8 अक्टूबर 2026
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इटली में 'बोनस सीट बिल' पर आज निर्णायक वोट, PM मेलोनी बोलीं — पास न हुआ तो दूंगी इस्तीफा

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इटली में 'बोनस सीट बिल' पर आज निर्णायक वोट, PM मेलोनी बोलीं — पास न हुआ तो दूंगी इस्तीफा

सारांश

इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी ने इस्तीफे की चेतावनी के साथ 'बोनस सीट बिल' को अपनी सरकार का अस्तित्व-प्रश्न बना दिया है। आज निचले सदन में गुप्त मतदान से तय होगा कि चुनाव जीतने वाले गठबंधन को 105 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी या नहीं — और मेलोनी सत्ता में रहेंगी या नहीं।

मुख्य बातें

इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी ने कहा — 'बोनस सीट बिल' पास न हुआ तो देंगी इस्तीफा ।
बिल के तहत चुनाव जीतने वाले गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं, शर्त है कम से कम 42% वोट।
8 अक्टूबर 2026 को निचले सदन (चैंबर ऑफ डेप्युटीज़) में गुप्त मतदान से अंतिम फैसला होगा।
इस सप्ताह तीन विश्वास मतों में सत्ताधारी गठबंधन को आसान बहुमत मिला, पर पहली रीडिंग में हार हुई थी।
विपक्ष ने बिल को असंवैधानिक बताया और संवैधानिक अदालत में चुनौती देने की घोषणा की।
आलोचकों का आरोप — सत्ताधारी गठबंधन अगले आम चुनाव में हार के डर से नियम बदल रहा है।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के लिए 8 अक्टूबर 2026 का दिन राजनीतिक रूप से अत्यंत निर्णायक है। देश के निचले सदन (चैंबर ऑफ डेप्युटीज़) में गुरुवार को उस विवादास्पद चुनाव सुधार विधेयक पर अंतिम मतदान होना है, जिसे 'बोनस सीट बिल' के नाम से जाना जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत आम चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें दी जा सकती हैं। मेलोनी ने स्पष्ट कह दिया है कि यदि यह कानून पारित नहीं हुआ तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगी।

बिल में क्या है प्रावधान

इतालवी समाचार एजेंसी 'एएनएसए' की रिपोर्टों के अनुसार, सत्ताधारी गठबंधन द्वारा पेश किए गए इस नए चुनाव कानून के अनुसार, यदि कोई पार्टी या गठबंधन दोनों सदनों में कम से कम 42 प्रतिशत वोट हासिल करता है, तो उसे 105 बोनस सीटें मिलेंगी। यदि यह सीमा पार नहीं होती या निचले सदन और सीनेट के नतीजों में अंतर होता है, तो पूर्ण आनुपातिक प्रणाली लागू होगी।

बिल में यह भी प्रावधान है कि गठबंधनों को चुनाव से पूर्व ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित करना होगा। इसके अलावा, मतदाताओं को पार्टी सूची में दर्ज छह उम्मीदवारों में से अधिकतम तीन के लिए अपनी पसंद व्यक्त करने का अधिकार होगा। इस सूची में उम्मीदवारों के नाम लिंग के आधार पर बारी-बारी से रखने होंगे।

मतदान की प्रक्रिया और पृष्ठभूमि

गुरुवार का यह अंतिम मतदान गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट) के ज़रिए होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले निचले सदन में बिल की पहली रीडिंग के दौरान गुप्त मतदान में सत्ताधारी गठबंधन को एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। हालाँकि, इस सप्ताह की शुरुआत में तीन अहम विश्वास मतों (कॉन्फिडेंस वोट) में बिल को सहज बहुमत मिल गया था, जिससे गुरुवार को किसी बड़े उलटफेर की संभावना कम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब इटली में राजनीतिक स्थिरता एक पुरानी चुनौती रही है। पिछले कई दशकों में देश ने बार-बार सरकारें बदली हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं में अस्थिरता की एक निरंतर प्रवृत्ति को दर्शाता है।

