इजरायली हमलों से लेबनान को ₹16,600 करोड़ ($2 अरब) का नुकसान, अर्थव्यवस्था मंत्री ने GDP का 7% बताया
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के अर्थव्यवस्था मंत्री आमेर बिसात ने खुलासा किया है कि 2 मार्च 2026 के बाद से जारी इजरायली सैन्य हमलों के कारण लेबनान को लगभग 2 अरब डॉलर (लेबनान की GDP का करीब 7 प्रतिशत) का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। बिसात ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह संकट देश की रोज़गार व्यवस्था, कृषि, उद्योग और पर्यटन — सभी क्षेत्रों को एक साथ झकझोर रहा है।
आर्थिक नुकसान का विस्तार
बिसात के अनुसार, 'इसका असर काफी बड़ा रहा है। हमें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी नौकरियाँ गँवा रहे हैं, खेतों में उत्पादन बंद हो रहा है, निर्माण कंपनियाँ बंद हो रही हैं और पर्यटक नहीं आ रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 2 अरब डॉलर का अनुमान केवल प्रत्यक्ष नुकसान का है — दीर्घकालिक प्रभाव इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब लेबनान पहले से ही एक दशक से अधिक की राजनीतिक अस्थिरता, 2020 के बेरूत बंदरगाह विस्फोट और गहरे वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बेलआउट वार्ता में उलझी हुई है।
दक्षिणी लेबनान में ताज़ा हमला: दो की मौत
लेबनान की आधिकारिक समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, रविवार को दक्षिणी लेबनान के हबौश शहर के अल-साहा इलाके में इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमला किया। इस हमले में एक घर पूरी तरह तबाह हो गया और मुहम्मद हसन जमूल तथा उनकी पत्नी सकीना मुहम्मद अब्बास मक्की की मौत हो गई।
इजरायली सेना का पक्ष
इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि रात के दौरान हिज्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली बलों की ओर रॉकेट और विस्फोटक ड्रोन दागे, हालाँकि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ। IDF ने यह भी कहा कि उत्तरी इजरायल के मिसगाव आम क्षेत्र में सायरन बजने के बाद एक 'संदिग्ध हवाई लक्ष्य' की पहचान की गई, जो कथित तौर पर दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली सैनिकों के पास गिरा — इसमें भी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इजरायल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई हिज्बुल्लाह के हमलों के जवाब में जारी है। हिज्बुल्लाह इन दावों को आंशिक रूप से स्वीकार करता है और अपने हमलों को इजरायली आक्रामकता का जवाब बताता है।
आम जनता पर असर
लगातार जारी संघर्ष के बीच लेबनान के आम नागरिकों का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। कृषि क्षेत्र में उत्पादन ठप होने से ग्रामीण आबादी सबसे अधिक प्रभावित है, जबकि पर्यटन उद्योग — जो कभी लेबनान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ था — लगभग पूरी तरह बैठ गया है। निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छँटनी की खबरें हैं।
आगे क्या होगा
आर्थिक मंत्री बिसात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप और मानवीय सहायता की अपील की है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि संघर्ष इसी गति से जारी रहा, तो 2026 के अंत तक लेबनान की GDP में और गिरावट अपरिहार्य है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक वार्ता की संभावनाएँ अभी अनिश्चित बनी हुई हैं।