क्या पाकिस्तान व्यापार के लिए सबसे सस्ता और आसान जमीनी मार्ग खो चुका है? ट्रेड के लिए सामने हैं कई मुश्किलें
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बंद होने का व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव है।
- समुद्री मार्ग पाकिस्तान के लिए प्रमुख व्यापार विकल्प है।
- चीन के साथ व्यापार में लागत और लॉजिस्टिक्स की समस्याएँ हैं।
- पाकिस्तान का हवाई व्यापार महंगा है।
- ईरान के साथ व्यापार में अमेरिकी प्रतिबंधों का असर है।
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद हो चुकी है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। हाल ही में अफगानिस्तान ने कहा था कि भले ही पाकिस्तान के साथ व्यापार के रास्ते बंद हो गए हैं, लेकिन देश में व्यापार की गतिविधियां रुकी नहीं हैं और न ही सामानों की आवाजाही पर इसका असर पड़ा है। हालांकि, सीमा बंद होने से स्थानीय लोगों को काफी नुकसान हो रहा है। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान जिन देशों से जुड़ा है, उनके साथ दुश्मनी का प्रभाव उसकी अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रहा है।
भारत और अफगानिस्तान के साथ सीमा बंद होने के कारण पाकिस्तान के पास व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण विकल्प समुद्री मार्ग रह जाता है। कराची, पोर्ट कासिम और ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान के लिए व्यापार के दृष्टिकोण से आवश्यक हैं। तेल, गैस, अनाज, और मशीनरी जैसे भारी आयात समुद्र के रास्ते से होते हैं।
पाकिस्तान चीन, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के साथ सीधे व्यापार करता है, लेकिन भारत के साथ सीमा बंद होने के कारण उसे समुद्री व्यापार मार्ग का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे पाकिस्तान को काफी नुकसान हो रहा है।
पहली बात, पाकिस्तान के लिए इसमें लागत अधिक है, इसके अलावा लॉजिस्टिक्स धीमे हैं और बीमा और फ्रेट चार्ज भी महंगे हैं। चीन, ईरान और अन्य देशों के साथ व्यापार करने के बावजूद, प्रत्यक्ष पहुँच की बड़ी समस्या है। वर्तमान में, चीन और ईरान के माध्यम से व्यापार करना कठिन और महंगा है।
हालांकि, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) पाकिस्तान के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। शिनजियांग से ग्वादर तक का रोड/रेल नेटवर्क चीन के साथ व्यापार को सरल बनाएगा।
ईरान की सीमा से पाकिस्तान का ईंधन, फल, और निर्माण सामग्री का सीमित व्यापार ताफ्तान बॉर्डर के माध्यम से होता है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण होती है। बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम में भी बाधाएँ आती हैं। दूसरी तरफ, यह बलूचिस्तान के रास्ते जाता है। वर्तमान में पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच स्थिति भी गंभीर है। यदि भविष्य में पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान के साथ संबंध सुधारने में असफल रहती है, तो यहां से भी व्यापारिक मार्ग बंद होने की संभावना है।
पाकिस्तान के पास जो तीसरा विकल्प है, वह हवाई व्यापार है, जो बहुत महंगा पड़ेगा। बड़े पैमाने पर व्यापार के लिए यह अव्यवहारिक है। पाकिस्तान ने अपना सबसे सस्ता और कम समय लागत वाला व्यापार मार्ग खो दिया है। अब उसकी निर्भरता समुद्र और चीन पर अत्यधिक बढ़ गई है।
पाकिस्तान के लिए मध्य एशिया तक सीधी पहुँच लगभग बंद हो चुकी है। ईरान और चीन के रास्ते इसके लिए विकल्प हैं, लेकिन इनमें भी कई समस्याएँ हैं। चीन के माध्यम से मध्य एशिया में पहुँचने के लिए लंबा रूट, पहाड़ी इलाकों, उच्च लागत, और चीन पर अधिक निर्भरता, कई देशों से होकर गुजरना, और विभिन्न टैक्स, नियम और मुद्रा की जटिलताएँ हैं। इसके साथ ही सुरक्षा और बीमा का खर्च भी पाकिस्तान को उठाना होगा।