मेक्सिको की गांधी-मंडेला लाइब्रेरी को भारतीय दूतावास ने भेंट कीं महात्मा गांधी पर 15 पुस्तकें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय दूतावास, मेक्सिको सिटी ने 13 अगस्त 2026 को मेक्सिको के सैन लोरेंजो नेनामिकोयान स्थित गांधी-मंडेला पब्लिक लाइब्रेरी को महात्मा गांधी के जीवन और दर्शन पर आधारित 15 पुस्तकें भेंट कीं। यह पुस्तकालय 8 अगस्त 2026 को उद्घाटित हुआ था और गांधी-मंडेला फाउंडेशन के एक अंतरराष्ट्रीय सामुदायिक परियोजना का हिस्सा है।
पुस्तक भेंट का उद्देश्य
दूतावास ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर साझा किए गए बयान में कहा कि यह 'एक छोटा सा योगदान' है, जिसका लक्ष्य मेक्सिको की नई पीढ़ियों तक महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश को जीवित रखना है। बयान में यह भी कहा गया कि इस पहल से शांति, बराबरी और सामाजिक न्याय की गांधी-मंडेला की साझा विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि यह पुस्तक भेंट ऐसे समय में हुई है जब भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में है — एक ऐसा अवसर जो महात्मा गांधी की विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है।
गांधी-मंडेला पब्लिक लाइब्रेरी: पृष्ठभूमि
गांधी-मंडेला पब्लिक लाइब्रेरी, गांधी मंडेला फाउंडेशन की एक अंतरराष्ट्रीय सामुदायिक परियोजना के अंतर्गत स्थापित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य शांति, समानता, अहिंसा और सामाजिक न्याय के विचारों का प्रसार करना है। स्थानीय स्तर पर कॉर्पोरेट सहयोग से पुस्तकालय के लिए बुक रैक और शेल्विंग सिस्टम उपलब्ध कराए गए हैं।
फाउंडेशन का मानना है कि यह पहल स्थानीय समुदाय में पढ़ने की संस्कृति और ज्ञान तक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है।
वैश्विक वर्चुअल बैठक में हुई थी चर्चा
गांधी मंडेला फाउंडेशन और उसकी अकादमी से जुड़े सदस्यों, क्षेत्रीय उपाध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने 29 जुलाई 2026 को आयोजित एक वैश्विक वर्चुअल बैठक में शिक्षा, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, जलवायु कार्रवाई और जमीनी स्तर की सामाजिक पहलों पर विस्तृत चर्चा की थी। इसी बैठक में विभिन्न देशों में चल रहे प्रभावकारी परियोजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ इस पुस्तकालय को लेकर भी अहम विमर्श हुआ था।
गांधी और मंडेला: साझा विरासत
महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला को विश्व इतिहास के दो महान स्तंभों के रूप में स्मरण किया जाता है। दोनों ने अपने-अपने देशों में नस्लीय भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया — गांधी ने भारत में और मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में। अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति से दोनों ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया, और उनके विचार आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बने हुए हैं।
यह पुस्तक भेंट भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक और उदाहरण है, जो लैटिन अमेरिका में गांधीवादी मूल्यों के प्रसार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करती है।