थांगशान भूकंप राहत की 50वीं वर्षगांठ पर चीनी PM ली छ्यांग का हेपेई दौरा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 29 जुलाई 2026 को हेपेई प्रांत के थांगशान शहर का दौरा किया — यह दौरा थांगशान भूकंप राहत प्रयासों और नए थांगशान के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया। यह यात्रा राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निर्देश पर हुई, जिन्होंने आपदा प्रबंधन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया है।
दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
थांगशान 1976 के विनाशकारी भूकंप का केंद्र रहा है, जो चीन के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक था। पाँच दशकों में इस शहर के पुनर्निर्माण को चीन में आपदा-पश्चात् पुनरुद्धार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस वर्षगांठ पर ली छ्यांग की यात्रा न केवल स्मरण का अवसर थी, बल्कि भविष्य की आपदा-तैयारी नीतियों को सुदृढ़ करने का संकेत भी।
बचाव केंद्र निरीक्षण
ली छ्यांग ने अनेन्ग समूह के प्रथम इंजीनियरिंग ब्यूरो की थांगशान शाखा में स्थित एक बचाव केंद्र का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने वहाँ उपलब्ध उपकरणों का जायज़ा लिया, चल रहे बचाव अभियानों की जानकारी ली और बचाव कर्मियों के साथ सीधे विचार-विमर्श किया। केंद्र की भविष्य की विकास योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
आपदा प्रबंधन पर मुख्य निर्देश
प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने इस दौरे पर स्पष्ट किया कि आपदा निवारण, राहत और बचाव कार्य सीधे जन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर बल दिया — निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली को मज़बूत करना, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र में सुधार, और आपदा-पश्चात् पुनर्निर्माण की क्षमता बढ़ाना।
उन्होंने नियमित व्यावहारिक प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास आयोजित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया, ताकि बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया, वैज्ञानिक बचाव और कुशल प्रबंधन क्षमता में व्यापक सुधार हो सके।
राष्ट्रपति शी के निर्देशों का क्रियान्वयन
ली छ्यांग ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के महत्वपूर्ण निर्देशों को पूरी तरह लागू किया जाए, जिनमें जनहित और जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का सिद्धांत केंद्रीय है। उन्होंने भूकंप राहत की उस महान भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया जो 1976 के बाद से थांगशान के पुनर्निर्माण में प्रेरणा-स्रोत रही है।
आगे की राह
यह दौरा चीन की उस व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संस्थागत तैयारी को केंद्र में रखा जा रहा है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में चीन में बाढ़, भूकंप और अन्य आपदाओं की आवृत्ति को देखते हुए यह नीतिगत ध्यान और भी प्रासंगिक हो गया है। आने वाले महीनों में इन निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा अपेक्षित है।