28 जून 2026
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अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए हवाई हमले, तेहरान ने बताया संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन

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अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए हवाई हमले, तेहरान ने बताया संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन

सारांश

18 जून का युद्धविराम महज दस दिन भी नहीं टिका। होर्मुज में पनामाई ऑयल टैंकर एम/टी किकू पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरानी सर्विलांस और मिसाइल ठिकानों पर जवाबी हमले किए। ट्रंप ने इस्लामिक रिपब्लिक के अस्तित्व तक को खतरे में बताया — और तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देकर जवाब दिया।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेना ने 28 जून 2026 को ईरान के दक्षिणी समुद्र तट पर मॉनिटरिंग और सर्विलांस सुविधाओं पर हवाई हमले किए।
हमले की तत्काल वजह: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पनामाई ऑयल टैंकर एम/टी किकू पर ईरानी ड्रोन हमला ( भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे )।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी — यदि ईरान नहीं रुका तो 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा।' ईरानी विदेश मंत्रालय ने हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर अनुच्छेद 2(4) और 18 जून के युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया।
ईरान ने यूएन चार्टर अनुच्छेद 51 के तहत राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा का अधिकार जताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की माँग की।

अमेरिकी सेना ने 28 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान के दक्षिणी समुद्र तट पर स्थित कई मॉनिटरिंग और सर्विलांस सुविधाओं पर हवाई हमले किए, जिसके बाद अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते पर गहरा संकट छा गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 18 जून के युद्धविराम समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ एक का 'खुला उल्लंघन' करार दिया है।

हमले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, शुक्रवार को पनामा के झंडे वाले ऑयल टैंकर एमवी एवर लवली पर हमले के जवाब में अमेरिका ने पहली जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान को युद्धविराम समझौते का पालन करने का अवसर दिया गया। हालाँकि कमांड का दावा है कि ईरान ने इस अवसर का सम्मान नहीं किया।

कमांड के अनुसार, भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट से गुजर रहे पनामाई ऑयल टैंकर एम/टी किकू को निशाना बनाते हुए एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन लॉन्च किया। इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए।

ट्रंप की चेतावनी और ट्रुथ सोशल पोस्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा कि अमेरिकी विमानों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर हमला किया। उन्होंने आगे कहा, 'सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरान की मिसाइल और ड्रोन भंडारण जगहों और तटीय रडार साइट्स पर फिर से हमला किया गया। बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे।'

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि 'एक समय ऐसा आ सकता है, जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को सैन्य बल से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा होता है तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा।'

ईरान की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक रुख

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने ईरानी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान साझा किया, जिसमें कहा गया कि 'ये बर्बर हमले संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन हैं। साथ ही 18 जून को थोपे गए युद्ध की समाप्ति पर समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ एक का भी स्पष्ट उल्लंघन हैं।'

बयान में यह भी कहा गया कि 'इस तरह की कार्रवाइयाँ दर्शाती हैं कि अमेरिकी प्रशासन अपनी प्रतिबद्धताओं को न तो गंभीरता से लेता है और न ही उन्हें विश्वसनीय मानता है।' ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के इरादे को दोहराया।

संयुक्त राष्ट्र से अपील

ईरानी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और यूएन महासचिव को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाई। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा।

आगे क्या हो सकता है

यह ऐसे समय में आया है जब 18 जून का युद्धविराम समझौता महज दस दिन पुराना था और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनल अभी सक्रिय थे। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है और यहाँ तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के कठोर रुख को देखते हुए निकट भविष्य में कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ सीमित दिखती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सुरक्षा परिषद में अमेरिकी वीटो शक्ति को देखते हुए इसका व्यावहारिक असर सीमित रहेगा।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पनामाई ऑयल टैंकर एम/टी किकू पर एकतरफा ड्रोन हमला किया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी मिसाइल-ड्रोन भंडारण स्थलों और तटीय रडार साइट्स पर हवाई हमले किए। इससे पहले एमवी एवर लवली पर हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई हुई थी।
18 जून का युद्धविराम समझौता क्या था?
18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को रोकना था। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के ताजा हमले इस समझौते के पैराग्राफ एक का सीधा उल्लंघन हैं।
ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरान ने अपनी हरकतें नहीं रोकीं तो एक ऐसा समय आ सकता है जब 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को सैन्य बल से वह काम पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है जो पहले शुरू किया गया था।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला क्यों दिया?
ईरान ने यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि उसे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का अधिकार है। साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और यूएन महासचिव से अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
होर्मुज जलडमरूमध्य में यह तनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहाँ किसी भी सैन्य टकराव से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों, शिपिंग बीमा दरों और कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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