3 अगस्त 2026
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नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम प्रतिबंध पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई, केंद्र को नोटिस

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नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम प्रतिबंध पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई, केंद्र को नोटिस

सारांश

नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक प्रतिबंध लगाया — पेपर लीक और धोखाधड़ी नेटवर्क रोकने के लिए। टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी; सीईओ पावेल डुरोव का कहना है कि 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूज़र प्रभावित हुए।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस तेजस करिया की वेकेशन बेंच के सामने गुरुवार दोपहर 2:30 बजे टेलीग्राम प्रतिबंध मामले पर सुनवाई निर्धारित है।
केंद्र सरकार ने नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक अस्थाई प्रतिबंध लगाया है।
NTA का दावा है कि पेपर लीक नेटवर्क और झूठे साक्ष्य बनाने के लिए टेलीग्राम के मैसेज-एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग हुआ।
टेलीग्राम को 30 जून 2026 तक भारत में मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
सीईओ पावेल डुरोव ने कहा कि प्रतिबंध से 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ता प्रभावित हुए; कंपनी ने पहले ही सैकड़ों संदिग्ध चैनल हटाए थे।
मूल नीट-यूजी परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी, जिसमें प्रश्न-पत्र लीक के आरोप लगे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार, 19 जून 2026 को नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थाई प्रतिबंध के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। टेलीग्राम एफजेड एलएलसी ने इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी है, जिस पर जस्टिस तेजस करिया की वेकेशन बेंच दोपहर 2:30 बजे सुनवाई करेगी।

मामले की पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 17 जून 2026 को घोषणा की थी कि भारत में टेलीग्राम की सेवाएँ 22 जून 2026 तक अस्थाई रूप से प्रतिबंधित रहेंगी। यह अवधि नीट-यूजी री-एग्जाम के दिन और उसके ठीक बाद के समय को कवर करती है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, चैनल-स्पेसिफिक टेकडाउन और अन्य प्रवर्तन उपाय समस्या की व्यापकता को देखते हुए नाकाफी साबित हुए, जिसके बाद व्यापक प्रतिबंध अनिवार्य हो गया।

गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित मूल नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्न-पत्र लीक होने के आरोपों के बाद यह दोबारा परीक्षा कराई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार का तर्क और टेलीग्राम पर आरोप

NTA ने आरोप लगाया कि 'पेपर लीक्ड नीट', 'री-नीट 2026' और 'प्राइवेट माफिया' जैसे नामों से संचालित कई टेलीग्राम चैनलों पर परीक्षा सामग्री तक पहुँच दिलाने के बदले उम्मीदवारों से पैसे माँगे जा रहे थे। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि टेलीग्राम के मैसेज-एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग करके — पुराने संदेशों को संपादित कर और अटैचमेंट बदलकर, लेकिन मूल टाइमस्टैम्प को बनाए रखते हुए — प्रश्न-पत्र लीक होने के झूठे साक्ष्य तैयार किए गए थे।

इसी के चलते अधिकारियों ने टेलीग्राम को भारत में 30 जून 2026 तक अपना मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद रखने का निर्देश दिया है।

टेलीग्राम की दलीलें और सीईओ की प्रतिक्रिया

टेलीग्राम की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि सेवाओं पर लगाई गई रोक और संबंधित पाबंदियाँ आवश्यकता से अधिक हैं और इससे देश भर में लाखों उपयोगकर्ताओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कंपनी ने तत्काल सुनवाई की माँग की थी, जिस पर बुधवार को अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष एवं दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी।

टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस प्रतिबंध की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। डुरोव ने यह भी कहा कि टेलीग्राम ने हाल के हफ्तों में पहले ही सैकड़ों ऐसे चैनल हटा दिए हैं जो कथित तौर पर लीक हुई परीक्षा सामग्री साझा करने और भारतीय छात्रों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी करने में संलिप्त थे।

आगे क्या होगा

गुरुवार की सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार के जवाब और टेलीग्राम की दलीलों पर विचार करेगी। यह फैसला न केवल नीट-यूजी री-एग्जाम की निष्पक्षता के लिहाज़ से, बल्कि भविष्य में सरकार की डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रतिबंध की शक्तियों की सीमा तय करने के दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ लक्षित कार्रवाई की जगह ब्लैंकेट प्रतिबंध को प्राथमिकता दी जाती है। NTA की यह स्वीकारोक्ति कि चैनल-स्पेसिफिक टेकडाउन 'नाकाफी' रहे, दरअसल एजेंसी की अपनी निगरानी क्षमता की विफलता को उजागर करती है। 15 करोड़ उपयोगकर्ताओं को 3 मई के पेपर लीक की जवाबदेही के लिए दंडित करना — जो NTA की ही प्रशासनिक चूक थी — न्यायसंगत नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रतिबंध की शक्ति की सीमाएँ क्या हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट में टेलीग्राम प्रतिबंध पर सुनवाई कब और किसके सामने होगी?
गुरुवार, 19 जून 2026 को दोपहर 2:30 बजे जस्टिस तेजस करिया की वेकेशन बेंच के सामने 'टेलीग्राम एफजेड एलएलसी व अन्य बनाम भारत संघ और अन्य' मामले पर सुनवाई होगी। बुधवार को अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा था।
केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
सरकार ने नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम से पहले पेपर लीक, भ्रामक सूचना अभियान और नकल नेटवर्क को रोकने के उद्देश्य से 22 जून 2026 तक टेलीग्राम पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया। NTA का कहना था कि चैनल-स्पेसिफिक टेकडाउन जैसे अन्य उपाय नाकाफी साबित हुए।
टेलीग्राम के मैसेज-एडिटिंग फीचर पर क्यों रोक लगाई गई?
NTA ने आरोप लगाया कि इस फीचर का दुरुपयोग करके पुराने संदेशों को संपादित किया गया और अटैचमेंट बदले गए, जबकि मूल टाइमस्टैम्प बनाए रखकर प्रश्न-पत्र लीक होने के झूठे साक्ष्य तैयार किए गए। इसी कारण अधिकारियों ने 30 जून 2026 तक यह फीचर बंद रखने का निर्देश दिया।
पावेल डुरोव ने इस प्रतिबंध पर क्या कहा?
टेलीग्राम के सीईओ पावेल डुरोव ने एक्स पर पोस्ट करके प्रतिबंध की आलोचना की और कहा कि इससे भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि टेलीग्राम ने पहले ही सैकड़ों संदिग्ध चैनल हटा दिए थे।
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा क्यों हो रही है?
3 मई 2026 को आयोजित मूल नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्न-पत्र लीक होने के आरोपों के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। इसी संदर्भ में सरकार ने परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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