ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट के पास टैंकर हमले के बाद 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जून को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट के पास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई जब ईरान ने कथित तौर पर पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकू पर एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन दागा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हमले जारी रहे तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
टैंकर हमला और अमेरिकी जवाबी कार्रवाई
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने कथित तौर पर एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन लॉन्च किया जिसने भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे टैंकर एम/टी किकू को निशाना बनाया। हमले के समय यह टैंकर 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के निकट से गुजर रहा था। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि ये हमले सीधे राष्ट्रपति के निर्देश पर किए गए।
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को एक अन्य जहाज एम/वी एवर लवली पर हमले के बाद भी अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की थी और ईरान को सीजफायर का अवसर दिया था। CENTCOM का दावा है कि ईरान ने उस समझौते का सम्मान नहीं किया।
ट्रंप की ट्रूथ सोशल पोस्ट — सीधी चेतावनी
ट्रंप ने अपनी ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर भी हमला किया था। सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों और कोस्टल रडार साइट्स पर फिर से हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!'
उन्होंने आगे कहा, 'एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा!'
CENTCOM का आधिकारिक बयान
CENTCOM ने एक अलग पोस्ट में पुष्टि की कि 'अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट में और उसके आसपास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।' इन ठिकानों में मिसाइल व ड्रोन भंडारण केंद्र और तटीय रडार प्रतिष्ठान शामिल बताए जा रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही सीजफायर की नाज़ुक स्थिति बनी हुई थी, और यह ताज़ा टकराव उस स्थिरता को गंभीर रूप से चुनौती देता है।
वैश्विक तेल बाज़ार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ारों में अस्थिरता की आशंका गहरा गई है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत समेत तेल आयातक देशों पर भी होगा।
आगे क्या होगा
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। ट्रंप के बयान की तीव्रता को देखते हुए कूटनीतिक हलकों में गहरी चिंता व्याप्त है। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यह टकराव एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।