ईरान से युद्ध में 100 अमेरिकी सैनिक घायल, 17 की मौत; पेंटागन ने आँकड़े स्वीकारे
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने 21 जुलाई 2026 को स्वीकार किया कि ईरान के जवाबी हमलों में उसके 100 सैनिक घायल हुए हैं और अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। यह खुलासा उस समय हुआ जब एक प्रमुख अमेरिकी अखबार ने आरोप लगाया था कि पेंटागन युद्ध में हताहतों की जानकारी छुपा रहा है।
पेंटागन प्रवक्ता का बयान
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया, "ये सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए। इनमें से 96 फीसदी सैनिक ठीक होकर ड्यूटी पर लौट चुके हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश घायलों को हल्की सिर की चोट (कंकशन) आई थी। पार्नेल ने यह भी कहा कि घायलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (DCAS) पर जारी की जाएगी।
मृत सैनिकों की पहचान
शुक्रवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए ईरानी हमले में दो सैनिक मारे गए, जिनकी पहचान सोमवार को सार्वजनिक की गई। फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहान की शुक्रवार को कार्रवाई के दौरान मौत हुई, जबकि प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस शनिवार को मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर ईरानी हमले में मारी गईं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, शनिवार को उत्तरी इराक में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत उस समय हुई जब गिराए गए ईरानी एकतरफा हमलावर ड्रोन के बिना फटे विस्फोटक को नियंत्रित तरीके से निष्क्रिय किया जा रहा था।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: अब तक का हिसाब
पेंटागन के DCAS द्वारा सोमवार को अपडेट किए गए आँकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद से अब तक 427 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। सोमवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे (EDT) अमेरिका ने ईरान पर एक और हवाई हमला किया — यह लगातार 10वाँ दिन था जब अमेरिकी सेना ने सैन्य कार्रवाई की।
राष्ट्रपति ट्रंप का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में न्यूजनेशन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मारे गए सैनिकों ने "देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।" उन्होंने यह भी दोहराया कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना" है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी जनमत में इस युद्ध की लागत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी से जारी है और अब तक के आँकड़े बताते हैं कि हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि DCAS पर जारी होने वाले आगामी आँकड़े अभियान की वास्तविक मानवीय कीमत की अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।