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दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला: टेलीग्राम की नीट-यूजी 2026 बैन के खिलाफ याचिका

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दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला: टेलीग्राम की नीट-यूजी 2026 बैन के खिलाफ याचिका

सारांश

नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से ठीक एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला तय करेगा कि क्या परीक्षा-धोखाधड़ी रोकने के नाम पर सरकार पूरे प्लेटफॉर्म को बंद कर सकती है — और यह 22 लाख उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार सुबह 10:30 बजे टेलीग्राम की याचिका पर फैसला सुनाएगा।
MeitY ने IT अधिनियम की धारा 69ए के तहत 22 जून 2026 तक टेलीग्राम सेवाएँ और 30 जून 2026 तक मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद करने का आदेश दिया।
NTA ने टेलीग्राम पर लगभग 1.46 लाख अकाउंट्स तक पहुँच वाले चैनलों की पहचान की, जो कथित तौर पर नीट प्रश्न-पत्र बेच रहे थे।
टेलीग्राम का तर्क है कि पाबंदी अनुपातहीन है और लाखों निर्दोष उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करती है।
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए निर्धारित है।

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार, 20 जून 2026 को सुबह 10:30 बजे IST मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की उस रिट याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें नीट (यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले भारत में उसकी सेवाओं पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। न्यायाधीश तेजस कारिया की एकल पीठ ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत आपातकालीन अवरोधन शक्तियों का प्रयोग करते हुए 22 जून 2026 तक टेलीग्राम की सेवाएँ पूरे भारत में अस्थायी रूप से बंद करने और 30 जून 2026 तक उसके मैसेज-एडिटिंग फीचर को निष्क्रिय करने का निर्देश जारी किया। यह निर्देश राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के आधार पर जारी किया गया।

गौरतलब है कि यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाया गया जब 21 जून 2026 को 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा निर्धारित है — और परीक्षा-धोखाधड़ी के मामलों में टेलीग्राम के कथित दुरुपयोग को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही थीं।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने MeitY के माध्यम से दायर हलफनामे में स्पष्ट किया कि यह कदम सभी विकल्प आजमाने के बाद उठाया गया। सरकार के अनुसार, टेलीग्राम से गैरकानूनी कंटेंट हटाने के लिए बार-बार किए गए अनुरोध नाकाफी साबित हुए।

NTA ने टेलीग्राम के उन चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स की पहचान की थी जो कथित तौर पर नीट के प्रश्न-पत्र बेचने और परीक्षा-घोटालों में शामिल थे। इन माध्यमों की कुल पहुँच लगभग 1.46 लाख अकाउंट्स तक थी, और वे परीक्षार्थियों से खुलेआम पैसे माँग रहे थे। केंद्र ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम के आर्किटेक्चर और उसके बार-बार हो रहे दुरुपयोग को देखते हुए सरकार के पास आपातकालीन अवरोधन के अलावा "कोई और विकल्प" नहीं बचा था।

टेलीग्राम का तर्क

टेलीग्राम ने अदालत में तर्क दिया कि ये पाबंदियाँ अनुपातहीन हैं और लाखों निर्दोष उपयोगकर्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। प्लेटफॉर्म का कहना है कि कुछ दुरुपयोगकर्ताओं की वजह से पूरी सेवा बंद करना संविधान-सम्मत नहीं है और इससे व्यापक जनहित को नुकसान पहुँचता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियंत्रण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर बहस पहले से ही तीखी हो चुकी है।

आम जनता और परीक्षार्थियों पर असर

टेलीग्राम भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला संचार माध्यम है — शिक्षा, व्यापार और पत्रकारिता सहित अनेक क्षेत्रों में। अस्थायी प्रतिबंध ने लाखों उपयोगकर्ताओं को प्रभावित किया। दूसरी ओर, 22 लाख से अधिक नीट उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की पवित्रता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता रही।

आगे क्या होगा

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला शुक्रवार सुबह 10:30 बजे अपेक्षित है — ठीक एक दिन पहले जब नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा होनी है। यदि अदालत प्रतिबंध पर रोक लगाती है, तो यह डिजिटल प्लेटफॉर्म के आपातकालीन अवरोधन की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। यदि प्रतिबंध बरकरार रहा, तो परीक्षा तक टेलीग्राम भारत में बंद रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल यह है कि केवल उन्हें ब्लॉक क्यों नहीं किया गया। परीक्षा-धोखाधड़ी एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसका समाधान करोड़ों उपयोगकर्ताओं की सेवा बाधित करके नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म-स्तरीय जवाबदेही तय करके होना चाहिए। यह मामला भारत में डिजिटल आपातकालीन शक्तियों की सीमाओं की परीक्षा है — और हाईकोर्ट का फैसला भविष्य की नज़ीर बनेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट में टेलीग्राम की याचिका किस बारे में है?
टेलीग्राम ने नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा IT अधिनियम की धारा 69ए के तहत 22 जून तक लगाए गए अस्थायी बैन को चुनौती दी है। प्लेटफॉर्म का तर्क है कि यह प्रतिबंध अनुपातहीन है और लाखों निर्दोष उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुँचाता है।
सरकार ने टेलीग्राम पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
NTA ने टेलीग्राम पर ऐसे चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स की पहचान की जो कथित तौर पर नीट के प्रश्न-पत्र बेच रहे थे और परीक्षार्थियों से खुलेआम पैसे माँग रहे थे। इन माध्यमों की पहुँच लगभग 1.46 लाख अकाउंट्स तक थी। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी कंटेंट हटाने के बार-बार के अनुरोध नाकाफी रहे।
टेलीग्राम बैन कब तक लागू रहेगा?
केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार टेलीग्राम की सेवाएँ 22 जून 2026 तक और मैसेज-एडिटिंग फीचर 30 जून 2026 तक बंद रहने का आदेश है। हालाँकि, दिल्ली हाईकोर्ट का शुक्रवार का फैसला इस स्थिति को बदल सकता है।
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से कितने उम्मीदवार प्रभावित हैं?
21 जून 2026 को आयोजित होने वाली नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा में 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होने वाले हैं। सरकार ने इस परीक्षा की पवित्रता सुनिश्चित करना अपनी 'मुख्य प्राथमिकता' बताया है।
IT अधिनियम की धारा 69ए क्या है और इसका इस्तेमाल कब होता है?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या संप्रभुता को खतरे की स्थिति में किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म या सामग्री को आपातकालीन आधार पर अवरुद्ध करने का अधिकार देती है। इस मामले में इसे परीक्षा-धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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