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टेलीग्राम बैन पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नीट री-एग्जाम से पहले सरकार का आदेश सही ठहराया

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टेलीग्राम बैन पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नीट री-एग्जाम से पहले सरकार का आदेश सही ठहराया

सारांश

नीट री-एग्जाम से ठीक पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर केंद्र के अस्थायी बैन को वैध ठहराया। जस्टिस तेजस कारिया ने आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार के आदेश को सही माना और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी। बैन 22 जून तक लागू रहेगा।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने टेलीग्राम की याचिका खारिज कर सरकार का बैन बरकरार रखा।
केंद्र सरकार ने आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया है।
30 जून तक पुराने संदेशों को संपादित करने की सुविधा भी बंद रहेगी।
बैन NTA की सिफारिशों और नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद लगाया गया था।
सरकार ने हलफनामे में कहा कि गैर-कानूनी कंटेंट हटाने के बार-बार अनुरोध 'नाकाफी' पाए गए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जून 2025 को टेलीग्राम ऐप पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी बैन को वैध करार दिया और प्लेटफॉर्म की याचिका खारिज कर दी। नीट-यूजी री-एग्जाम से ठीक पहले आया यह फैसला पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों की आशंकाओं के बीच सरकार के आपातकालीन कदम को न्यायिक मंजूरी देता है।

मुख्य घटनाक्रम

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर फैसला सुनाया। जस्टिस कारिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सरकार का आदेश सही है। आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।' गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, और शुक्रवार को सुनाए गए इस निर्णय में बैन बरकरार रखा गया।

सरकार ने क्यों लगाया था बैन

केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लागू किया था। साथ ही, 30 जून तक पहले भेजे गए संदेशों को संपादित करने की सुविधा भी बंद करने का निर्देश दिया गया था।

यह ऐसे समय में हुआ जब बड़े पैमाने पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद मूल नीट-यूजी परीक्षा रद्द की जा चुकी थी। सरकार की चिंता थी कि टेलीग्राम का उपयोग संगठित नकल नेटवर्क परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री साझा करने के लिए कर सकते हैं।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा, 'यह फैसला दूसरे सभी विकल्पों को आजमाने के बाद ही लिया गया, जिसमें गैर-कानूनी कंटेंट को विशेष रूप से हटाने के बार-बार किए गए अनुरोध भी शामिल थे, जो नाकाफी पाए गए।' सरकार का तर्क था कि टेलीग्राम के तकनीकी ढाँचे और परीक्षा धोखाधड़ी में इसके बार-बार दुरुपयोग के कारण आपातकालीन अवरोधन शक्तियों का इस्तेमाल करना अपरिहार्य हो गया था।

टेलीग्राम की दलीलें और याचिका खारिज

टेलीग्राम ने सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए अदालत में तर्क दिया कि मौजूदा कानून इस तरह के आंशिक प्रतिबंध का प्रावधान नहीं करता। प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि की सिफारिश की थी। हालाँकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

आगे क्या होगा

टेलीग्राम पर लगा अस्थायी बैन 22 जून तक प्रभावी रहेगा, जबकि संदेश संपादन पर रोक 30 जून तक जारी रहेगी। गौरतलब है कि यह मामला भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म विनियमन और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता के व्यापक प्रश्नों को भी रेखांकित करता है। अब देखना होगा कि टेलीग्राम उच्चतर न्यायालय में अपील करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परीक्षा धोखाधड़ी के आधार पर इसका न्यायिक अनुमोदन नई ज़मीन तोड़ता है। असली सवाल यह है कि क्या अस्थायी बैन वास्तव में संगठित नकल नेटवर्क को रोक सका, या ये गिरोह वैकल्पिक एन्क्रिप्टेड माध्यमों पर स्थानांतरित हो गए। नीट विवाद ने NTA की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े किए हैं, और तकनीकी प्लेटफॉर्म पर बैन उस संस्थागत विफलता का विकल्प नहीं हो सकता।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम बैन पर क्या फैसला दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने सरकार के अस्थायी बैन को वैध ठहराया और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।
टेलीग्राम पर बैन क्यों लगाया गया?
सरकार ने नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और संगठित नकल गिरोहों द्वारा टेलीग्राम के दुरुपयोग की आशंका के चलते यह बैन लगाया। NTA की सिफारिशों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने धारा 69ए के तहत यह निर्देश जारी किए।
टेलीग्राम पर बैन कब तक रहेगा?
टेलीग्राम पर अस्थायी बैन 22 जून तक लागू है। इसके अलावा, पुराने संदेशों को संपादित करने की सुविधा 30 जून तक बंद रहेगी।
टेलीग्राम ने बैन को चुनौती क्यों दी?
टेलीग्राम ने सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि मौजूदा कानून इस तरह के आंशिक प्रतिबंध का प्रावधान नहीं करता। प्लेटफॉर्म का यह भी तर्क था कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि की सिफारिश की थी।
आईटी अधिनियम की धारा 69ए क्या है?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या अन्य निर्धारित आधारों पर किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म या वेबसाइट को अवरुद्ध करने का अधिकार देती है। इसी प्रावधान के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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