ईरान पर लगातार 13वीं रात अमेरिकी हमले, सैन्य ठिकानों को फिर बनाया निशाना
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने 24 जुलाई 2026 को गुरुवार शाम ईस्टर्न टाइम के अनुसार शाम 6:45 बजे ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों का एक और दौर शुरू किया — यह लगातार 13वीं रात थी जब अमेरिका ने ईरान पर बमबारी की। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य "ईरान को जवाबदेह ठहराना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से कमर्शियल शिपिंग को होने वाले खतरों को कम करना" था।
नौसेना नाकेबंदी और शिपिंग पर असर
सेंटकॉम ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में ईरान के खिलाफ नौसेना नाकेबंदी फिर से लागू करने के बाद से अमेरिकी सेना ने 12 कमर्शियल जहाजों को मार्ग बदलने पर मजबूर किया है और एक जहाज को ईरानी बंदरगाहों या तटीय इलाकों में आने-जाने से रोका है। नाकेबंदी को फिर से लागू हुए नौ दिन हो चुके हैं और इसका असर खाड़ी क्षेत्र के समुद्री व्यापार पर साफ दिखने लगा है।
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर पर धमाका
गुरुवार को ही आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में तीन तेल टैंकरों को रोका, जो माइन बिछाए गए रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। आईआरजीसी के बयान के अनुसार, इनमें से एक टैंकर में धमाका हुआ और आग लग गई, जिसके बाद बाकी दो जहाज तेजी से वापस लौट गए। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज का "यही हश्र होगा।"
पिछली रात के हमलों का विवरण
बुधवार को अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात पूरे ईरान में हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान के अहवाज, रामशीर और अंदिमेशक शहरों के निकट स्थानों को निशाना बनाया। इसके अलावा दक्षिणी ईरान में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास एक पावर स्टेशन और इराकी सीमा पर शालमचेह शहर में दो स्थानों पर भी हमले किए गए।
ट्रंप का बड़े ऑपरेशन का संकेत
गुरुवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस को बताया कि वे ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं — जो 28 फरवरी को शुरू किए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से भी बड़े पैमाने के होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है और होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। लगातार हमलों और नौसेना नाकेबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संघर्ष और गहरा हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।