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इजरायली हमले में लेबनानी पत्रकार अमल खलील की मौत, पीएम नवाफ बोले — यह अब इजरायल का आम तरीका बन गया

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इजरायली हमले में लेबनानी पत्रकार अमल खलील की मौत, पीएम नवाफ बोले — यह अब इजरायल का आम तरीका बन गया

सारांश

दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले में पत्रकार अमल खलील समेत 5 की मौत हुई। पीएम नवाफ सलाम ने इसे युद्ध अपराध बताया और कहा कि पत्रकारों को निशाना बनाना अब इजरायल का आम तरीका बन गया है। युद्धविराम के बाद भी जारी हमलों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ाई।

मुख्य बातें

दक्षिणी लेबनान के गांव अत-तिरी में 23 अप्रैल 2025 को इजरायली हमले में पत्रकार अमल खलील समेत 5 लोगों की मौत हुई।
अल अखबार मीडिया संस्थान की पत्रकार अमल खलील एयरस्ट्राइक में ध्वस्त इमारत के मलबे में दबकर शहीद हुईं।
पत्रकार जैनब फराज इसी हमले में घायल हुईं, उनके जल्द ठीक होने की कामना पीएम ने की।
लेबनान के पीएम नवाफ सलाम ने हमले को अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध करार देते हुए इसे ICC समेत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की घोषणा की।
17 अप्रैल 2025 के 10 दिवसीय युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रखे।
इजरायली सेना ने दावा किया कि निशाना बनाए गए वाहन हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे से जुड़े थे, लेबनान ने इस दावे को खारिज किया।

बेरूत, 23 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में पत्रकार अमल खलील समेत कम से कम पांच लोगों की जान चली गई। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने यह जानकारी दी। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब इजरायल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल 2025 को हुए 10 दिवसीय युद्धविराम के बाद अगले दौर की वार्ता गुरुवार को प्रस्तावित है।

हमले का विवरण — कैसे हुई पत्रकार की मौत

एनएनए के अनुसार, पहला हमला दक्षिणी लेबनान के गांव अत-तिरी में एक चलती कार को निशाना बनाकर किया गया, जिसमें दो लोगों की मौके पर मौत हो गई। इसके बाद उसी गांव की एक इमारत पर इजरायली वायुसेना ने एयरस्ट्राइक की, जिसमें एक पत्रकार मलबे में दब गईं।

स्थानीय मीडिया संस्थान अल अखबार के लिए काम करने वाली पत्रकार अमल खलील को मलबे से निकाला गया, लेकिन वे बचाई नहीं जा सकीं। उनके सहयोगी ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की। इसके अलावा पत्रकार जैनब फराज इस हमले में घायल हुईं।

इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने दो वाहनों को निशाना बनाया, जो हिज्बुल्लाह के एक सैन्य ढांचे से निकले थे। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीएम नवाफ सलाम की कड़ी प्रतिक्रिया

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए लिखा कि पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाना, राहत दलों को घटनास्थल तक पहुंचने से रोकना और उनके पहुंचने के बाद उन्हीं स्थानों पर दोबारा हमला करना — ये सभी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत परिभाषित युद्ध अपराध हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण लेबनान में मीडियाकर्मियों को उनके पेशेवर कर्तव्य के दौरान निशाना बनाना अब कोई इकलौती घटना नहीं रह गई — यह इजरायल का एक स्थापित तरीका बन चुका है, जिसकी हम पूरी तरह निंदा करते हैं।

पीएम सलाम ने यह भी कहा कि लेबनान इन अपराधों को सक्षम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने शहीद अमल खलील के परिजनों, सहयोगियों और समस्त लेबनानी मीडिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और पत्रकार जैनब फराज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

युद्धविराम के बाद भी हमले — क्या है बड़ी तस्वीर

गौरतलब है कि इजरायल-लेबनान युद्धविराम लागू होने के बाद से यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर चिंता का विषय बन गया है। संघर्षरत क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा पर कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स जैसी संस्थाएं पहले भी इजरायल पर मीडियाकर्मियों को निशाना बनाने के आरोप लगा चुकी हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि युद्धविराम वार्ता से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई कूटनीतिक दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। अगले दौर की वार्ता गुरुवार को प्रस्तावित है — ऐसे में यह हमला उस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और पत्रकारों की सुरक्षा

जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों को नागरिक माना जाता है और उन्हें विशेष संरक्षण प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2222 भी पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करता है।

पीएम नवाफ सलाम का इसे युद्ध अपराध कहना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में शिकायत दर्ज करने का रास्ता खुलता है। आने वाले दिनों में लेबनान-इजरायल वार्ता का अगला दौर और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि युद्धविराम की प्रक्रिया आगे बढ़ पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित संदेश है। इजरायल पर पहले भी गाजा और लेबनान में मीडियाकर्मियों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया हमेशा निंदा तक सिमटी रही है। पीएम नवाफ का ICC का रास्ता खोलना महत्वपूर्ण है, पर असली सवाल यह है कि क्या कोई बड़ी शक्ति इजरायल पर वास्तविक दबाव बनाएगी — या यह भी पिछली निंदाओं की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनान में इजरायली हमले में कौन से पत्रकार की मौत हुई?
दक्षिणी लेबनान के गांव अत-तिरी में हुए इजरायली हवाई हमले में स्थानीय मीडिया संस्थान अल अखबार की पत्रकार अमल खलील की मौत हुई। वे एयरस्ट्राइक में ढही इमारत के मलबे में दब गई थीं और बाद में मृत पाई गईं।
लेबनान के पीएम नवाफ सलाम ने इजरायल पर क्या आरोप लगाए?
पीएम नवाफ सलाम ने कहा कि पत्रकारों को निशाना बनाना, राहत दलों को रोकना और उनके पहुंचने के बाद दोबारा हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध हैं। उन्होंने इसे इजरायल का आम तरीका बताया और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही।
इजरायल-लेबनान युद्धविराम कब हुआ था और वार्ता कब है?
इजरायल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल 2025 को 10 दिवसीय युद्धविराम लागू हुआ था। इसके बाद अगले दौर की वार्ता गुरुवार को होनी है, लेकिन ताजा हमले ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इजरायली सेना ने हमले को लेकर क्या सफाई दी?
इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने दो वाहनों को निशाना बनाया जो हिज्बुल्लाह के एक सैन्य ढांचे से निकले थे। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और लेबनान ने इसे सिरे से खारिज किया है।
युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत क्या सुरक्षा मिलती है?
जिनेवा कन्वेंशन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2222 के तहत युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों को नागरिक का दर्जा मिलता है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध माना जाता है। ICC ऐसे मामलों की जांच कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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