10 अगस्त 2026
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नेपाल सरकार के दखल के बाद काठमांडू में तिब्बती अध्ययन सम्मेलन ऑनलाइन होगा, 700 से अधिक प्रतिभागी प्रभावित

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नेपाल सरकार के दखल के बाद काठमांडू में तिब्बती अध्ययन सम्मेलन ऑनलाइन होगा, 700 से अधिक प्रतिभागी प्रभावित

सारांश

नेपाल सरकार के मौखिक निर्देश ने तीन साल की तैयारी और 700 से अधिक प्रतिभागियों की योजनाओं को एक झटके में बदल दिया। तिब्बती अध्ययन का 17वाँ अंतरराष्ट्रीय सेमिनार अब काठमांडू की बजाय ऑनलाइन होगा — और सवाल उठ रहे हैं कि यह फैसला किसके इशारे पर हुआ।

मुख्य बातें

नेपाल सरकार ने 3 अगस्त को काठमांडू यूनिवर्सिटी को तिब्बती अध्ययन के 17वें अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की मेजबानी न करने का मौखिक निर्देश दिया।
आईएटीएस ने 8 अगस्त को घोषणा की कि सेमिनार अब 23 से 29 अगस्त तक ऑनलाइन माध्यम से होगा।
700 से अधिक प्रतिभागी पहले ही हवाई टिकट और होटल बुकिंग करा चुके थे, जिन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में इस निर्णय को कथित तौर पर चीन की राजनयिक चिंताओं से जोड़ा गया है, हालाँकि काठमांडू यूनिवर्सिटी ने किसी दबाव की जानकारी से इनकार किया।
आईएटीएस ने इसे शैक्षणिक कार्यक्रम में 'अप्रत्याशित और अनुचित हस्तक्षेप' बताया; कोई औपचारिक लिखित सूचना नहीं दी गई।
सम्मेलन की तैयारी 2023 में सभी पक्षों की सहमति से शुरू हुई थी और तीन वर्षों तक कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी।

इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज (आईएटीएस) ने घोषणा की है कि काठमांडू में 23 से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाला तिब्बती अध्ययन का 17वाँ अंतरराष्ट्रीय सेमिनार अब पूरी तरह ऑनलाइन होगा। नेपाल सरकार ने 3 अगस्त को काठमांडू यूनिवर्सिटी (केयू) को इस कार्यक्रम की भौतिक मेजबानी न करने का मौखिक निर्देश दिया, जिसके बाद आयोजकों को अंतिम समय में पूरी व्यवस्था बदलनी पड़ी।

मुख्य घटनाक्रम

आईएटीएस के अनुसार, नेपाल सरकार के मुख्य सचिव गोविंद बहादुर कार्की और विदेश मंत्रालय के सचिव अमृत बहादुर राई ने काठमांडू यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. ऋषिकेश वागले, रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. राजीव श्रेष्ठ और हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज (एचआईसीएएस) के प्रो. डॉ. सागर शर्मा को व्यक्तिगत रूप से यह निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि आईएटीएस या सम्मेलन के आयोजकों को इस निर्णय की कोई औपचारिक लिखित सूचना नहीं दी गई।

इस निर्देश के बाद 7 अगस्त को आईएटीएस बोर्ड ने आपातकालीन ऑनलाइन बैठक की और 8 अगस्त को घोषणा जारी कर यह स्पष्ट किया कि सेमिनार अब ऑनलाइन माध्यम से होगा। बोर्ड ने कहा, 'कार्यक्रम वही रहेगा और प्रतिभागी उस समय जहाँ भी होंगे, ऑनलाइन भाग ले सकेंगे और प्रस्तुति दे सकेंगे।'

चीन से जुड़ी चिंताएँ और केयू का रुख

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में नेपाल सरकार के इस फैसले को कथित तौर पर चीन की ओर से उठाई गई राजनयिक चिंताओं से जोड़ा गया है। हालाँकि काठमांडू यूनिवर्सिटी का कहना है कि वह ऐसे किसी बाहरी दबाव से अनभिज्ञ है। सरकार ने भी अब तक इस निर्णय का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है।

गौरतलब है कि 2023 में सभी संबंधित पक्षों की सहमति से इस सेमिनार की काठमांडू में मेजबानी तय की गई थी और तीन वर्षों की तैयारी अवधि के दौरान किसी भी स्तर पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।

