ट्रंप का अंकारा में ऐलान: 'ईरान के साथ एमओयू खत्म', IRGC ने 85 अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि उनके अनुसार ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब समाप्त हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूएस सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच सैन्य तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है।
ट्रंप के तीखे बोल — 'वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं'
कुछ सप्ताह पहले तक तेहरान के प्रति अपेक्षाकृत लचीला रुख रखने वाले ट्रंप ने इस बार कड़े शब्दों का सहारा लिया। उन्होंने कहा, 'उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं।' हालाँकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि 'वो लोग केवल समय बर्बाद कर रहे हैं।'
यह बयान ट्रंप के उस रुख से उल्लेखनीय बदलाव दर्शाता है जब कुछ हफ्ते पहले परमाणु वार्ता की संभावना को खुला रखा गया था। गौरतलब है कि यह बदलाव उस दौर में आया है जब क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है।
सैन्य टकराव: हमले और जवाबी हमले के दावे
USCENTCOM की ओर से ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे के बाद IRGC ने भी अमेरिका के 85 बेस पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही। ईरानी सेना ने दावा किया कि दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को ड्रोन हमले से निशाना बनाया गया।
ईरानी सेना ने आगे चेतावनी दी कि 'अमेरिका द्वारा युद्धविराम का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन करने के गंभीर परिणाम होंगे' और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब 'सैन्य ड्रोन हमलों के वैध लक्ष्य' माने जाएँगे।
खाड़ी देशों की चिंता — यूएई का कड़ा संदेश
यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने बुधवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में कतर और सऊदी अरब के कमर्शियल टैंकरों पर ईरान के हमले और बहरीन व कुवैत के खिलाफ बार-बार की आक्रामकता यह सिद्ध करती है कि तेहरान तनाव कम करने में 'असमर्थ' है।
गर्गश ने लिखा, 'खाड़ी के अरब देश, तनाव बढ़ाने और समझदारी, स्थिरता व शांति के रास्ते के बीच ईरान के बदलते रुख का निशाना नहीं बन सकते।' यह बयान खाड़ी देशों की बढ़ती बेचैनी को उजागर करता है।
क्या होगा आगे
ट्रंप के एमओयू खत्म होने के संकेत और IRGC की जवाबी धमकियों के बाद कूटनीतिक रास्ता संकरा होता दिख रहा है। विश्लेषकों के अनुसार नाटो शिखर सम्मेलन के मंच से आई यह टिप्पणी वाशिंगटन की ईरान नीति में आधिकारिक बदलाव का संकेत हो सकती है। होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक नौवहन की सुरक्षा और खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति आने वाले दिनों में केंद्रीय मुद्दे बने रहेंगे।