भारत-दक्षिण कोरिया तटरक्षक बलों की 14वीं उच्चस्तरीय बैठक, समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल और दक्षिण कोरिया तटरक्षक बल के बीच 15 अक्टूबर 2026 को दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 14वीं उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें समुद्री खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, समुद्री कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और वास्तविक समय में सूचना-साझाकरण जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक सहमति बनी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल 13 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर है।
बैठक का नेतृत्व और स्वरूप
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तटरक्षक बल के महानिरीक्षक टी. शशि कुमार ने किया और उन्होंने बैठक की अध्यक्षता भी की। दक्षिण कोरिया की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ अधीक्षक जनरल इम म्योंग गिल ने किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक ने परिचालन स्तर से ऊपर उठकर रणनीतिक संवाद का रूप लिया।
मुख्य विषय और सहमति के बिंदु
बैठक में मौजूदा परिचालन व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने पहले से हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सहमति के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं — संयुक्त खोज एवं बचाव अभ्यास, समुद्री प्रदूषण घटनाओं पर त्वरित संयुक्त कार्रवाई, पेशेवर अनुभव साझा करना, संयुक्त प्रशिक्षण आयोजन और दोनों देशों के जहाजों की द्विपक्षीय यात्राएँ बढ़ाना।
भारत-ग्रीस समुद्री सहयोग का समानांतर कदम
उसी दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एथेंस में ग्रीस के समुद्री मामलों एवं द्वीपीय नीति के उप मंत्री स्टेफानोस ग्किकास से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा और जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। दोनों देशों की पूरक क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए संस्थागत सहयोग ढाँचे पर विचार किया गया।
व्यापक समुद्री रणनीति में महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति और भागीदारियों का विस्तार कर रहा है। दक्षिण कोरिया के साथ यह 14वीं बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग लंबे समय से संस्थागत रूप ले चुका है। इंचियोन बैठक और एथेंस वार्ता एक साथ होना भारत की बहु-आयामी समुद्री कूटनीति को रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि दोनों तटरक्षक बलों ने साझा संकल्प जताया कि वे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। आगे चलकर संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और जहाज-यात्राओं का कार्यक्रम निर्धारित किए जाने की उम्मीद है।