अमेरिका-ईरान तनाव में पाकिस्तान की मध्यस्थता: $7 अरब IMF प्रोग्राम और ऊर्जा संकट की मजबूरी
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान अभी $7 अरब के IMF बेलआउट प्रोग्राम पर निर्भर है और विदेशी मुद्रा भंडार को $18 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
- चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल आयात में तेल की हिस्सेदारी 16.64 प्रतिशत रही।
- देश में बिजली की कमी करीब 3,400 मेगावाट तक पहुँची; उत्तरी पाकिस्तान में रोज़ाना 7 घंटे बिजली कटौती।
- वाणिज्य मंत्रालय ने माना कि ईरान के साथ कुछ लेन-देन अभी भी बार्टर प्रणाली से होते हैं।
- एलएनजी के लिए पाकिस्तान कतर समेत खाड़ी देशों पर भारी निर्भर है।
पाकिस्तान की अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशें महज राजनीतिक चाल नहीं, बल्कि एक गहरी आर्थिक मजबूरी हैं — यह बात एक नई रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद अभी $7 अरब के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) बेलआउट प्रोग्राम पर निर्भर है और उसका केंद्रीय बैंक जून 2025 के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार को लगभग $18 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ऐसे में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता तनाव पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा बन गया है।
मध्यस्थता के पीछे आर्थिक हित
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अगर पाकिस्तान इस मामले में सफलतापूर्वक बीच-बचाव कर पाता है, तो उसे कई मोर्चों पर राहत मिल सकती है। तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का खतरा कम होगा, बिजली सेक्टर पर दबाव घटेगा, खाड़ी देशों के साथ संबंध स्थिर रहेंगे और ईरान के साथ व्यापार के नए अवसर खुल सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान एक बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसमें काफी संभावनाएँ हैं, लेकिन यह बाहरी झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील भी है।
ऊर्जा आयात पर निर्भरता
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के कुल आयात में तेल की हिस्सेदारी 16.64 प्रतिशत रही। इसका सीधा अर्थ यह है कि तेल की कीमत बढ़ने या सप्लाई में रुकावट आने से महंगाई और पाकिस्तानी रुपये पर तत्काल असर पड़ता है। यह ऐसे समय में और भी गंभीर है जब सरकार कीमतों को स्थिर करने और आर्थिक भरोसा बहाल करने की कोशिश में जुटी है।
एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के मामले में भी पाकिस्तान खाड़ी देशों, खासकर कतर पर काफी निर्भर है। मौजूदा क्षेत्रीय तनाव ने इस कमज़ोरी को और उजागर कर दिया है।
बिजली संकट और ईरान से व्यापार
रिपोर्ट के अनुसार, देश में बिजली की कमी बढ़कर करीब 3,400 मेगावाट तक पहुँच गई है और उत्तरी पाकिस्तान के कुछ इलाकों में रोज़ाना सात घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। यह स्थिति किसी भी बाहरी ऊर्जा आघात को और असहनीय बना देती है।
पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ औपचारिक बैंकिंग चैनल की कमी के कारण कुछ लेन-देन अभी भी बार्टर (सामान के बदले सामान) के ज़रिए होते हैं। गौरतलब है कि यह स्थिति पाकिस्तान के उस स्पष्ट हित को रेखांकित करती है जिसमें वह नहीं चाहता कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव किसी लंबे संघर्ष में तब्दील हो जाए।
क्षेत्रीय स्थिरता पाकिस्तान की प्राथमिकता
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तान ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है और IMF के बेलआउट प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय ऊर्जा बाज़ार में कोई भी उतार-चढ़ाव उसके आर्थिक सुधार कार्यक्रम को पटरी से उतार सकता है। आने वाले महीनों में पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी कारगर होती है, यह न केवल उसकी कूटनीतिक क्षमता बल्कि उसकी आर्थिक सेहत की भी परीक्षा होगी।