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तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री का मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह बहिष्कार, 'तमिल थाई वाऴ्थु' प्रोटोकॉल विवाद

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तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री का मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह बहिष्कार, 'तमिल थाई वाऴ्थु' प्रोटोकॉल विवाद

सारांश

तिरुनेलवेली के मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय का 33वाँ दीक्षांत समारोह दो विवादों में घिर गया — 'तमिल थाई वाऴ्थु' को तीसरे क्रम पर रखने पर मंत्री का बहिष्कार, और 871 की जगह केवल 113 छात्रों को राज्यपाल द्वारा सीधे डिग्री मिलने पर छात्रों में रोष। 37,877 स्नातकों की उपलब्धियाँ राजनीतिक विवाद में दब गईं।

मुख्य बातें

उच्च शिक्षा मंत्री पी.
विश्वनाथन ने 'तमिल थाई वाऴ्थु' को तीसरे क्रम पर रखे जाने पर मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह का बहिष्कार किया।
तिरुनेलवेली से टीवीके विधायक मुरुगन और कडायनल्लूर से विधायक राजेंद्रन ने भी समारोह में भाग नहीं लिया।
पहले 871 छात्रों को राज्यपाल के हाथों डिग्री देने की घोषणा थी, अंतिम समय में यह संख्या घटाकर केवल 113 स्वर्ण पदक विजेताओं तक सीमित की गई।
कुल 37,877 विद्यार्थियों को इस समारोह में डिग्रियाँ दी जानी थीं।
समारोह करीब 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ; राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने 29 जुलाई 2025 को तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह का बहिष्कार कर दिया, क्योंकि आधिकारिक कार्यक्रम में 'तमिल थाई वाऴ्थु' को 'वंदे मातरम्' के बाद तीसरे क्रम पर रखा गया था। इसी समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की अध्यक्षता में डिग्री वितरण के अंतिम समय पर किए गए बदलाव के कारण छात्रों में भी नाराजगी फैल गई।

प्रोटोकॉल विवाद: गीतों का क्रम बना टकराव की वजह

आधिकारिक कार्यक्रम सूची के अनुसार समारोह की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से हुई, जबकि तमिलनाडु का राज्य वंदना गीत 'तमिल थाई वाऴ्थु' तीसरे स्थान पर था। मंत्री पी. विश्वनाथन ने इस क्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि 'तमिल थाई वाऴ्थु' को राष्ट्रगान के बाद द्वितीय स्थान पर होना चाहिए था, और इसे तीसरे क्रम पर रखना स्वीकार्य नहीं है। इस विरोध में उनके साथ तिरुनेलवेली से टीवीके विधायक मुरुगन और कडायनल्लूर से विधायक राजेंद्रन भी शामिल हो गए, जिन्होंने भी समारोह में भाग न लेने का निर्णय लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में भाषाई पहचान और राज्य के सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर राज्य सरकार तथा राजभवन के बीच तनाव पहले से चला आ रहा है। गौरतलब है कि 'तमिल थाई वाऴ्थु' के प्रोटोकॉल को लेकर यह पहली बार नहीं है जब विवाद उठा हो — इससे पहले भी राज्य के कई आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके क्रम को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं।

डिग्री वितरण में अंतिम समय पर बदलाव से छात्रों में रोष

विश्वविद्यालय ने पहले घोषणा की थी कि राज्यपाल आर्लेकर 871 छात्रों को व्यक्तिगत रूप से डिग्रियाँ प्रदान करेंगे। कुल 37,877 विद्यार्थियों को इस दीक्षांत समारोह में डिग्रियाँ दी जानी थीं। हालाँकि, समारोह शुरू होने से कुछ समय पहले विश्वविद्यालय ने संशोधित सूचना जारी कर स्पष्ट किया कि केवल 113 स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को ही राज्यपाल के हाथों सीधे डिग्री मिलेगी।

