11 जुलाई 2026
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शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बैठक, परमाणु ऊर्जा में 100 GW लक्ष्य पर मंथन

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शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बैठक, परमाणु ऊर्जा में 100 GW लक्ष्य पर मंथन

सारांश

शांति अधिनियम 2025 महज एक कानून नहीं — यह भारत की ऊर्जा रणनीति का नया अध्याय है। नीति आयोग की इस बैठक में विधायी ढाँचे, वित्त और क्षमता निर्माण के तीन स्तंभों पर मंथन हुआ, जो 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की नींव रखेंगे।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 11 जुलाई को शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की।
बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर अभय करंदीकर , सदस्य, नीति आयोग ने की।
चर्चा तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही: विधायी-नियामकीय ढाँचा, वित्त-बीमा-जनविश्वास, और विनिर्माण-संचालन-क्षमता निर्माण।
कानून के तहत निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए FDI नीति प्रावधानों पर विशेष विमर्श हुआ।
राष्ट्रीय लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता और विकसित भारत 2047 के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति।

नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026: नीति आयोग ने शांति अधिनियम 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की, जिसमें सरकार, नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह बैठक नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में संपन्न हुई और इसमें कानून के क्रियान्वयन ढाँचे को व्यावहारिक एवं सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रही चर्चा

बैठक को कानून के सफल अनुप्रयोग के लिए आवश्यक तीन मुख्य क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया। पहला सत्र विधायी और नियामकीय ढाँचे पर केंद्रित रहा, जिसमें शांति अधिनियम 2025 के अंतर्गत तैयार किए गए ड्राफ्ट नियमों, विनियमों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने वैधानिक अनुपालन की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श करते हुए यह भी रेखांकित किया कि विदेशी निवेश को आकर्षित करते हुए देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की पूर्ण सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

वित्त, बीमा और जनविश्वास पर विमर्श

दूसरे सत्र में वित्तीय व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन के पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही, आम जनता के बीच परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर जागरूकता, विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए। गौरतलब है कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में जनविश्वास का अभाव अक्सर क्रियान्वयन में बाधा बनता रहा है।

विनिर्माण, संचालन और क्षमता निर्माण

तीसरे सत्र में कानून के लागू होने के पश्चात की संचालन प्रक्रिया पर विचार किया गया। इसमें घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने, परियोजनाओं की संचालन तैयारियों को मज़बूत करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर ज़ोर दिया गया। हितधारकों ने सप्लाई चेन को अधिक लचीला और सक्षम बनाने तथा उद्योग विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने के सुझाव भी दिए।

शांति अधिनियम 2025 का राष्ट्रीय महत्व

शांति अधिनियम 2025 का मूल उद्देश्य भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और विकसित भारत 2047 के अंतर्गत निर्धारित स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करना है। इस कानून के माध्यम से निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों की जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे संसाधनों की कमी दूर करने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में क्रियान्वयन की गति और नियामकीय स्पष्टता इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य तभी यथार्थवादी बनेगा जब नियामकीय स्पष्टता, बीमा ढाँचा और जनविश्वास एक साथ विकसित हों। भारत में परमाणु परियोजनाओं का इतिहास बताता है कि नीतिगत घोषणाएँ और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर गहरी रही है। निजी क्षेत्र की भागीदारी स्वागत योग्य है, परंतु बिना पारदर्शी जवाबदेही तंत्र के यह साझेदारी जोखिम को सार्वजनिक और लाभ को निजी बनाने का माध्यम बन सकती है। असली कसौटी यह होगी कि ड्राफ्ट नियम और FDI प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांति अधिनियम 2025 क्या है?
शांति अधिनियम 2025 भारत का एक नया कानून है जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों की जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसका लक्ष्य विकसित भारत 2047 के तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।
नीति आयोग की इस बैठक में किन तीन क्षेत्रों पर चर्चा हुई?
बैठक में तीन प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हुई: पहला, विधायी और नियामकीय ढाँचा (ड्राफ्ट नियम, FDI प्रावधान); दूसरा, वित्त, बीमा और जनविश्वास; और तीसरा, विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता निर्माण।
इस बैठक की अध्यक्षता किसने की?
यह बैठक नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें सरकार, नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
शांति अधिनियम 2025 से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में क्या बदलाव आएगा?
इस कानून के माध्यम से निजी क्षेत्र और संयुक्त उपक्रमों को परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल किया जाएगा, जिससे संसाधनों की कमी दूर होगी और परियोजनाएँ समय पर पूरी होंगी। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भारत का 2047 तक परमाणु ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
विकसित भारत 2047 के अंतर्गत भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करना है। शांति अधिनियम 2025 इसी लक्ष्य को हासिल करने का विधायी आधार है।
राष्ट्र प्रेस
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