11 अक्टूबर 2026
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ईरान का आरोप: अमेरिकी-इजरायली हमलों से तेल प्रतिष्ठानों पर पर्यावरणीय संकट, ट्रंप बोले — परमाणु गारंटी मिले तो हटेंगे

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ईरान का आरोप: अमेरिकी-इजरायली हमलों से तेल प्रतिष्ठानों पर पर्यावरणीय संकट, ट्रंप बोले — परमाणु गारंटी मिले तो हटेंगे

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने तेहरान में 40 दिन के युद्ध में अमेरिकी-इजरायली हमलों से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया — UNEP की पुष्टि के साथ। इधर ट्रंप बोले, सेना तभी हटेगी जब ईरान की परमाणु गारंटी मिलेगी; 18 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत स्वीकारी।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 11 अक्टूबर 2026 को तेहरान सम्मेलन में कहा कि अमेरिकी-इजरायली हमलों से तेल व ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर गंभीर पर्यावरणीय क्षति हुई है।
UNEP ने पुष्टि की कि हाइड्रोकार्बन जलने से खतरनाक रासायनिक तत्व हवा, मिट्टी और पानी में फैल गए हैं।
अराघची ने गाजा और लेबनान में भी सैन्य हमलों से पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान का उल्लेख किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु गारंटी मिलने पर ही अमेरिकी सेना वापस हो सकती है।
ट्रंप ने माना कि अमेरिका सात महीने से संघर्ष में है और इसमें 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं।
ट्रंप ने इस संघर्ष की तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान अभियानों से की।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 11 अक्टूबर 2026 को तेहरान में कहा कि 40 दिन तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के तेल, रिफाइनरी और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों से गंभीर पर्यावरणीय खतरे उत्पन्न हो गए हैं। यह बयान तेहरान में आयोजित 'इकोसाइड, अ साइलेंट वॉर क्राइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया, जो युद्ध के दौरान पर्यावरण को हुए नुकसान पर केंद्रित था।

पर्यावरणीय क्षति का स्वरूप

ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने भी पुष्टि की है कि इन हमलों के बाद लगी आग और हाइड्रोकार्बन पदार्थों के जलने से खतरनाक रासायनिक तत्व वातावरण में फैल गए हैं। अराघची ने कहा कि ये प्रदूषक हवा के ज़रिए मिट्टी और पानी तक पहुँच सकते हैं और खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर सकते हैं। उनका असर हमले के समय और स्थान से कहीं अधिक लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।

गाजा और लेबनान का संदर्भ

अराघची ने अपने संबोधन में गाजा और लेबनान में सैन्य हमलों से हुए पर्यावरणीय नुकसान का भी उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून को युद्ध के दौरान पर्यावरण और मानवाधिकारों को होने वाले नुकसान को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'इकोसाइड' को युद्ध अपराध घोषित करने की माँग जोर पकड़ रही है।

ट्रंप का रुख — परमाणु गारंटी की शर्त

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका तुरंत ईरान में अपनी सैन्य भागीदारी समाप्त कर सकता है, लेकिन ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि तेहरान भविष्य में परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा, 'हम अभी वहां से निकल सकते हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हों। और हम इसे सुनिश्चित करेंगे।'

गौरतलब है कि ट्रंप की यह टिप्पणी टेनेसी के क्लार्क्सविल में दी गई एक चुनावी रैली के बाद आई, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

अमेरिकी सैन्य हानि और संघर्ष की अवधि

ट्रंप ने स्वीकार किया कि अमेरिका लगभग सात महीने से इस संघर्ष में शामिल है और इस दौरान 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों से की। अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, 'हमारे सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन हमने उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है।'

आगे की दिशा

ट्रंप ने संकेत दिया कि सात महीने से चल रहा यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जीत की घोषणा से पहले भविष्य की परमाणु गारंटी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं चाहता कि दो साल बाद फिर यही स्थिति पैदा हो। हमें इसकी गारंटी चाहिए।' ईरान की ओर से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की माँग अब आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक मोर्चे पर नई बहस को जन्म दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के लिए सहानुभूति जुटाने का प्रयास है। लेकिन असली पेचीदगी ट्रंप के बयान में है — 'परमाणु गारंटी' की शर्त रखकर वे न तो जीत की घोषणा कर पा रहे हैं, न ही स्पष्ट निकासी रोडमैप दे रहे हैं। वियतनाम और अफगानिस्तान से तुलना उनके अपने समर्थकों में भी बेचैनी पैदा कर सकती है। अठारह अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत और सात महीने की भागीदारी — यह संख्या आने वाले हफ्तों में घरेलू राजनीतिक दबाव का केंद्र बन सकती है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों पर पर्यावरणीय संकट का आरोप क्यों लगाया?
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि 40 दिनों के युद्ध में तेल, रिफाइनरी और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों से लगी आग और हाइड्रोकार्बन जलने से खतरनाक रसायन हवा, मिट्टी और खाद्य श्रृंखला में फैल गए हैं। UNEP ने भी इस पर्यावरणीय क्षति की पुष्टि की है।
'इकोसाइड, अ साइलेंट वॉर क्राइम' सम्मेलन क्या है?
यह तेहरान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जो युद्ध के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान — जिसे 'इकोसाइड' कहते हैं — को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध घोषित करने की माँग पर केंद्रित है। ईरान ने इसे अमेरिकी-इजरायली हमलों के संदर्भ में एक कूटनीतिक मंच के रूप में उपयोग किया।
ट्रंप ने ईरान से सेना हटाने पर क्या शर्त रखी है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज में कहा कि अमेरिका तभी ईरान से सैन्य भागीदारी समाप्त करेगा जब यह सुनिश्चित हो जाए कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। उन्होंने दोहराया कि वे दो साल बाद फिर उसी स्थिति में नहीं लौटना चाहते।
इस संघर्ष में अब तक कितने अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं?
ट्रंप ने दावा किया कि इस संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका लगभग सात महीने से इस संघर्ष में शामिल है।
ईरान की पर्यावरण क्षतिपूर्ति माँग का आगे क्या असर हो सकता है?
अराघची ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्धकालीन पर्यावरण नुकसान की जवाबदेही की माँग रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह माँग आने वाले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे सकती है, हालाँकि व्यावहारिक क्षतिपूर्ति की राह अभी बेहद जटिल है।
राष्ट्र प्रेस
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