स्विट्जरलैंड वार्ता में ईरान ने भागीदारी रोकी, ट्रंप की धमकी के बाद चार-पक्षीय बैठक अधर में
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 22 जून 2026 को घोषणा की कि स्विट्जरलैंड में जारी चार-पक्षीय वार्ता — जिसमें अमेरिका, कतर और पाकिस्तान शामिल थे — में तेहरान ने अपनी भागीदारी रोक ली है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस धमकी भरे बयान के तुरंत बाद आया, जिसमें उन्होंने ईरान पर सैन्य हमले की चेतावनी दी थी — और यह बयान उसी समय आया जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत की मेज पर बैठे हुए थे।
ईरान ने बातचीत क्यों रोकी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा कि चार-पक्षीय बैठक के दौरान अमेरिका की ओर से दिए गए 'धमकी भरे बयान' के कारण तेहरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह ऐसी परिस्थितियों में वार्ता जारी नहीं रख सकता। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि दूसरे पक्ष को अपनी प्रतिबद्धताओं के प्रति जवाबदेह ठहराया जाए। विशेष रूप से लेबनान में इजरायल द्वारा सीजफायर के कथित उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
गौरतलब है कि कतर और पाकिस्तान ने बातचीत जारी रखने की कोशिश की, लेकिन ईरान अपने निर्णय पर अडिग रहा।
ट्रंप का धमकी भरा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा: 'ईरान को लेबनान में अपने ज़्यादा पैसे वाले प्रॉक्सी को परेशानी पैदा करने से तुरंत रोकना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बस और जोरदार!!!' यह चेतावनी उस समय दी गई जब स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच बातचीत सक्रिय रूप से जारी थी।
अमेरिका ने खबरों को नकारा
अमेरिकी अधिकारियों ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल बातचीत छोड़कर चला गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'ये बहुत ही ज़्यादा झूठी खबर है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अब भी यहाँ है और बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि हम रातभर काम करते रहेंगे।' अधिकारियों ने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा शुरू की गई वार्ता से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान में सीजफायर पर प्रारंभिक प्रगति हुई है।
बातचीत के मुख्य मुद्दे
एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक के अनुसार, चर्चा में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के 'भ्रामक संदेशों' को स्पष्ट करना और जलमार्ग को पूरी तरह खुला रखने के लिए एक तंत्र तैयार करना शामिल था। इसके अलावा दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच फिर से भड़की हिंसा और सीजफायर लागू करने के तरीकों पर भी विस्तृत बातचीत हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब इस हफ्ते की शुरुआत में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के बाद कई अनसुलझे मुद्दे सामने आए हैं, और क्षेत्रीय कूटनीति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या होगा
ईरान की भागीदारी रोकने की घोषणा और अमेरिका के इसे 'झूठी खबर' बताने के बीच के अंतर्विरोध ने वार्ता की स्थिति को अनिश्चित बना दिया है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास की खाई और ट्रंप के सार्वजनिक बयानों का समय कूटनीतिक प्रगति की राह में बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। आने वाले घंटों में यह स्पष्ट होगा कि क्या वार्ता पटरी पर वापस आ सकती है।