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जयशंकर का पलटवार: 'मुंबई में रुबियो से मुलाकात पर आपत्ति क्यों? इंदिरा गांधी शिमला गई थीं'

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जयशंकर का पलटवार: 'मुंबई में रुबियो से मुलाकात पर आपत्ति क्यों? इंदिरा गांधी शिमला गई थीं'

सारांश

मुंबई में रुबियो से मुलाकात पर कांग्रेस के 'तलब किए जाने' वाले तंज का जवाब जयशंकर ने उसी इतिहास से दिया — इंदिरा गांधी शिमला गई थीं, सलमान खुर्शीद जयपुर। विदेश मंत्रालय ने भी कहा, दिल्ली के बाहर मेजबानी एक दशक पुरानी परंपरा है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 22 अक्टूबर 2026 को एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में मुंबई बैठक पर विपक्ष की आलोचना को खारिज किया।
जयशंकर ने 19-20 अक्टूबर को मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और UAE के समकक्ष की मेजबानी की थी।
राहुल गांधी ने इस बैठक को 'तलब किया जाना' बताया था, जिसे जयशंकर ने 'परिपक्व चर्चा' की अपील के साथ नकारा।
जयशंकर ने इंदिरा गांधी-भुट्टो शिमला और सलमान खुर्शीद-जयपुर मुलाकात का हवाला देते हुए विपक्ष को घेरा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पिछले एक दशक में वडोदरा, अहमदाबाद, वाराणसी में भी विदेशी नेताओं की मेजबानी हो चुकी है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 अक्टूबर 2026 को तीखे अंदाज़ में विपक्ष के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक को अनुचित ठहराया गया था। जयशंकर ने साफ कहा कि दिल्ली के बाहर विदेशी नेताओं से मुलाकात करना भारतीय कूटनीति की पुरानी और स्थापित परंपरा है।

मुंबई बनाम दिल्ली: विवाद की जड़

विदेश मंत्री ने 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका के अपने समकक्षों की मेजबानी की थी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि की भूमिका भी निभाई। विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने यह सवाल उठाया कि यह बैठक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के बजाय मुंबई में क्यों की गई।

जयशंकर ने क्या कहा

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में बोलते हुए जयशंकर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'मुझे यह समझ नहीं आया। क्या उन्हें मुंबई पसंद नहीं है? क्या उन्हें मुंबई से कोई समस्या है? मेरा मानना है कि यह एक शानदार शहर है। यह देश की वित्तीय राजधानी है, बॉलीवुड की राजधानी है और यहाँ बहुत कुछ है। शायद मुंबई उन्हें पसंद नहीं करती, मुझे नहीं पता कि उन्हें इससे क्या आपत्ति है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'हम सभी समझदार लोग हैं, इसलिए इस विषय पर परिपक्व तरीके से चर्चा करनी चाहिए।'

ऐतिहासिक उदाहरणों से दिया जवाब

जयशंकर ने विपक्ष के तर्क को उन्हीं के इतिहास से काटते हुए कहा कि अगर दिल्ली के बाहर विदेशी समकक्ष से मिलना 'तलब किया जाना' है, तो इस परिभाषा में कांग्रेस के अपने नेता भी आते हैं। उन्होंने कहा, 'इंदिरा गांधी, भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं। क्या उन्हें तलब किया गया था? सलमान खुर्शीद जयपुर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। क्या उन्हें तलब किया गया था?'

विदेश मंत्रालय की भी सफाई

जयशंकर से पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में इस आलोचना को खारिज किया था। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग एक दशक में विदेशी नेताओं की मेजबानी दिल्ली के बाहर लगातार होती रही है। जायसवाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री की मेजबानी वडोदरा में, जर्मनी के चांसलर की अहमदाबाद में और मॉरीशस के प्रधानमंत्री की वाराणसी में की थी।

विपक्ष की आपत्ति

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह इस बैठक को 'तलब किया जाना' बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उनका आरोप था कि मुंबई में यह मुलाकात भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमज़ोर करती है। हालाँकि विदेश मंत्रालय ने इस व्याख्या को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह 'लंबे समय से अपनाई जा रही कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा' है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और रक्षा सहयोग के कई अहम मुद्दे चल रहे हैं, जो इस मुलाकात की प्रासंगिकता को और बढ़ाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह नहीं था कि बैठक कहाँ हुई, बल्कि यह था कि भारत-अमेरिका संबंधों में इस वक्त दाँव पर क्या है। विपक्ष की आलोचना सतही थी — 'मुंबई क्यों' एक प्रासंगिक कूटनीतिक सवाल नहीं है — और जयशंकर ने इसे सफलतापूर्वक भावनात्मक मैदान पर खींच लिया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ और रक्षा सौदों पर तनाव दोनों एक साथ चल रहे हैं — उन मुद्दों पर सार्थक सवाल पूछना कहीं अधिक ज़रूरी था।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और रुबियो की मुंबई बैठक विवादास्पद क्यों बनी?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बैठक को राष्ट्रीय राजधानी की जगह मुंबई में करने पर सवाल उठाते हुए इसे 'तलब किया जाना' बताया था। विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश मंत्रालय दोनों ने इस आलोचना को खारिज करते हुए ऐतिहासिक उदाहरण पेश किए।
जयशंकर ने विपक्ष को जवाब देने के लिए कौन से ऐतिहासिक उदाहरण दिए?
जयशंकर ने कहा कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के नेता भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं और कांग्रेस के ही नेता सलमान खुर्शीद जयपुर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिले थे। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली के बाहर मुलाकात करना 'तलब किया जाना' नहीं है।
मुंबई में जयशंकर ने किन-किन नेताओं से मुलाकात की?
विदेश मंत्री ने 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री की मेजबानी की। इसके अलावा वे अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि भी रहे।
विदेश मंत्रालय ने दिल्ली के बाहर बैठकों पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले लगभग एक दशक से विदेशी नेताओं की मेजबानी नई दिल्ली के बाहर होती आई है। उन्होंने वडोदरा, अहमदाबाद, वाराणसी, गोवा, केवड़िया और अमृतसर में हुई मेजबानी के उदाहरण दिए।
इस विवाद का भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद मुख्यतः घरेलू राजनीतिक है और इससे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ता। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग पर वार्ताएँ अपने तय मार्ग पर जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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