नेपाल: 1991 के बाद संसदीय चुनावों में सबसे कम मतदान की संभावनाएं

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नेपाल: 1991 के बाद संसदीय चुनावों में सबसे कम मतदान की संभावनाएं

सारांश

नेपाल में मतदान का माहौल शांतिपूर्ण था, लेकिन मतदाता टर्नआउट में कमी लोगों की उदासीनता को दर्शाता है। जेन जी आंदोलन के बाद के इन चुनावों में उम्मीदें अधिक थीं।

Key Takeaways

  • शांतिपूर्ण मतदान वातावरण में चुनाव संपन्न हुए।
  • मतदाता टर्नआउट में कमी ने उदासीनता का संकेत दिया।
  • जेन जी आंदोलन के बाद पहली बार चुनाव हुए।
  • 18.9 मिलियन पंजीकृत वोटर हैं।
  • सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी के कारण मतदान में कमी।

काठमांडू, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में गुरुवार को मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। सभी की नजरें अब नतीजों पर हैं, लेकिन इससे पहले मतदाता टर्नआउट ने लोगों की उदासीनता को उजागर किया है। जेन जी आंदोलन के पश्चात पहली बार हो रहे चुनावों को लेकर उच्च उम्मीदें थीं।

कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशभर से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वोटर टर्नआउट लगभग 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

यदि अंतिम आंकड़े आने के बाद भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ता है, तो यह 1991 के आम चुनावों के बाद का सबसे कम वोटर टर्नआउट होगा। 2022 के चुनावों में, वोटरों का टर्नआउट 61.41 प्रतिशत था।

उन्होंने आगे कहा, "विस्तृत आंकड़े अभी भी एकत्र किए जा रहे हैं। संबंधित चुनाव क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ पोलिंग सेंटरों में मतदान अभी भी जारी है, क्योंकि जो मतदाता निर्धारित समय में पोलिंग स्टेशन में शामिल हो गए थे, वे वोट डाल रहे हैं।"

उन्होंन यह भी कहा कि कुछ अलग-अलग घटनाओं के अलावा, चुनावों पर नजर रखने के लिए तैनात नेशनल और इंटरनेशनल इलेक्शन ऑब्जर्वर की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव शांति से संपन्न हुआ।

भंडारी ने कहा, "मतदान प्रक्रिया के पूरा होने के साथ, बैलेट बॉक्स सुरक्षित रूप से जमा होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू कर दी जाएगी।" निर्वाचन आयोग ने बताया कि 15 जिलों के दूर-दराज के इलाकों से बैलेट बॉक्स हेलीकॉप्टर द्वारा लाए जाएंगे।

आयोग के अनुसार, देश में 18.9 मिलियन पंजीकृत वोटर हैं। कुछ पोलिंग स्टेशनों पर तो लोगों ने सरकार के प्रति नाराजगी के कारण चुनावों का बॉयकॉट भी किया।

भंडारी ने कहा, "यह चुनाव आयोग से नाराजगी नहीं है, बल्कि सरकार से है, और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।"

पिछले साल सितंबर में जेन-जी आंदोलन के बाद उत्पन्न नए राजनीतिक हालात के कारण हिमालयी देश में नए चुनाव लगभग दो साल पहले तय समय से हुए, जिससे पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।

सरकार के प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, जेन-जी नेताओं की मांग पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया गया था, और उन्हें छह महीने के भीतर नए चुनाव कराने का आदेश दिया गया था।

नेपाल के निर्वाचन आयोग के अनुसार, कुल वोटरों में से दो-तिहाई से अधिक नए रजिस्टर्ड वोटर जेन-जी एज ग्रुप के हैं, जो 2026 के चुनावों से पहले युवाओं की भागीदारी में वृद्धि को दर्शाता है।

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत कुल 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि 3,135 उम्मीदवार अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुनाव लड़ रहे हैं।

Point of View

NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

नेपाल में मतदान का माहौल कैसा था?
नेपाल में मतदान का माहौल शांतिपूर्ण था और चुनावों पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों ने भी इसे सकारात्मक बताया।
मतदाता टर्नआउट का क्या अनुमान है?
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, वोटर टर्नआउट लगभग 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
क्या मतदान में कोई रुकावट आई थी?
कुछ अलग-अलग घटनाओं के अलावा, मतदान प्रक्रिया सामान्य रूप से शांतिपूर्ण रही।
नेपाल में कितने पंजीकृत वोटर हैं?
नेपाल में कुल 18.9 मिलियन पंजीकृत वोटर हैं।
चुनावों का बॉयकॉट क्यों किया गया?
कुछ पोलिंग स्टेशनों पर लोगों ने सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी के चलते चुनावों का बॉयकॉट किया।
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