भारत-ग्रीस रक्षा वार्ता: समुद्री सहयोग, तटीय सुरक्षा और जहाज निर्माण पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और ग्रीस के समुद्री मामलों एवं द्वीपीय नीति के उप मंत्री स्टेफानोस गिकिकास के बीच 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की गई। समुद्री सहयोग, तटीय सुरक्षा और जहाज निर्माण इस बैठक के मुख्य एजेंडे में रहे।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
रक्षा मंत्रालय ने बैठक के बाद आधिकारिक बयान में कहा, 'दोनों पक्षों ने भारत और ग्रीस के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की, जिसमें समुद्री सहयोग, तटीय सुरक्षा और जहाज निर्माण पर खास जोर दिया गया।' यह बैठक ग्रीक उप मंत्री की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई, जो 'सागरमंथन — द ग्रेट ओशन्स डायलॉग 2026' में भाग लेने के लिए भारत आए हैं।
मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देश प्रमुख समुद्री राष्ट्र हैं और समुद्री क्षेत्र में उनके साझा हित हैं, जिनमें नाविकों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना भी शामिल है।
द्विपक्षीय पृष्ठभूमि
यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते समुद्री जुड़ाव की कड़ी में नवीनतम कदम है। इससे पहले 1 अक्टूबर 2026 को ग्रीस में भारतीय राजदूत रवि शंकर के साथ भी गिकिकास की मुलाकात हो चुकी थी, जिसमें उप मंत्री ने भारत के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करने के प्रति ग्रीस की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
गौरतलब है कि जुलाई 2026 में राजदूत रवि शंकर ने हेलेनिक वायु सेना जनरल स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डेमोस्थेनेस ग्रिगोरियाडिस से भी मुलाकात की थी, जिसमें दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच चल रही सहयोग पहलों पर विचार-विमर्श हुआ था। इस प्रकार यह सहयोग केवल समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि वायु सुरक्षा तक भी विस्तृत हो रहा है।
सागरमंथन संवाद का महत्व
'सागरमंथन — द ग्रेट ओशन्स डायलॉग 2026' एक बहुपक्षीय समुद्री मंच है, जो भारत की हिंद महासागर केंद्रित रणनीतिक सोच को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत क्षेत्रीय समुद्री साझेदारियाँ सुदृढ़ कर रहा है। ग्रीस का इस संवाद में भाग लेना भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाले रणनीतिक जलमार्गों में दोनों देशों की साझा रुचि को रेखांकित करता है।
आम जनता और उद्योग पर असर
जहाज निर्माण क्षेत्र में संभावित सहयोग भारत के घरेलू समुद्री उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकता है। ग्रीस वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े शिपिंग बेड़े वाले देशों में शुमार है और उसका तकनीकी अनुभव भारत के बंदरगाह विकास एवं समुद्री सुरक्षा कार्यक्रमों को गति दे सकता है। तटीय सुरक्षा पर सहयोग से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती और तस्करी रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
आगे की राह
दोनों पक्षों के बीच इस स्तर की वार्ता रक्षा सहयोग ढाँचे को संस्थागत रूप देने का संकेत देती है। आने वाले महीनों में संयुक्त समुद्री अभ्यास या तकनीकी साझेदारी समझौतों पर भी आगे बढ़ा जा सकता है। 'सागरमंथन 2026' के दौरान हुई यह उच्चस्तरीय बैठक भारत-ग्रीस संबंधों को एक नई रणनीतिक दिशा देने की नींव रखती है।