आम जनता और प्रतिभागियों पर असर

आईएटीएस के अनुसार, 700 से अधिक प्रतिभागी पहले ही हवाई टिकट खरीद चुके थे और काठमांडू में होटल बुकिंग करा चुके थे। आयोजकों ने इस कार्यक्रम की तैयारी में तीन वर्ष और बड़ी राशि लगाई थी। अचानक हुए इस बदलाव से प्रतिभागियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि 'अधिकारियों द्वारा इस सम्मेलन को पूरी तरह रद्द करने से देश में भविष्य में होने वाले शैक्षणिक आयोजनों पर सवाल उठेंगे और इससे आर्थिक एवं छवि को नुकसान होने की संभावना है।'

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आईएटीएस बोर्ड ने इसे एक पूरी तरह शैक्षणिक कार्यक्रम में 'अप्रत्याशित और अनुचित हस्तक्षेप' करार दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की वर्तमान सरकार के कई निर्णयों को लेकर देश में व्यापक बहस छिड़ी हुई है। इस घटना ने नेपाल में शैक्षणिक स्वायत्तता और राजनयिक दबाव के बीच के तनाव को एक बार फिर उजागर किया है।

क्या होगा आगे

आईएटीएस ने कहा है कि वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता रहेगा कि शैक्षणिक कार्यक्रम आगे बढ़े और तिब्बती एवं हिमालयी अध्ययन पर अंतरराष्ट्रीय विद्वत्तापूर्ण संवाद के लिए एक वैश्विक मंच उपलब्ध रहे। सेमिनार 23 से 29 अगस्त के निर्धारित कार्यक्रम पर ही ऑनलाइन माध्यम से आयोजित होगा, हालाँकि अलग-अलग समय क्षेत्रों के अनुसार समय में बदलाव संभव नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तीन साल बाद, कार्यक्रम से महज तीन हफ्ते पहले — राजनयिक दबाव का एक पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण है जो जवाबदेही से बचने के लिए अनौपचारिक चैनलों का सहारा लेता है। यदि चीन की चिंताएँ वाकई इस निर्णय की वजह हैं, तो यह नेपाल की उस नीतिगत प्रवृत्ति को दर्शाता है जहाँ शैक्षणिक स्वायत्तता राजनयिक सुविधा के आगे झुक जाती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को हुए नुकसान की कोई जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली — और इस मिसाल से भविष्य के शैक्षणिक आयोजनों पर भी अनिश्चितता की छाया पड़ेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिब्बती अध्ययन का 17वाँ अंतरराष्ट्रीय सेमिनार क्यों ऑनलाइन हो गया?
नेपाल सरकार ने 3 अगस्त को काठमांडू यूनिवर्सिटी को इस सेमिनार की भौतिक मेजबानी न करने का मौखिक निर्देश दिया, जिसके बाद आईएटीएस बोर्ड ने 7 अगस्त की आपातकालीन बैठक में इसे ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया। सरकार ने इस निर्णय का कोई आधिकारिक लिखित कारण नहीं दिया।
क्या नेपाल सरकार के इस फैसले के पीछे चीन का दबाव है?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में इस निर्णय को कथित तौर पर चीन की राजनयिक चिंताओं से जोड़ा गया है। हालाँकि काठमांडू यूनिवर्सिटी का कहना है कि वह ऐसे किसी बाहरी दबाव से अनभिज्ञ है और सरकार ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
आईएटीएस का 17वाँ सेमिनार कब और कैसे होगा?
सेमिनार अपने निर्धारित कार्यक्रम — 23 से 29 अगस्त — पर ही ऑनलाइन माध्यम से आयोजित होगा। प्रतिभागी जहाँ भी होंगे, वहाँ से ऑनलाइन भाग ले सकेंगे और प्रस्तुति दे सकेंगे, हालाँकि अलग-अलग समय क्षेत्रों के अनुसार समय में बदलाव संभव नहीं होगा।
इस अचानक बदलाव से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
आईएटीएस के अनुसार 700 से अधिक प्रतिभागी पहले ही हवाई टिकट खरीद चुके थे और काठमांडू में होटल बुकिंग करा चुके थे। आयोजकों ने तीन वर्षों की तैयारी में काफी खर्च किया था, और इस अचानक बदलाव से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आईएटीएस ने नेपाल सरकार के इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आईएटीएस बोर्ड ने इसे एक पूरी तरह शैक्षणिक कार्यक्रम में 'अप्रत्याशित और अनुचित हस्तक्षेप' करार दिया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि इस तरह के हस्तक्षेप से नेपाल में भविष्य के शैक्षणिक आयोजनों पर सवाल उठेंगे और देश की आर्थिक एवं अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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