ईरानी विदेश मंत्री अराघची बोले — दबाव नहीं चलेगा, अमेरिका समझे तो कूटनीति संभव
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 28 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि यदि वाशिंगटन यह स्वीकार कर ले कि तेहरान पर दबाव की रणनीति बेअसर है, तो अमेरिका-ईरान कूटनीति एक बार फिर पटरी पर लौट सकती है। अराघची ने यह बात एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए कही, जिसमें उन्होंने तेहरान में कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया।
अराघची का संदेश: भरोसा बनाएं, सम्मान से बात करें
अराघची ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कूटनीति को फिर से पटरी पर लाना असंभव नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका एक सरल तथ्य को समझे।' उन्होंने अमेरिका से चार स्पष्ट अपेक्षाएँ रखीं — भरोसा कायम करना, सम्मानपूर्वक संवाद करना, ईरान के अधिकारों को मान्यता देना और अपनी प्रतिबद्धताओं को व्यवहार में उतारना।
यह ऐसे समय में आया है जब 17 अगस्त 2026 को वह 60 दिन की वार्ता-समयसीमा समाप्त हो चुकी है, जो 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत तय की गई थी। उस MoU में दोनों पक्षों ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतिम समझौते पर पहुँचने का लक्ष्य रखा था।
ट्रंप की 'आर्थिक डी-डे' की चेतावनी और तनाव का माहौल
इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सहायता देने वाले किसी भी देश के विरुद्ध 'अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई' का ऐलान किया था। ट्रंप ने कहा था, 'यह अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा' — और इस कदम को उन्होंने 'आर्थिक डी-डे' की संज्ञा दी। इस घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा हो गया, जिससे बातचीत व्यावहारिक रूप से ठप हो गई।
ईरान की कड़ी चेतावनी: होर्मुज़ और सैन्य हित निशाने पर
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने गुरुवार को कतर के प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान चेतावनी दी कि यदि अमेरिका कोई 'दुर्भावनापूर्ण' कृत्य करता है, तो ईरान पश्चिम एशिया में उसके सैन्य और आर्थिक हितों को सीधे निशाना बनाएगा। रेजाई ने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य तभी खोलेगा जब वाशिंगटन तेहरान की शर्तें पूरी करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
गौरतलब है कि रेजाई ने वाशिंगटन पर बार-बार कूटनीति और वार्ता को धोखा देने का आरोप भी लगाया, जो तेहरान के गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
कतर की मध्यस्थ भूमिका
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने तेहरान यात्रा के दौरान क्षेत्रीय स्थिरता में अपने देश की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने क्षेत्रीय जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए ईरान के साथ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। कतर पारंपरिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
आगे क्या
वार्ता की समयसीमा बीत जाने के बाद अब दोनों पक्षों के बीच नई बातचीत की कोई तय तारीख सामने नहीं आई है। अराघची का यह बयान संकेत देता है कि तेहरान कूटनीतिक दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता, लेकिन शर्तें अमेरिका की ओर से पहल पर टिकी हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के रुख को देखते हुए वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भी इस कूटनीतिक गतिरोध पर नज़र बनाए हुए है।