11 जुलाई 2026
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पीएम मोदी ने ऑकलैंड में न्यूजीलैंड निवेशकों को दिया भारत के 8 प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी का न्योता

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पीएम मोदी ने ऑकलैंड में न्यूजीलैंड निवेशकों को दिया भारत के 8 प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी का न्योता

सारांश

चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा पर मोदी ने ऑकलैंड में निवेशकों को 8 क्षेत्रों में साझेदारी का न्योता दिया और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार ₹35,000 करोड़ तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा। दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का ऐलान किया।

मुख्य बातें

पीएम मोदी ने 11 जुलाई को ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के निवेशकों को 8 प्रमुख क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी का निमंत्रण दिया।
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) करने का लक्ष्य निर्धारित।
दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक करार बताया गया, जो बाज़ार पहुँच, निवेश और प्रतिभा आवाजाही के नए अवसर खोलेगा।
यह दौरा चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है।
कृषि, डेयरी, रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग के लिए ठोस फ्रेमवर्क तैयार किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के निवेशकों और व्यापारिक नेताओं को इंफ्रास्ट्रक्चर, सिविल एविएशन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी गतिशीलता, जल प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और डिजिटल इकॉनमी — कुल आठ प्रमुख क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी का निमंत्रण दिया। यह दौरा चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊँचाई देने की दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखती है।

व्यापार और निवेश का रोडमैप

सीईओ और व्यापारिक नेताओं के एक चुनिंदा समूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने व्यापारिक जगत से आग्रह किया कि वे निवेश और वाणिज्यिक साझेदारी को गति देकर इस लक्ष्य की प्राप्ति में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक करार बताया, जो बाज़ार पहुँच, निवेश, सेवाओं, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा आवाजाही के नए अवसर खोलेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में गहराई और गति, दोनों लाएगा।

कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग

प्रधानमंत्री ने डेयरी विज्ञान, बागवानी और वानिकी में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता को भारत के विशाल उपभोक्ता बाज़ार, खाद्य पार्कों और कृषि-तकनीक प्रतिभा के साथ जोड़कर एक वैश्विक खाद्य मूल्य शृंखला बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग के लिए एक मज़बूत फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड वैश्विक डेयरी निर्यात में अग्रणी देशों में से एक है, जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है — इस साझेदारी में दोनों पक्षों के लिए पूरकता की स्पष्ट संभावना है।

रणनीतिक साझेदारी और साझा मूल्य

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और सतत विकास के प्रति साझी प्रतिबद्धता से जुड़े हैं। उन्होंने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी इस रणनीतिक विश्वास का प्रतीक बताया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी सहयोग को प्राथमिकता दी गई।

नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर

प्रधानमंत्री ने भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना करते हुए फिनटेक, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच घनिष्ठ जुड़ाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि, युवा और कुशल कार्यबल, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल क्रांति और अगली पीढ़ी का इंफ्रास्ट्रक्चर न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए असाधारण अवसर प्रस्तुत करते हैं।

मोदी ने एक्स पर लिखा, "आज सुबह ऑकलैंड में प्रधानमंत्री लक्सन के साथ लंबी और फायदेमंद बातचीत हुई। पिछले साल उनके भारत दौरे ने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी को ऊर्जा दी और आज मेरे दौरे, जो चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा है, ने भारत-न्यूजीलैंड की दोस्ती को और बढ़ावा दिया है। हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने का फैसला किया है।"

आगे की राह

दोनों देशों के बीच यह नई रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में आई है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय है। मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देश हर क्षेत्र में साफ लक्ष्यों और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ेंगे। भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक साझेदारी को समावेशी और टिकाऊ व्यापार का एक मॉडल बनाने की दिशा में यह दौरा निर्णायक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹35,000 करोड़ के व्यापार लक्ष्य और मुक्त व्यापार समझौते की घोषणाएँ तब तक अधूरी हैं जब तक क्रियान्वयन की समयसीमा और सत्यापन तंत्र स्पष्ट नहीं होते। आलोचकों का कहना है कि भारत के कई द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य समयसीमा चूकते रहे हैं। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह साझेदारी घोषणाओं से आगे बढ़कर मापने योग्य निवेश और रोज़गार में तब्दील होती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड निवेशकों को किन क्षेत्रों में साझेदारी का न्योता दिया?
पीएम मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, सिविल एविएशन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी गतिशीलता, जल प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और डिजिटल इकॉनमी — कुल 8 क्षेत्रों में न्यूजीलैंड के निवेशकों को भारत के साथ साझेदारी का निमंत्रण दिया। इसके अतिरिक्त, फिनटेक, कृषि, डेयरी और रक्षा क्षेत्रों में भी सहयोग पर जोर दिया गया।
भारत-न्यूजीलैंड 2030 व्यापार लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक प्रमुख साधन बताया गया है।
भारत और न्यूजीलैंड की रणनीतिक साझेदारी का क्या अर्थ है?
दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत करने की घोषणा की है, जिसमें व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा आवाजाही जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन से बंधे हैं।
मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ऐतिहासिक क्यों मानी जा रही है?
यह चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है। मोदी ने स्वयं एक्स पर इसका उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरे ने भारत-न्यूजीलैंड की दोस्ती को नई ऊर्जा दी है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से क्या फायदे होंगे?
पीएम मोदी के अनुसार, यह समझौता बाज़ार पहुँच, निवेश, सेवाओं, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा आवाजाही के नए अवसर खोलेगा। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में गहराई और गति दोनों आएंगी, हालाँकि समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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