ईरान विदेश मंत्री अराघची का ऐलान: सात सूत्रीय प्रस्ताव कतर के ज़रिए अमेरिका को भेजा, युद्ध और कूटनीति दोनों के लिए तैयार
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तेहरान ने कतर के मध्यस्थों के ज़रिए अपना सात सूत्रीय प्रस्ताव एक बार फिर अमेरिका के समक्ष रखा है और अब वाशिंगटन के आधिकारिक जवाब का इंतज़ार है। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान का रुख दोहरा है — वह कूटनीतिक समाधान के लिए भी तत्पर है और यदि ज़रूरत पड़ी तो युद्ध के लिए भी तैयार है।
न्यूयॉर्क यात्रा का उद्देश्य
अराघची ने बताया कि उनकी न्यूयॉर्क यात्रा का मुख्य मकसद ईरान का पक्ष और रणनीतिक रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखना था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ईरान की स्थिति स्पष्ट और तर्कसंगत है। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, उनका लक्ष्य यह स्थापित करना था कि ईरान के पास एक सुविचारित योजना है और उसकी शर्तें किसी भी न्यायसंगत दृष्टिकोण से उचित हैं।
सात सूत्रीय प्रस्ताव और कतर की मध्यस्थता
अराघची के अनुसार, सोमवार को कतर के एक मध्यस्थ ने एक बार फिर ईरानी पक्ष से मुलाकात की, जिसमें इस बात पर विचार-विमर्श हुआ कि ईरान की शर्तों को किस प्रकार पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कतरी मध्यस्थ के पास कुछ सुझाव थे, जिन पर चर्चा की गई। ये सुझाव अब अमेरिकी पक्ष के समक्ष दोबारा रखे जाएंगे, जिसके बाद वाशिंगटन का अंतिम आधिकारिक जवाब ईरान तक पहुँचाया जाएगा।
होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान की शर्तें
अराघची ने संकेत दिया कि होर्मुज़ स्ट्रेट को खोले रखने के लिए कुछ निश्चित शर्तें हैं जिनका पूरा होना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि ईरान इन शर्तों को अमेरिका के साथ-साथ अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुँचाना चाहता है। गौरतलब है कि होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति की एक अत्यंत संवेदनशील कड़ी है, जिसके ज़रिए दुनिया की लगभग एक-पाँचवीं कच्चे तेल की आवाजाही होती है।
अमेरिका पर आरोप, ईरान की दोहरी तैयारी
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यदि अमेरिका सच में किसी शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में है, तो वह समाधान ईरान पहले ही सामने रख चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका युद्ध चाहता है, ईरान नहीं — किंतु इसके बावजूद ईरान हर परिस्थिति के लिए तैयार है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव लंबे समय से उच्च स्तर पर बना हुआ है और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत कई दौर से अटकी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और आगे की राह
अराघची ने रेखांकित किया कि तमाम दबाव और थोपे गए संघर्षों के बावजूद ईरान ने कूटनीतिक स्तर पर अपना तर्क और समाधान प्रस्तुत किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान कई देशों के बीच ईरान-अमेरिका वार्ता की संभावनाओं पर अटकलें तेज़ हो रही थीं। अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि वाशिंगटन इस सात सूत्रीय प्रस्ताव पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।