पनामा में 7.7 और 6.6 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप, 27 घायल; भारत ने जताई एकजुटता
सारांश
मुख्य बातें
मध्य अमेरिकी देश पनामा में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह रिक्टर स्केल पर क्रमशः 7.7 और 6.6 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिससे राजधानी पनामा सिटी सहित पूरे देश में दहशत फैल गई और हजारों लोग रात भर खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर हो गए। पनामा की राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा प्रणाली (SINAPROC) के दूसरे बुलेटिन के अनुसार, स्थानीय समय के अनुसार शुक्रवार रात 8 बजे तक कम से कम 27 लोग घायल हो चुके थे। भारत ने इस आपदा के बीच पनामा के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की है।
भूकंप का विवरण और प्रभाव
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, 7.7 तीव्रता का पहला भूकंप पनामा के दक्षिणी छोर के पास आया, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके झटके राजधानी से 100 मील से अधिक दूर तक महसूस किए गए। इमारतें हिल उठीं, दीवारों पर दरारें पड़ गईं और लोग भयभीत होकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
इसके बाद शनिवार सुबह 6.6 तीव्रता का दूसरा बड़ा झटका आया, जिसका केंद्र भी जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। देश के मध्य भाग में इस झटके के असर से इमारतें ढह गईं और सड़कों को भारी नुकसान पहुँचा।
सुनामी की चेतावनी और वापसी
यूएस पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने पहले पनामा के तटीय इलाकों में सुनामी की लहरें आने की चेतावनी जारी की थी। हालाँकि बाद में यह चेतावनी वापस ले ली गई और स्थिति को सामान्य घोषित किया गया। गौरतलब है कि पनामा प्रशांत और अटलांटिक दोनों महासागरों के बीच स्थित होने के कारण भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है।
पनामा राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने कहा, 'कोई भी तैयार नहीं था और इस तरह की आपदा के लिए कोई कभी तैयार नहीं होता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार शाम तक अधिकारियों को किसी के मारे जाने की कोई पुष्टि नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने सतर्क करते हुए कहा कि आने वाले घंटों में स्थिति बदल सकती है।
भारत की एकजुटता
भारत ने इस संकट की घड़ी में पनामा के साथ खड़े होने का संदेश दिया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'भूकंप के बाद भारत पनामा की सरकार और जनता के साथ खड़ा है। हमारी गहरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं सभी घायल और प्रभावित लोगों के साथ हैं, विशेष रूप से उन परिवारों के साथ जिन्होंने नुकसान और कठिनाइयों का सामना किया है।'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी पुष्टि की कि भारत इस आपदा की घड़ी में पनामा की सरकार और वहाँ की जनता के साथ एकजुटता से खड़ा है। यह बयान भारत की उस नीति को रेखांकित करता है जिसके तहत वह प्राकृतिक आपदाओं के समय मित्र देशों के साथ सहयोग का हाथ बढ़ाता है।
रात भर खुले में रहे लोग
भूकंप की दहशत इस कदर थी कि रात भर लोग खुले स्थानों पर खड़े रहे और घरों के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। लोग सुबह तक हालात की जानकारी का इंतजार करते रहे। यह ऐसे समय में आया है जब पनामा पहले से ही क्षेत्रीय राजनीतिक दबावों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। स्थिति की निगरानी जारी है और राहत व बचाव कार्य के आँकड़े आने वाले घंटों में और स्पष्ट होंगे।