तिब्बत में 7.0 भूकंप के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में भी झटके; 16 मौतें, 300 घर ढहे
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार की सुबह तिब्बत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन — चार देशों में भूकंप के झटके दर्ज किए गए। एक दिन पहले गुरुवार रात 8:03 बजे आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने तिब्बत में भारी तबाही मचाई, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई और करीब 32 लोग घायल हुए। 300 से अधिक घर ढह जाने की खबर है और नुकसान का आकलन अभी जारी है।
गुरुवार रात का मुख्य भूकंप: तीव्रता और केंद्र
एनसीएस के अनुसार, गुरुवार रात 8:03 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 थी। इसका केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई में स्थित था और तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था। इतनी गहराई पर केंद्र होने के बावजूद भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बड़े पैमाने पर संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हो गईं।
शुक्रवार सुबह के आफ्टरशॉक और नए झटके
मुख्य भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर तिब्बत में एक बार फिर धरती काँपी। एनसीएस ने इस आफ्टरशॉक की तीव्रता 4.4 दर्ज की, जिसका केंद्र सतह से 15 किलोमीटर की गहराई पर था।
इसी दौरान पड़ोसी देशों में भी अलग-अलग झटके महसूस किए गए। पाकिस्तान में सुबह 4:56 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 28.919° उत्तरी अक्षांश और 64.678° पूर्वी देशांतर पर 15 किलोमीटर की गहराई में था। अफगानिस्तान में सुबह 5:54 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ — केंद्र 35.138° उत्तरी अक्षांश, 69.442° पूर्वी देशांतर और 25 किलोमीटर की गहराई पर। चीन में सुबह 6:05 बजे 4.4 तीव्रता के झटके महसूस किए गए, जिनका केंद्र 32.542° उत्तरी अक्षांश, 93.835° पूर्वी देशांतर और 15 किलोमीटर की गहराई पर था।
राहत कार्य और नुकसान का आकलन
तिब्बत में 300 से अधिक घर ढहने की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से जारी है और प्रभावित लोगों तक मदद पहुँचाई जा रही है। भूकंप से हुए संपूर्ण नुकसान का आकलन अभी भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: चिंगहाई-तिब्बत पठार पर बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और अधिक बढ़ा सकती हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सक्रिय टेक्टोनिक ज़ोन में स्थित है, जहाँ इंडियन और यूरेशियन प्लेटों के टकराव के कारण बड़े भूकंपों का जोखिम हमेशा बना रहता है। आने वाले घंटों और दिनों में और आफ्टरशॉक आने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।