इस अप्रत्याशित बदलाव से छात्रों और उनके परिजनों में गहरी निराशा फैल गई। कई परिवार दूर-दराज से राज्यपाल के हाथों डिग्री लेने की उम्मीद लेकर पहुँचे थे। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय की पूर्व घोषणा ने उनकी अपेक्षाएँ बढ़ाई थीं, और अंतिम क्षण में हुए बदलाव ने उन्हें भ्रम और असंतोष में डाल दिया।

समारोह: करीब 45 मिनट की देरी से हुई शुरुआत

दोनों विवादों की छाया में समारोह करीब 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ। राज्यपाल आर्लेकर की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह अंततः संपन्न हुआ, जिसमें 113 स्वर्ण पदक विजेताओं को राज्यपाल ने डिग्रियाँ प्रदान कीं। शेष विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनके प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

इन दोहरे विवादों ने 37,877 स्नातक विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को उस चर्चा से पीछे धकेल दिया, जो इस अवसर पर होनी चाहिए थी।

राजनीतिक असर और आगे की राह

मंत्री और दो विधायकों के बहिष्कार ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया। यह घटना राज्य-राजभवन संबंधों के व्यापक संदर्भ में देखी जा रही है, जहाँ तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद चले आ रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इन विवादों पर कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। आगामी दिनों में प्रोटोकॉल को लेकर राज्य सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार यह विश्वविद्यालयों जैसे शैक्षणिक मंचों को राजनीतिक अखाड़ा बना देता है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि इन विवादों की असली कीमत 37,877 वे छात्र चुकाते हैं जिनका स्नातक दिवस — जीवन का एक यादगार पल — राजनीतिक बहस में दफन हो जाता है। प्रशासनिक चूक और राजनीतिक प्रतिक्रिया के इस चक्र को तोड़ने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों पर है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में विवाद क्यों हुआ?
दो कारणों से विवाद उठा — पहला, आधिकारिक कार्यक्रम में 'तमिल थाई वाऴ्थु' को 'वंदे मातरम्' के बाद तीसरे क्रम पर रखा गया, जिस पर उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने आपत्ति जताई। दूसरा, 871 छात्रों को राज्यपाल से सीधे डिग्री देने की पूर्व घोषणा अंतिम समय में बदलकर केवल 113 स्वर्ण पदक विजेताओं तक सीमित कर दी गई।
उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने समारोह का बहिष्कार क्यों किया?
मंत्री पी. विश्वनाथन ने कहा कि 'तमिल थाई वाऴ्थु' को 'वंदे मातरम्' के बाद तीसरे क्रम पर रखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसे अनुचित प्रोटोकॉल बताते हुए समारोह छोड़ दिया और दो विधायकों ने भी उनका साथ दिया।
कितने छात्रों को राज्यपाल ने सीधे डिग्री दी?
पहले 871 छात्रों को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के हाथों सीधे डिग्री देने की घोषणा थी, लेकिन अंतिम समय पर यह संख्या घटाकर केवल 113 स्वर्ण पदक विजेताओं तक सीमित कर दी गई। शेष 37,877 में से बाकी विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया से डिग्रियाँ वितरित की गईं।
क्या समारोह अंततः संपन्न हुआ?
हाँ, विवादों और करीब 45 मिनट की देरी के बावजूद राज्यपाल आर्लेकर की अध्यक्षता में 33वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। 113 स्वर्ण पदक विजेताओं को राज्यपाल ने डिग्रियाँ प्रदान कीं और अन्य विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रमाणपत्र दिए गए।
इस विवाद का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर है?
यह घटना राज्य सरकार और राजभवन के बीच चल रहे व्यापक तनाव के संदर्भ में देखी जा रही है। 'तमिल थाई वाऴ्थु' के प्रोटोकॉल को लेकर यह पहली बार नहीं है जब विवाद उठा हो, और इस बहिष्कार ने एक शैक्षणिक आयोजन को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
राष्ट्र प्रेस
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