28 जून 2026
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ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट के पास टैंकर हमले के बाद 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक

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ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट के पास टैंकर हमले के बाद 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकर एम/टी किकू पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा — अगर हमले नहीं रुके तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जून को ईरानी सैन्य ठिकानों पर नई एयर स्ट्राइक की पुष्टि की।
CENTCOM ने होर्मुज स्ट्रेट के पास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें मिसाइल-ड्रोन भंडार और तटीय रडार साइट्स शामिल हैं।
ईरान ने कथित तौर पर पनामा के झंडे वाले टैंकर एम/टी किकू पर एकतरफा ड्रोन हमला किया, जो 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर जा रहा था।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हमले जारी रहे तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व नहीं रहेगा।
CENTCOM के अनुसार ईरान को शुक्रवार की जवाबी कार्रवाई के बाद सीजफायर का अवसर दिया गया था, जिसे ईरान ने नहीं माना।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जून को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट के पास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई जब ईरान ने कथित तौर पर पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकू पर एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन दागा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हमले जारी रहे तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

टैंकर हमला और अमेरिकी जवाबी कार्रवाई

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने कथित तौर पर एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन लॉन्च किया जिसने भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे टैंकर एम/टी किकू को निशाना बनाया। हमले के समय यह टैंकर 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के निकट से गुजर रहा था। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि ये हमले सीधे राष्ट्रपति के निर्देश पर किए गए।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को एक अन्य जहाज एम/वी एवर लवली पर हमले के बाद भी अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की थी और ईरान को सीजफायर का अवसर दिया था। CENTCOM का दावा है कि ईरान ने उस समझौते का सम्मान नहीं किया।

ट्रंप की ट्रूथ सोशल पोस्ट — सीधी चेतावनी

ट्रंप ने अपनी ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर भी हमला किया था। सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों और कोस्टल रडार साइट्स पर फिर से हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!'

उन्होंने आगे कहा, 'एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा!'

CENTCOM का आधिकारिक बयान

CENTCOM ने एक अलग पोस्ट में पुष्टि की कि 'अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट में और उसके आसपास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।' इन ठिकानों में मिसाइल व ड्रोन भंडारण केंद्र और तटीय रडार प्रतिष्ठान शामिल बताए जा रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही सीजफायर की नाज़ुक स्थिति बनी हुई थी, और यह ताज़ा टकराव उस स्थिरता को गंभीर रूप से चुनौती देता है।

वैश्विक तेल बाज़ार पर असर

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ारों में अस्थिरता की आशंका गहरा गई है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत समेत तेल आयातक देशों पर भी होगा।

आगे क्या होगा

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। ट्रंप के बयान की तीव्रता को देखते हुए कूटनीतिक हलकों में गहरी चिंता व्याप्त है। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यह टकराव एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक खतरनाक सीढ़ी-दर-सीढ़ी बढ़ते टकराव की अभिव्यक्ति है जो होर्मुज स्ट्रेट जैसे वैश्विक ऊर्जा-धमनी पर केंद्रित है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है वह यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं — ऐसे में 'पहले किसने किया' की जवाबदेही तय करना कूटनीतिक रूप से जटिल हो जाता है। भारत के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाला तेल हमारी ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है — और यह संकट सीधे हमारी आयात लागत और व्यापार मार्गों को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान के किन ठिकानों पर हमला किया?
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट में और उसके आसपास 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें मिसाइल व ड्रोन भंडारण केंद्र और तटीय रडार साइट्स शामिल हैं। ये हमले राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे निर्देश पर किए गए।
एम/टी किकू टैंकर पर हमला क्यों हुआ?
CENTCOM का दावा है कि ईरान ने एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन लॉन्च किया जिसने 28 जून को भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे पनामा के झंडे वाले टैंकर एम/टी किकू को निशाना बनाया। यह टैंकर उस समय 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था।
ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
ट्रंप ने अपनी ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा कि यदि हमले जारी रहे तो एक समय ऐसा आ सकता है जब सैन्य बल का उपयोग करना अपरिहार्य हो जाएगा, और उस स्थिति में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व नहीं रहेगा। यह अब तक की सबसे कड़ी अमेरिकी चेतावनियों में से एक मानी जा रही है।
सीजफायर समझौता क्यों टूटा?
CENTCOM के अनुसार, शुक्रवार को एम/वी एवर लवली पर हमले के बाद अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान को सीजफायर का अवसर दिया गया था। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि ईरान ने इस समझौते का पालन नहीं किया और शनिवार सुबह फिर से एम/टी किकू पर ड्रोन हमला किया।
होर्मुज स्ट्रेट पर इस तनाव का वैश्विक तेल बाज़ार पर क्या असर होगा?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग है। इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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