात्राओं में सम्मान और कूटनीतिक शिष्टाचार का महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसके अलावा, बंदरगाह पर पड़ाव के दौरान आईएनएस त्रिशूल को आम नागरिकों के दर्शन के लिए भी खोला जाएगा।

ब्रिटेन के साथ 'कोंकण-26' अभ्यास के बाद यह अगला पड़ाव

गौरतलब है कि इससे पूर्व आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था, जहाँ 15 अक्टूबर तक रॉयल नेवी के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास 'कोंकण-26' सम्पन्न हुआ। इस अभ्यास में समुद्री सतह पर तालमेल, हवाई गतिविधियाँ और पनडुब्बी-रोधी कार्रवाइयों का प्रशिक्षण शामिल था।

भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच यह वार्षिक अभ्यास दो दशकों से अधिक समय से जारी समुद्री साझेदारी का अभिन्न अंग है। समय के साथ इसके दायरे और जटिलता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है — अब इसमें ऐसे परिदृश्य भी शामिल किए गए हैं जिनमें दोनों नौसेनाओं को विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में एकजुट होकर कार्य करना पड़ता है।

भारत-ग्रीस नौसैनिक संबंधों पर असर

यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत हिंद-प्रशांत से लेकर भूमध्य सागर तक अपनी नौसैनिक उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। ग्रीस, नाटो का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य होने के नाते, यूरोपीय और दक्षिणी भूमध्य क्षेत्र में भारत के समुद्री कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारतीय नौसेना के इस दौरे से द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल हुए। सवाल यह है कि इस बढ़ती उपस्थिति को घरेलू नौसैनिक क्षमता-निर्माण और रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के साथ किस हद तक संतुलित रखा जाएगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे क्यों गया?
आईएनएस त्रिशूल 31 अक्टूबर 2026 को भूमध्य सागर में अपनी तैनाती के दौरान सूदा बे पहुंचा, जिसका उद्देश्य भारत और ग्रीस की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को मज़बूत करना तथा पेशेवर संबंधों को आगे बढ़ाना है।
सूदा बे में आईएनएस त्रिशूल की क्या गतिविधियाँ होंगी?
चालक दल ग्रीस नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मिलेगा। NATO के NMIOTC और नौसैनिक सहायता केंद्र का दौरा किया जाएगा, सूदा बे युद्ध समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और युद्धपोत को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा।
कोंकण-26 युद्धाभ्यास क्या था?
'कोंकण-26' भारत और ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वार्षिक संयुक्त युद्धाभ्यास है, जो 8 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह में आयोजित हुआ। इसमें समुद्री सतह पर तालमेल, हवाई गतिविधियाँ और पनडुब्बी-रोधी कार्रवाइयों का प्रशिक्षण शामिल था।
आईएनएस त्रिशूल किस प्रकार का युद्धपोत है?
आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत है। यह भूमध्य सागर सहित विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में भारत की नौसैनिक उपस्थिति और समुद्री कूटनीति के लिए तैनात किया गया है।
भारत-ग्रीस नौसैनिक सहयोग का क्या महत्त्व है?
ग्रीस नाटो का सदस्य है और भूमध्य सागर में एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है। भारतीय नौसेना के इस दौरे से दोनों देशों के बीच समुद्री साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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