18 जुलाई 2026
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नेपाल में बालेंद्र शाह के खिलाफ जेन-जी का विद्रोह: 4 महीने में इस्तीफे की मांग, 15,000 बेघर

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नेपाल में बालेंद्र शाह के खिलाफ जेन-जी का विद्रोह: 4 महीने में इस्तीफे की मांग, 15,000 बेघर

सारांश

जिस जेन-जी पीढ़ी ने बालेंद्र शाह को सत्ता की कुर्सी सौंपी थी, वही आज उनके इस्तीफे की माँग कर रही है। 15,000 बेघर, एक युवा चालक की मौत और कार्यकर्ताओं पर कथित दमन — चार महीने में उम्मीद से आक्रोश तक का यह सफर नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता की कहानी दोहरा रहा है।

मुख्य बातें

18 जुलाई 2026 को काठमांडू में जेन-जी युवाओं ने PM बालेंद्र शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
अप्रैल 2026 से चले बुलडोजर अभियान में 2,600 से अधिक घर ध्वस्त, 15,000 से ज़्यादा लोग बेघर।
25 वर्षीय गणेश नेपाली ने पुलिस कार्रवाई के बाद खुद को आग लगाई, जिससे जनाक्रोश और भड़का।
रिपोर्टों के अनुसार हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।
शाह की अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के भीतर भी असंतोष के स्वर उभरे।
नेपाल में बीते कई वर्षों में किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं किया।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ देश की जेन-जी पीढ़ी एक बार फिर सड़कों पर उतर आई है। 18 जुलाई 2026 को काठमांडू में हुए युवा विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ता संभालने के चार महीने से भी कम समय में शाह सरकार गंभीर जनाक्रोश का सामना कर रही है। गौरतलब है कि यही जेन-जी आंदोलन था जिसने पिछले वर्ष केपी ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया था।

मुख्य घटनाक्रम

विरोध की आग को सबसे पहले भड़काया काठमांडू में नदी किनारे बसी झुग्गी बस्तियों पर चले बुलडोजर अभियान ने। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस बेदखली अभियान में 2,600 से अधिक घर ध्वस्त किए गए, जिससे 15,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उनके घरों से बेदखल कर दिया।

इसी बीच गणेश नेपाली नामक 25 वर्षीय राइड-शेयरिंग चालक की मौत ने जनाक्रोश को और धधका दिया। रिपोर्टों के अनुसार, काठमांडू पुलिस ने पार्किंग नियम उल्लंघन के आरोप में उनकी मोटरसाइकिल का पहिया जाम कर दिया, जिसके बाद उन्होंने खुद को आग लगा ली और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे नेपाल में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।

सरकार पर आरोप और दमन की खबरें

बेघर हुए लोगों के समर्थन में शांतिपूर्वक आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया — एक आरोप जो सरकार की छवि को और धूमिल कर रहा है। इसके अलावा, सरकारी सुरक्षा वाहन द्वारा मीडिया गेट को अवरुद्ध करने की घटना ने भी व्यापक आलोचना बटोरी।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) — जो शाह की अपनी पार्टी है — के भीतर भी असंतोष के स्वर सुनाई दे रहे हैं, जो सरकार की राजनीतिक स्थिति को और कमज़ोर करता है।

बेरोज़गारी और किसानों का असंतोष

नेपाल में बेरोज़गारी लंबे समय से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। सितंबर 2025 के जेन-जी आंदोलन के दौरान भी युवाओं की यह प्रमुख माँग थी। आलोचकों का कहना है कि शाह सरकार के नए बजट और आर्थिक नीतियों में बेरोज़गारी से निपटने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। इसके साथ ही देश के किसानों ने भी मौजूदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जिससे असंतोष का दायरा और व्यापक हो गया है।

