डीएमजेड बारूदी सुरंग विस्फोट: दक्षिण कोरिया का दावा — उत्तर कोरिया ने जानबूझकर बिछाईं थीं माइंस, 3 सैनिक घायल
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरियाई सेना ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से दावा किया कि 21 सितंबर को विसैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमजेड) में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट के लिए उत्तर कोरिया द्वारा जानबूझकर बिछाई गई एंटी-पर्सनल माइंस जिम्मेदार थीं। इस हमले में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए थे — दो के टखनों में गंभीर चोट आई और एक को मामूली चोट लगी। जांच के बाद सेना ने संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) द्वारा सत्यापित स्थानों पर बारूदी सुरंग हटाने का अभियान भी चला दिया है।
जांच में क्या मिला
दक्षिण कोरियाई सेना और यूएनसी ने संयुक्त जांच में पाया कि विस्फोट में इस्तेमाल माइंस में टीएनटी और थर्मोसेटिंग रेजिन के वे घटक मौजूद थे जो उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंगों में पाए जाते हैं। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल क्वोन डे-वोन ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि घायल सैनिकों के शरीर से बरामद सुरंगों के टुकड़े पहले इमजिन नदी से मिली उत्तर कोरियाई प्लास्टिक एंटी-पर्सनल माइंस से पूरी तरह मेल खाते हैं।
इन माइंस की पहचान उनके भूरे रंग के बाहरी खोल और ढक्कन पर जालीदार पैटर्न से हुई। जांच में यह भी सामने आया कि माइंस जमीन से करीब 3 से 10 सेंटीमीटर नीचे दबी हुई थीं — जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उन्हें प्राकृतिक रूप से बाढ़ में बहकर आने की बजाय जानबूझकर जमीन में लगाया गया था।
जानबूझकर बिछाने के साक्ष्य
लेफ्टिनेंट जनरल क्वोन डे-वोन ने बताया कि यूएनसी ने भी अपनी जांच में निष्कर्ष निकाला है कि इन बारूदी सुरंगों को जानबूझकर लगाया गया था और अनुमान है कि इन्हें करीब 12 महीने पहले जमीन में दबाया गया था। जीपीएस माप के अनुसार दोनों विस्फोट स्थल और एक अतिरिक्त बारूदी सुरंग मिलने की जगह सैन्य सीमांकन रेखा (एमडीएल) के करीब 10 मीटर दक्षिण में स्थित थे।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, बाढ़ के दौरान उत्तर कोरिया की ओर से बहकर आने वाली माइंस अक्सर एमडीएल के दक्षिणी हिस्से में पहुँच जाती हैं — लेकिन इस मामले में माइंस का जमीन में दबाया जाना उन्हें सामान्य बाढ़-जनित घटना से अलग करता है।
दक्षिण कोरिया की जवाबी कार्रवाई
जेसीएस ने सोमवार दोपहर करीब 12 बजकर 51 मिनट पर एमडीएल के दक्षिण में स्थित बारूदी सुरंग क्षेत्र को हटाने का अभियान चलाया — यह विस्फोट के बाद दक्षिण कोरियाई सेना की पहली ऐसी कार्रवाई थी। सेना ने इस अभियान का वीडियो भी जारी किया, जिसमें विस्फोट के बाद काला धुआं उठता और तेज धमाके की आवाज सुनाई देती है।
लेफ्टिनेंट जनरल क्वोन ने माँग की कि उत्तर कोरिया दक्षिण कोरियाई सैनिकों के घायल होने की घटना के लिए गंभीरता से माफी माँगे और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन कर बिछाई गई माइंस को तत्काल हटाए। सेना ने यह भी कहा कि अगर उत्तर कोरिया माइंस हटाने से इनकार करता है तो वह अभियान जारी रखेगी।
बढ़ता सीमा तनाव और उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया
यह घटना ऐसे समय में आई है जब दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया ने अप्रैल 2024 से सीमा पर सुरक्षा ढाँचे को लगातार मजबूत किया है — कंटीले तारों की बाड़, बारूदी सुरंगें और एमडीएल के आसपास टैंक रोधी अवरोध खड़े करना इसमें शामिल है। जेसीएस के अनुसार, मार्च 2025 से एमडीएल के आसपास उत्तर कोरियाई गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है और पूर्वी मोर्चे पर रोजाना करीब 7,000 उत्तर कोरियाई सैनिकों को तैनात किया जा सकता है।
इस साल एमडीएल के दक्षिण में उत्तर कोरियाई सैनिकों की घुसपैठ की घटनाएँ 50 से अधिक हो गई हैं, जबकि 2024 में केवल 9 और 2025 में 17 ऐसी घटनाएँ दर्ज की गई थीं। यह आँकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि अंतर-कोरियाई सीमा पर तनाव तेज़ी से बढ़ा है।
हालाँकि, उत्तर कोरिया ने डीएमजेड में हुए विस्फोटों के लिए जिम्मेदारी से इनकार किया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने दक्षिण कोरिया के निष्कर्षों को 'मनगढ़ंत' करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि सियोल की ओर से इसके अनुरूप कोई कार्रवाई की गई तो उत्तर कोरिया जवाबी कदम उठा सकता है।
युद्धविराम समझौते का संदर्भ
1950-53 के कोरियाई युद्ध को समाप्त करने वाले युद्धविराम समझौते के तहत डीएमजेड में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों पर रोक है और एमडीएल को दोनों कोरियाई देशों के बीच बफर जोन माना जाता है। माइंस बिछाने का यह कथित कदम उस समझौते का सीधा उल्लंघन है। यह पूरा घटनाक्रम किम जोंग-उन के उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने अंतर-कोरियाई संबंधों को 'एक-दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण राज्यों' के बीच संबंध बताया था। आने वाले दिनों में यूएनसी की प्रतिक्रिया और सियोल का अगला कूटनीतिक कदम इस तनाव की दिशा तय करेगा।