23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड के बीच एकेडमिक साझेदारी पर सहमति, IT और स्टूडेंट एक्सचेंज को मिलेगा बढ़ावा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड के बीच एकेडमिक साझेदारी पर सहमति, IT और स्टूडेंट एक्सचेंज को मिलेगा बढ़ावा

सारांश

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड सरकार के बीच IT, उच्च शिक्षा और स्टूडेंट एक्सचेंज में साझेदारी पर बातचीत हुई। थाई विदेश मंत्रालय का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गुवाहाटी पहुँचा और कुलपति प्रो. नानी गोपाल महंता ने प्राचीन ताई-अहोम भाषाई विरासत को दोनों देशों की साझेदारी की नींव बताया।

मुख्य बातें

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड सरकार ने 23 सितंबर 2026 को उच्च शिक्षा, IT और एकेडमिक एक्सचेंज में सहयोग पर विचार-विमर्श किया।
थाईलैंड के विदेश मंत्रालय की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन के नेतृत्व में वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया।
नानी गोपाल महंता ने थाई और प्राचीन ताई-अहोम भाषा के बीच ऐतिहासिक संबंधों को साझेदारी की आधारशिला बताया।
सहयोग के क्षेत्रों में स्टूडेंट एक्सचेंज , शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान, IT में संयुक्त कार्यक्रम और इंटर्नशिप के अवसर शामिल।
ASEAN, BIMSTEC, मेकांग-गंगा सहयोग और IORA जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से संबंध और गहरे करने पर सहमति।

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड सरकार ने 23 सितंबर 2026 को उच्च शिक्षा, अनुसंधान, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), संस्कृति, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और एकेडमिक एक्सचेंज के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत और शैक्षणिक संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से एक अहम पहल मानी जा रही है।

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक

यह बातचीत गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और थाईलैंड के विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशियाई, मध्य पूर्व और अफ्रीकी मामलों के विभाग की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन के नेतृत्व में आए एक वरिष्ठ थाई प्रतिनिधिमंडल के बीच संपन्न हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में थाईलैंड के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और थाई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नानी गोपाल महंता ने थाईलैंड और पूर्वोत्तर भारत के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये जड़ें आज के दौर में दोनों देशों के बीच एकेडमिक और संस्थागत साझेदारी को मज़बूत करने का एक सशक्त आधार प्रदान करती हैं।

ताई-अहोम भाषाई विरासत पर विशेष जोर

प्रो. महंता ने विशेष रूप से थाई भाषा और प्राचीन ताई-अहोम भाषा के बीच ऐतिहासिक व भाषाई संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने इन संबंधों को संरक्षित और संवर्धित करने में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी की भूमिका को भी सामने रखा। साथ ही, उन्होंने आसियान (ASEAN), बिम्सटेक (BIMSTEC), ईस्ट एशिया समिट, मेकांग-गंगा सहयोग और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भारत-थाईलैंड संबंधों की व्यापक भूमिका पर प्रकाश डाला।

सहयोग के संभावित क्षेत्र

बैठक में दोनों पक्षों ने सहयोग के कई संभावित क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच आदान-प्रदान, IT और उच्च शिक्षा में संयुक्त कार्यक्रम, तथा प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर शामिल हैं। थाई प्रतिनिधिमंडल ने थाईलैंड-भारत रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को रेखांकित करते हुए शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग विस्तार की संभावनाएँ गिनाईं।

प्रतिभागियों ने भारत और थाईलैंड की विश्वविद्यालयों के बीच स्थायी संस्थागत संबंध स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को दीर्घकालिक और बेहतर अवसर मिल सकें।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी

इस विचार-विमर्श में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. उत्पल शर्मा, एकेडमिक रजिस्ट्रार प्रो. राजीव हंडिक, विभिन्न संकायों के डीन, यूनिवर्सिटी क्लासेस के सेक्रेटरी डॉ. रंजन कुमार काकती, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, रिसर्च स्कॉलर, सेंटर फॉर साउथ ईस्ट एशियन स्टडीज के अधिकारी तथा थाई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

आगे की राह

यह बैठक पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बढ़ते शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का संकेत है। गौरतलब है कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को आसियान देशों के साथ संपर्क का प्रमुख केंद्र बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है, और इस संदर्भ में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी की यह पहल उस दिशा में एक सकारात्मक कदम है। दोनों पक्षों द्वारा एक औपचारिक समझौता-ज्ञापन (MoU) की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महज एकेडमिक कूटनीति से आगे जाकर क्षेत्रीय पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की कोशिश है। ताई-अहोम भाषाई विरासत को साझेदारी की आधारशिला बनाना एक स्मार्ट सॉफ्ट पावर चाल है — यह सहयोग को केवल नीतिगत नहीं, सांस्कृतिक रूप से भी वैध बनाती है। हालाँकि, ऐसी बैठकों के बाद MoU और वास्तविक कार्यक्रम शुरू होने में अक्सर वर्षों लग जाते हैं — असली कसौटी यह होगी कि स्टूडेंट एक्सचेंज और IT सहयोग के लिए कोई ठोस समयसीमा और वित्तपोषण ढाँचा तय होता है या नहीं।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
दोनों पक्षों ने उच्च शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), स्टूडेंट एक्सचेंज, शिक्षक व शोधकर्ता आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। IT और उच्च शिक्षा में संयुक्त कार्यक्रमों पर विशेष सहमति बनी।
थाईलैंड के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
थाईलैंड के विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशियाई, मध्य पूर्व और अफ्रीकी मामलों के विभाग की महानिदेशक उरासा मोंगकोलनाविन ने वरिष्ठ थाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इसमें थाई विदेश मंत्रालय के अधिकारी और थाई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल थे।
ताई-अहोम और थाई भाषा का क्या संबंध है और इसका एकेडमिक साझेदारी से क्या जुड़ाव है?
प्राचीन ताई-अहोम भाषा और आधुनिक थाई भाषा के बीच ऐतिहासिक और भाषाई संबंध हैं, जो पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के साझा सांस्कृतिक अतीत को दर्शाते हैं। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नानी गोपाल महंता ने इन्हीं संबंधों को दोनों देशों के बीच एकेडमिक साझेदारी की मज़बूत नींव बताया।
इस साझेदारी का पूर्वोत्तर भारत के छात्रों पर क्या असर होगा?
यदि प्रस्तावित स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम और संयुक्त IT कार्यक्रम लागू होते हैं, तो पूर्वोत्तर भारत के छात्रों को थाईलैंड के विश्वविद्यालयों में अध्ययन, शोध और इंटर्नशिप के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे क्षेत्र में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग दोनों बेहतर होने की उम्मीद है।
यह बैठक भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' से कैसे जुड़ती है?
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को आसियान देशों के साथ व्यापार, शिक्षा और संस्कृति में जोड़ने पर जोर दिया जाता है। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और थाईलैंड के बीच यह बैठक उसी नीतिगत दिशा में एक ठोस एकेडमिक कदम है, जिसमें ASEAN और BIMSTEC जैसे मंचों का भी संदर्भ दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले