होर्मुज स्ट्रेट में IRGC का बड़ा दावा: पाँच दिनों में 7 तेल टैंकरों पर हमला, ट्रंप बोले 'जल्द खत्म होगा युद्ध'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने कथित तौर पर पिछले पाँच दिनों में होर्मुज स्ट्रेट में नियमों का उल्लंघन करने वाले कम-से-कम सात तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है और अमेरिकी नियंत्रण में है।
मुख्य घटनाक्रम
ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, IRGC नौसेना प्रतिदिन औसतन एक से अधिक तेल टैंकर को निशाना बना रही है। फार्स ने स्वतंत्र सैन्य मामलों के पर्यवेक्षक संगठन 'मेन्चओसिंट' के हवाले से बताया कि शुक्रवार को जलडमरूमध्य में दो अलग-अलग टैंकरों में विस्फोट हुए — एक को प्रवेश के समय और दूसरे को निकासी के दौरान निशाना बनाया गया।
इससे पहले के चार दिनों में कुवैत के दो तेल टैंकर — अल फंटास और काजिमाह — तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तीन जहाज — सिंदबाद, मर्सिन प्रॉस्पेरिटी और अल रुवाइस — भी हमलों का शिकार हुए बताए जाते हैं। ये तथ्य 'मेन्चओसिंट' द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को टेक्सास में पत्रकारों से बातचीत में और बाद में डेंटन स्थित पीटरबिल्ट मोटर्स की एक फैक्ट्री के दौरे के दौरान कहा कि ईरान के साथ संघर्ष 'बहुत जल्द किसी न किसी तरह खत्म होने वाला है।' उन्होंने ईरान को सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर कमज़ोर बताया।
ट्रंप ने कहा, 'वहाँ महँगाई 301 प्रतिशत है। उनके पास पैसा नहीं है, उनकी करेंसी की हालत खराब है। उनकी सेना हार चुकी है, नौसेना खत्म हो चुकी है, वायुसेना खत्म हो चुकी है, सब कुछ खत्म हो चुका है।' उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतें बहुत तेज़ी से नीचे आएँगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ईरान को तय करना है कि संघर्ष किस तरह समाप्त होगा।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है — दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुज़रता है। यदि IRGC की कार्रवाइयाँ जारी रहती हैं, तो ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भारत जैसे तेल-आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता सीधे घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि IRGC की यह कार्रवाई अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप के 'जल्द समाप्ति' के दावे और ज़मीनी स्तर पर जारी हमलों के बीच का अंतर्विरोध वार्ता की असली स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
क्या होगा आगे
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी राजनयिक प्रगति की रफ़्तार क्या रहती है। यदि टैंकर हमले जारी रहते हैं और वार्ता ठंडी रहती है, तो वैश्विक तेल बाज़ारों में अनिश्चितता और गहरी हो सकती है।