आम जनता पर असर

जेन-जी आंदोलन ने शाह को सत्ता तक पहुँचाते समय बड़े सपने देखे थे। शुरुआती दिनों में वीआईपी संस्कृति के खिलाफ उठाए गए कुछ कदमों ने सुर्खियाँ भी बटोरीं, लेकिन झुग्गी बस्तियों के विध्वंस, युवा चालक की मौत और कार्यकर्ताओं पर कथित दमन ने उस उम्मीद को गहरी चोट पहुँचाई है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था पहले से ही अस्थिर मानी जाती है — बीते कई वर्षों में किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना पूरा कार्यकाल नहीं पूरा किया है।

क्या होगा आगे

नेपाल में इस्तीफे की माँग तेज़ होती जा रही है। यदि जनदबाव इसी तरह बना रहा, तो राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बालेंद्र शाह का पद पर बने रहना कठिन हो सकता है। नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास देखते हुए, आने वाले हफ्ते देश की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सत्ता में आते ही उसी जनता की उम्मीदों के बोझ तले दब जाता है। असली सवाल यह है कि क्या झुग्गी विध्वंस जैसे फैसले बिना पुनर्वास योजना के लागू करना 'सुधार' है या सत्ता का दुरुपयोग — और क्या जेन-जी आंदोलन केवल सरकार बदलने का औज़ार बनकर रह जाएगा, या नेपाल की संरचनागत समस्याओं — बेरोज़गारी, राजनीतिक अस्थिरता, कमज़ोर संस्थाएँ — के स्थायी समाधान की माँग तक पहुँचेगा। चार महीने में इस्तीफे की माँग यह भी बताती है कि नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था को जवाबदेही के तंत्र की नहीं, बल्कि स्थिरता की बुनियाद की ज़रूरत है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में बालेंद्र शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
नेपाल के युवा PM बालेंद्र शाह के खिलाफ इसलिए सड़कों पर उतरे हैं क्योंकि सरकार ने बिना पुनर्वास के 2,600 से अधिक घर गिराए, एक युवा राइड-शेयरिंग चालक की पुलिस कार्रवाई के बाद मौत हुई, और कार्यकर्ताओं पर कथित दमन किया गया। बेरोज़गारी और नई आर्थिक नीतियों में ठोस कदमों की कमी ने भी जनाक्रोश को बढ़ाया है।
गणेश नेपाली कौन थे और उनकी मौत ने विरोध को कैसे भड़काया?
गणेश नेपाली काठमांडू के 25 वर्षीय राइड-शेयरिंग चालक थे। रिपोर्टों के अनुसार, पार्किंग नियम उल्लंघन पर काठमांडू पुलिस ने उनकी मोटरसाइकिल का पहिया जाम कर दिया, जिसके बाद उन्होंने खुद को आग लगा ली और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पहले से भड़के जनाक्रोश को और तेज़ कर दिया।
काठमांडू में बुलडोजर अभियान से कितने लोग प्रभावित हुए?
अप्रैल 2026 से शुरू हुए सरकारी बेदखली अभियान में काठमांडू में नदी किनारे की 2,600 से अधिक अवैध बस्तियाँ ध्वस्त की गईं, जिससे 15,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने बिना किसी ठोस पुनर्वास व्यवस्था के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उनके घरों से बेदखल किया।
जेन-जी आंदोलन ने बालेंद्र शाह को सत्ता में कैसे पहुँचाया था?
सितंबर 2025 में नेपाल में जेन-जी आंदोलन के तहत युवाओं ने केपी ओली की सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किए, जिसके चलते ओली सरकार सत्ता से बाहर हुई और बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री बने। युवाओं ने शाह से बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति खत्म करने की उम्मीद लगाई थी।
क्या बालेंद्र शाह इस्तीफा दे सकते हैं?
राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ इस्तीफे की माँग तेज़ हो रही है। नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास देखें तो बीते कई वर्षों में किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं किया है, जो शाह के राजनीतिक भविष्य को अनिश्चित बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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