सरकार और विपक्ष के तर्क

सत्ताधारी गठबंधन का तर्क है कि इस नई व्यवस्था से राजनीतिक स्थिरता आएगी, चुनावों में एक स्पष्ट विजेता उभरेगा और बार-बार सरकारें गिरने का सिलसिला थमेगा। उनका मानना है कि 42 प्रतिशत की सीमा बोनस को उचित और प्रतिस्पर्धी बनाती है।

वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रणाली चुनाव जीतने वाले गठबंधन को आवश्यकता से अधिक शक्ति दे देगी। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि सत्ताधारी गठबंधन अगले आम चुनाव में संभावित हार के डर से चुनावी नियमों को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रहा है।

इसके अतिरिक्त, विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं को दिया गया उम्मीदवार-चयन का विकल्प एक 'नकली पसंद' है, क्योंकि सूची का मुखिया हमेशा 'ब्लॉक' रहेगा और सैद्धांतिक रूप से सभी सूची प्रमुख पुरुष हो सकते हैं — जो लैंगिक समानता के विरुद्ध होगा।

संवैधानिक चुनौती की तैयारी

विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि यदि यह बिल पारित होता है, तो वे इसे इटली की संवैधानिक अदालत में चुनौती देंगे। उनका मानना है कि बोनस सीटों वाली यह प्रणाली संविधान के मूल प्रावधानों के विरुद्ध है।

आगे की राह

यदि आज निचले सदन में बिल पास होता है, तो इसे संसद के ऊपरी सदन (सीनेट) में भी मंजूरी की आवश्यकता होगी। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस वोट का परिणाम न केवल मेलोनी सरकार की स्थिरता, बल्कि इटली की चुनावी राजनीति की दीर्घकालिक दिशा भी तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह वही सीमा है जो उनके मौजूदा वोट-शेयर के करीब है — यानी नियम उनके अनुकूल गढ़े गए हैं। विपक्ष का 'नकली पसंद' वाला तर्क दरअसल एक गहरे लोकतांत्रिक प्रश्न को उठाता है: क्या बोनस सीटें प्रतिनिधित्व को मजबूत करती हैं या बहुमत की तानाशाही को? इटली का राजनीतिक इतिहास बताता है कि चुनावी नियमों में बदलाव अक्सर तात्कालिक राजनीतिक जरूरतों से प्रेरित होते हैं, दीर्घकालिक लोकतांत्रिक हित से नहीं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इटली का 'बोनस सीट बिल' क्या है?
यह एक प्रस्तावित चुनाव सुधार कानून है जिसके तहत आम चुनाव में कम से कम 42 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें दी जाएंगी। यदि यह सीमा पार नहीं होती, तो पूर्ण आनुपातिक प्रणाली लागू होगी।
PM मेलोनी ने इस्तीफे की धमकी क्यों दी है?
PM जॉर्जिया मेलोनी ने साफ कहा है कि यदि 'बोनस सीट बिल' संसद में पास नहीं हुआ तो वे इस्तीफा दे देंगी। इस बयान से यह वोट उनकी सरकार के अस्तित्व से सीधे जुड़ गया है।
इटली का विपक्ष इस बिल का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का कहना है कि बोनस सीटें जीतने वाले गठबंधन को जरूरत से ज्यादा शक्ति दे देंगी और यह प्रणाली असंवैधानिक है। उनका आरोप यह भी है कि सत्ताधारी गठबंधन अगले आम चुनाव में हार के डर से नियम बदल रहा है, और वे इसे संवैधानिक अदालत में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
बिल में मतदाताओं के लिए क्या नया प्रावधान है?
बिल के तहत मतदाता पार्टी सूची में दर्ज छह उम्मीदवारों में से अधिकतम तीन के लिए अपनी पसंद जाहिर कर सकेंगे। सूची में उम्मीदवारों के नाम लिंग के आधार पर बारी-बारी से रखने होंगे, हालाँकि विपक्ष इसे 'नकली पसंद' बताता है।
आज के मतदान के बाद बिल का अगला कदम क्या होगा?
यदि निचले सदन में बिल पारित होता है, तो इसे इटली के ऊपरी सदन — सीनेट — की मंजूरी भी लेनी होगी। इसके बाद भी विपक्ष ने इसे संवैधानिक अदालत में चुनौती देने की घोषणा कर रखी है।
राष्ट्र प्रेस
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