ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'समय निकलता जा रहा है', सैन्य विकल्पों पर सिचुएशन रूम बैठक संभव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ईरान को एक और कड़ी चेतावनी जारी की है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के स्पष्ट संकेत दिए हैं, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव का खतरा और गहरा गया है।
ट्रंप का सोशल मीडिया पर सीधा संदेश
ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान के लिए, समय निकलता जा रहा है और उन्हें तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, वरना उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। समय बहुत कीमती है!' यह संदेश उस वक्त आया जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत व्हाइट हाउस में ठप पड़ी हुई है।
अपनी एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने यह भी लिखा कि यदि ईरान समर्पण करे, अपनी नौसेना और वायुसेना के खात्मे को स्वीकार करे और शेष नेतृत्व समझौते पर हस्ताक्षर करे, तभी आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सिचुएशन रूम बैठक और सैन्य विकल्पों पर विचार
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ ईरान युद्ध में आगे के रास्ते पर चर्चा की। यह भी बताया गया कि ट्रंप मंगलवार को शीर्ष सलाहकारों के साथ ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार के लिए एक सिचुएशन रूम बैठक बुला सकते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के लगातार बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप तेहरान के बातचीत के रवैये से बेहद अधीर हो चुके हैं।
ईरान का रुख: बातचीत भी, दृढ़ता भी
इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह अभी भी कूटनीतिक रास्ते पर है। ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से बताया गया कि तेहरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन को एक नया 14-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस प्रस्ताव में संघर्ष समाप्ति और अमेरिकी पक्ष से विश्वास-निर्माण के कदमों पर जोर था। हालाँकि, इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी रियायत का उल्लेख नहीं था।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार किया कि हाल के अमेरिकी हमलों से देश को नुकसान हुआ है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि तेहरान दबाव में झुकने वाला नहीं है। सरकार की सूचना परिषद की एक टेलीविजन बैठक में पेजेश्कियन ने कहा, 'हम आराम या सुविधा के लिए अपने देश की इज्जत और सम्मान को कुर्बान नहीं करेंगे।'
व्यापक क्षेत्रीय तनाव और भारत पर असर
इजरायली रक्षा बलों के अनुसार, इजरायल ने पिछले 24 घंटों में लेबनान में दर्जनों हमले किए। वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने बराक परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत बने अमेरिका-समर्थित क्षेत्रीय गठजोड़ में भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं।
गौरतलब है कि भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। इस संकट पर नई दिल्ली में नीति-निर्माता और बाजार विशेषज्ञ करीबी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल कूटनीतिक और सैन्य दोनों रास्ते एक साथ चल रहे हैं — तेहरान बातचीत का संकेत दे रहा है, जबकि वाशिंगटन सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहा है। यह टकराव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और हथियार महत्वाकांक्षाओं पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में सिचुएशन रूम बैठक के नतीजे और ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिकी प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा तय करेगी।