आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा, भारत-ग्रीस नौसैनिक सहयोग को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में अपनी चल रही तैनाती के दौरान 31 अक्टूबर 2026 को ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पर पहुंचा। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नौसेना और ग्रीस की नौसेना के बीच समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करना तथा दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संबंधों को प्रगाढ़ बनाना है।
बंदरगाह पर होने वाली गतिविधियाँ
आईएनएस त्रिशूल के चालक दल के सदस्य ग्रीस की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी और नौसैनिक एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा करेंगे। साथ ही, सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भी आपसी समझ को मज़बूत करने के अवसर मिलेंगे।
इसके अतिरिक्त, सूदा बे स्थित नौसैनिक सहायता केंद्र (NSA) और नाटो के समुद्री अवरोधन अभियान प्रशिक्षण केंद्र (NMIOTC) की सुविधाओं से भी भारतीय नौसैनिक परिचित होंगे, जिससे उन्हें वहाँ उपलब्ध प्रशिक्षण गतिविधियों की करीबी जानकारी मिलेगी।
शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि एवं जन-दर्शन
चालक दल के सदस्य सूदा बे युद्ध समाधि स्थल पर पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे — यह परंपरा भारतीय नौसेना की विदेश यात्राओं में सम्मान और कूटनीतिक शिष्टाचार का महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसके अलावा, बंदरगाह पर पड़ाव के दौरान आईएनएस त्रिशूल को आम नागरिकों के दर्शन के लिए भी खोला जाएगा।
ब्रिटेन के साथ 'कोंकण-26' अभ्यास के बाद यह अगला पड़ाव
गौरतलब है कि इससे पूर्व आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था, जहाँ 15 अक्टूबर तक रॉयल नेवी के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास 'कोंकण-26' सम्पन्न हुआ। इस अभ्यास में समुद्री सतह पर तालमेल, हवाई गतिविधियाँ और पनडुब्बी-रोधी कार्रवाइयों का प्रशिक्षण शामिल था।
भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच यह वार्षिक अभ्यास दो दशकों से अधिक समय से जारी समुद्री साझेदारी का अभिन्न अंग है। समय के साथ इसके दायरे और जटिलता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है — अब इसमें ऐसे परिदृश्य भी शामिल किए गए हैं जिनमें दोनों नौसेनाओं को विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में एकजुट होकर कार्य करना पड़ता है।
भारत-ग्रीस नौसैनिक संबंधों पर असर
यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत हिंद-प्रशांत से लेकर भूमध्य सागर तक अपनी नौसैनिक उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। ग्रीस, नाटो का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य होने के नाते, यूरोपीय और दक्षिणी भूमध्य क्षेत्र में भारत के समुद्री कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारतीय नौसेना के इस दौरे से द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।