शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बैठक, परमाणु ऊर्जा में 100 GW लक्ष्य पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026: नीति आयोग ने शांति अधिनियम 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की, जिसमें सरकार, नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह बैठक नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में संपन्न हुई और इसमें कानून के क्रियान्वयन ढाँचे को व्यावहारिक एवं सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रही चर्चा
बैठक को कानून के सफल अनुप्रयोग के लिए आवश्यक तीन मुख्य क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया। पहला सत्र विधायी और नियामकीय ढाँचे पर केंद्रित रहा, जिसमें शांति अधिनियम 2025 के अंतर्गत तैयार किए गए ड्राफ्ट नियमों, विनियमों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने वैधानिक अनुपालन की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श करते हुए यह भी रेखांकित किया कि विदेशी निवेश को आकर्षित करते हुए देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की पूर्ण सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
वित्त, बीमा और जनविश्वास पर विमर्श
दूसरे सत्र में वित्तीय व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन के पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही, आम जनता के बीच परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर जागरूकता, विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए। गौरतलब है कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में जनविश्वास का अभाव अक्सर क्रियान्वयन में बाधा बनता रहा है।
विनिर्माण, संचालन और क्षमता निर्माण
तीसरे सत्र में कानून के लागू होने के पश्चात की संचालन प्रक्रिया पर विचार किया गया। इसमें घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने, परियोजनाओं की संचालन तैयारियों को मज़बूत करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर ज़ोर दिया गया। हितधारकों ने सप्लाई चेन को अधिक लचीला और सक्षम बनाने तथा उद्योग विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने के सुझाव भी दिए।
शांति अधिनियम 2025 का राष्ट्रीय महत्व
शांति अधिनियम 2025 का मूल उद्देश्य भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और विकसित भारत 2047 के अंतर्गत निर्धारित स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करना है। इस कानून के माध्यम से निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों की जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे संसाधनों की कमी दूर करने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में क्रियान्वयन की गति और नियामकीय स्पष्टता इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा तय करेगी।