इजरायली सैन्य प्रमुख एयाल जमीर की चेतावनी: लेबनानी सेना जमीन पर असर दिखाए तभी हिज्बुल्लाह समझौते में आगे बढ़ेगा इजरायल
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने 17 सितंबर 2026 को स्पष्ट कर दिया कि लेबनान के साथ हिज्बुल्लाह को हथियारमुक्त करने संबंधी किसी भी समझौते में तब तक कोई ठोस प्रगति संभव नहीं, जब तक लेबनानी सशस्त्र बल जमीनी स्तर पर अपनी प्रभावशीलता में स्पष्ट और मापनीय सुधार नहीं करते। यह बयान अमेरिकी मध्यस्थता में प्रस्तावित नई सुरक्षा वार्ता से महज कुछ सप्ताह पहले आया है, जो अक्टूबर में रोम में होनी है।
जमीर का बयान और शर्त
बुधवार को लेबनान सीमा के निकट तैनात इजरायली सैनिकों से मुलाकात के दौरान जमीर ने कहा, 'हम लिटानी नदी के दक्षिण वाले क्षेत्र से हिज्बुल्लाह की मौजूदगी खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा बड़ा लक्ष्य हिज्बुल्लाह को पूरी तरह हथियारमुक्त करना भी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक लेबनानी सशस्त्र बल जमीन पर अपनी प्रभावशीलता में स्पष्ट सुधार नहीं करते, तब तक लेबनानी सरकार के साथ किसी संभावित समझौते के तहत इस लक्ष्य को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
जमीर ने यह भी बताया कि इजरायल की नई रक्षा रणनीति इस सिद्धांत पर टिकी है कि सैनिकों की मौजूदगी 'सीमा के पार, दुश्मन के इलाके के अंदर तक' बनी रहे। फिलहाल इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में सीमा से लगभग 10 किलोमीटर अंदर तक तैनात है।
रोम वार्ता और अमेरिकी भूमिका
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधि अक्टूबर में रोम में फिर से वार्ता की मेज पर बैठने वाले हैं। अमेरिकी मध्यस्थता में होने वाली इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक टिकाऊ सुरक्षा समझौते तक पहुँचना है। यह ऐसे समय में आया है जब जून में हुए युद्धविराम के ढाँचे के तहत इजरायली सेना की वापसी और हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से ठप पड़ी है।
गौरतलब है कि जून युद्धविराम के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में लगभग रोजाना हवाई हमले करता रहा है, जिससे शांति प्रक्रिया की जमीन लगातार कमजोर हुई है।
नेतन्याहू की चेतावनी
इसी क्रम में, सोमवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इजरायल दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढाँचे को नष्ट करना जारी रखेगा। नेतन्याहू ने कहा, 'हम लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद आतंकी ढाँचे को नष्ट करना जारी रखेंगे।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि इजरायल पर हमला किया गया, तो प्रतिक्रिया और भी कड़ी होगी।
यह 'सुरक्षा क्षेत्र' दक्षिणी लेबनान का वह इलाका है जहाँ जून युद्धविराम के बावजूद इजरायली सैनिक अभी भी तैनात हैं।
लेबनान की माँग और गतिरोध
लेबनान कई बार माँग कर चुका है कि इजरायली सेना उसकी सीमा से पूरी तरह बाहर निकले। लेकिन इजरायल इस माँग को अपनी सुरक्षा शर्तों के साथ जोड़कर देखता है — विशेष रूप से हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनानी सेना की दक्षिण में प्रभावशाली तैनाती से। यह ऐसी स्थिति है जहाँ दोनों पक्षों की माँगें एक-दूसरे की पूर्व-शर्त बन गई हैं, जिससे गतिरोध और गहरा होता जा रहा है।
आगे क्या होगा
अक्टूबर में रोम वार्ता इस गतिरोध को तोड़ने का अगला मौका होगी। हालाँकि, विश्लेषकों का मानना है कि जमीर के ताजा बयान ने इजरायल की शर्तों को और कठोर बना दिया है। यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिका की मध्यस्थता दोनों पक्षों को किसी व्यावहारिक समझौते की दिशा में ले जा सकती है, या यह वार्ता भी पिछले दौरों की तरह अधर में लटकी रह जाएगी।