MOS पबित्रा मार्गेरिटा 16-22 अक्टूबर को समोआ, कुक आइलैंड्स और नाउरू के सात दिवसीय दौरे पर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 16 से 22 अक्टूबर 2026 तक प्रशांत महासागर के तीन द्वीपीय देशों — समोआ, कुक आइलैंड्स और नाउरू — की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह यात्रा भारत और प्रशांत द्वीपीय देशों के बीच विकास सहयोग तथा राजनीतिक संपर्क को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है।
यात्रा का कार्यक्रम और उद्देश्य
मंत्रालय के अनुसार, मार्गेरिटा इस सात दिवसीय दौरे के दौरान तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके साथ ही वह प्रमुख हितधारकों और स्थानीय भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद स्थापित करेंगे। यात्रा के दौरान वह क्षेत्र में भारत की सहायता से संचालित विकास परियोजनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण भी करेंगे।
FIPIC ढाँचे के तहत भारत की प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के ढाँचे के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। FIPIC के माध्यम से भारत प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक साझेदारी को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि मई 2023 में पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित तीसरे FIPIC शिखर सम्मेलन के बाद से यह क्षेत्रीय सहयोग में भारत की बढ़ती सक्रियता का एक और उदाहरण है।
भारत-ओशिनिया संबंधों का बदलता परिदृश्य
हाल के वर्षों में भारत और ओशिनिया क्षेत्र के संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं। भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत इस क्षेत्र के देशों के साथ रणनीतिक और कूटनीतिक सहयोग को व्यापक बना रहा है। ओशिनिया में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, फिजी, तुवालू, वानुअतु, समोआ, नाउरू और सोलोमन द्वीप समूह सहित कुल 14 स्वतंत्र देश शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अप्रैल 2026 में मार्गेरिटा पहले ही तुवालू और वानुअतु का दौरा कर जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सहयोग पर चर्चा कर चुके हैं — यानी यह उनकी ओशिनिया कूटनीति का दूसरा बड़ा दौर है।
हिंद-प्रशांत में रणनीतिक महत्व
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री मार्गों की निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में भारत और ओशिनिया के देश एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनते जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनज़र भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता और भी प्रासंगिक हो जाती है। यह दौरा भारत के प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में एक और ठोस कदम माना जा रहा है।