तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किमी गहराई में था केंद्र; फ्लैश फ्लड के बाद एक और आपदा
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बत में गुरुवार रात 8 बजकर 3 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई में था। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब यह क्षेत्र 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा है।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का अधिकेंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित था। 173 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित होने के कारण यह एक 'डीप-फोकस' भूकंप की श्रेणी में आता है, जिसमें सतह पर नुकसान अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन व्यापक क्षेत्र में झटके महसूस किए जाते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले 3 सितंबर को भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र मात्र 14 किलोमीटर की गहराई में था।
पिछली आपदाओं का संदर्भ
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के भीषण हिमस्खलन से आई फ्लैश फ्लड ने इस क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में कई घर, सड़कें और पुल बह गए थे, जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचा था और हज़ारों लोग लापता हो गए थे।
नेपाल में इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,285 लोग लापता बताए गए थे — यह आँकड़ा तब का है जब अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान समाप्त किया। नेपाल सरकार के अनुमान के अनुसार शुरुआती राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए करीब 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
तिब्बत की ओर से चीन के सरकारी मीडिया ने 43 लोगों की मौत और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। पहले की रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 558 बताई गई थी, जिनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हालाँकि, प्रभावित क्षेत्रों से सीमित जानकारी मिलने के कारण तबाही के वास्तविक स्तर का स्वतंत्र रूप से आकलन करना कठिन बना हुआ है।
जनवरी 2025 की तुलना
जनवरी 2025 में चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार तिब्बत में 6.8 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था, जिसमें 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। वर्तमान भूकंप उससे अधिक तीव्र है, हालाँकि अधिक गहराई में केंद्रित होने के कारण प्रत्यक्ष क्षति का तत्काल आकलन नहीं हो सका है।
विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ती चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और गहरा कर सकती हैं। उनके अनुसार, इस ताज़ा भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूगर्भीय और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को रेखांकित किया है।
यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है, जो इसे विश्व के सर्वाधिक भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में से एक बनाता है। प्रभावित इलाकों में जहाँ लोग अभी हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं, वहाँ यह नया झटका पुनर्निर्माण प्रयासों को और जटिल बना सकता है।