अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर किए बड़े हवाई हमले, ट्रंप बोले- 'जवाब देना ज़रूरी था'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका ने 10 जून 2026 को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जो एक दिन पहले होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर ईरान द्वारा अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने की प्रतिक्रिया में किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन हमलों की पुष्टि की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन के बाद कहा कि यह हमले 'बहुत जबरदस्त और बहुत ताकतवर' थे।
हमले कब और कहाँ हुए
सेंटकॉम के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे आदेश पर ये हमले शाम 5 बजे अमेरिकी पूर्वी समय (यानी 21:00 GMT) पर शुरू किए गए। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास, केशम द्वीप, सिरिक काउंटी और जास्क काउंटी में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं और वहाँ एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए।
अर्ध-सरकारी तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि सिरिक, केशम द्वीप और दक्षिणी शहर मीनाब में छह धमाकों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्टों के अनुसार इन इलाकों पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने हमला किया।
अपाचे हेलीकॉप्टर घटना की पृष्ठभूमि
इससे पहले मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' अकाउंट पर लिखा, 'मुझे अभी जानकारी मिली है कि कल रात ईरानियों ने हमारे बेहद उन्नत अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया, जबकि वह होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहा था।' ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई। बावजूद इसके उन्होंने कहा, 'इस हमले का जवाब देना अमेरिका के लिए ज़रूरी है।'
हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, लेकिन दोनों चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।
इज़रायल की भूमिका और क्षेत्रीय तनाव
इज़रायली सेना के प्रमुख एयाल ज़मीर ने देश के उत्तरी हिस्से में एक सैन्य अभ्यास के दौरान स्थिति की गंभीरता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि ईरान पर हाल में किए गए हमले 'एक कहीं बड़े और ज़्यादा ताकतवर हमले की तैयारी भर हैं।' ज़मीर ने यह भी कहा कि इज़रायल डिफेंस फोर्सेज़ (IDF) ज़रूरत पड़ने पर दोबारा कार्रवाई करने और ईरान को एक और कड़ा व व्यापक झटका देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह अमेरिकी हमले ऐसे समय में हुए जब इज़रायल ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में भी हमले फिर से शुरू कर दिए। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से इज़रायल और ईरान के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव तेज़ी से बढ़ा है।
आगे क्या होगा
स्थिति बेहद नाज़ुक बनी हुई है। IDF प्रमुख ज़मीर के बयान और अमेरिकी ऑपरेशन की व्यापकता को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव अभी और गहरा हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट — जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है — के पास बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर भी असर डाल सकती हैं।