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तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किमी गहराई में था केंद्र; फ्लैश फ्लड के बाद एक और आपदा

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तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किमी गहराई में था केंद्र; फ्लैश फ्लड के बाद एक और आपदा

सारांश

फ्लैश फ्लड की तबाही से अभी उबरा नहीं था तिब्बत, कि गुरुवार रात 7.0 तीव्रता के भूकंप ने फिर दस्तक दी। 173 किमी गहराई में केंद्रित इस भूकंप ने एक बार फिर चिंगहाई-तिब्बत पठार की भूगर्भीय नाज़ुकता को उजागर किया है।

मुख्य बातें

तिब्बत में 22 अक्टूबर 2026 की रात 8:03 बजे रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का भूकंप आया।
भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई में और ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था।
26 अगस्त की फ्लैश फ्लड में नेपाल में 1,455 मौतें , 5,285 लापता ; पुनर्वास के लिए 5 अरब डॉलर की जरूरत का अनुमान।
तिब्बत की ओर चीनी सरकारी मीडिया ने उस आपदा में 43 मौतें और 500 से अधिक लापता बताए थे।
जनवरी 2025 में 6.8 तीव्रता के भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों का पिघलना इस क्षेत्र में आपदाओं का खतरा और बढ़ा रहा है।

तिब्बत में गुरुवार रात 8 बजकर 3 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई में था। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब यह क्षेत्र 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा है।

भूकंप का केंद्र और तीव्रता

भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का अधिकेंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित था। 173 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित होने के कारण यह एक 'डीप-फोकस' भूकंप की श्रेणी में आता है, जिसमें सतह पर नुकसान अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन व्यापक क्षेत्र में झटके महसूस किए जाते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 3 सितंबर को भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र मात्र 14 किलोमीटर की गहराई में था।

पिछली आपदाओं का संदर्भ

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के भीषण हिमस्खलन से आई फ्लैश फ्लड ने इस क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। उस बाढ़ में कई घर, सड़कें और पुल बह गए थे, जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचा था और हज़ारों लोग लापता हो गए थे।

नेपाल में इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,285 लोग लापता बताए गए थे — यह आँकड़ा तब का है जब अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान समाप्त किया। नेपाल सरकार के अनुमान के अनुसार शुरुआती राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए करीब 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी।

तिब्बत की ओर से चीन के सरकारी मीडिया ने 43 लोगों की मौत और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। पहले की रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 558 बताई गई थी, जिनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हालाँकि, प्रभावित क्षेत्रों से सीमित जानकारी मिलने के कारण तबाही के वास्तविक स्तर का स्वतंत्र रूप से आकलन करना कठिन बना हुआ है।

जनवरी 2025 की तुलना

जनवरी 2025 में चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार तिब्बत में 6.8 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था, जिसमें 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। वर्तमान भूकंप उससे अधिक तीव्र है, हालाँकि अधिक गहराई में केंद्रित होने के कारण प्रत्यक्ष क्षति का तत्काल आकलन नहीं हो सका है।

विशेषज्ञों की चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ती चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और गहरा कर सकती हैं। उनके अनुसार, इस ताज़ा भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूगर्भीय और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को रेखांकित किया है।

यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है, जो इसे विश्व के सर्वाधिक भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में से एक बनाता है। प्रभावित इलाकों में जहाँ लोग अभी हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं, वहाँ यह नया झटका पुनर्निर्माण प्रयासों को और जटिल बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि फ्लैश फ्लड से टूटे बुनियादी ढाँचे और विस्थापित आबादी के बीच राहत और पुनर्निर्माण कितना प्रभावित होगा। जलवायु वैज्ञानिकों की चेतावनी — कि ग्लेशियरों के पिघलने से भूगर्भीय अस्थिरता बढ़ती है — अब महज सैद्धांतिक नहीं रही। चीन की ओर से सूचना प्रवाह पर रहने वाली पाबंदियाँ नुकसान के वास्तविक आकलन को और कठिन बनाती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय राहत प्रयासों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिब्बत में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप का केंद्र कहाँ था?
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में और तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था। यह 22 अक्टूबर 2026 की रात 8 बजकर 3 मिनट पर आया।
तिब्बत में हाल ही में कौन-सी बड़ी आपदाएँ आई हैं?
26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन से भीषण फ्लैश फ्लड आई थी, जिसमें नेपाल में 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लापता होने की पुष्टि हुई। इससे पहले जनवरी 2025 में 6.8 तीव्रता के भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी।
7.0 तीव्रता का यह भूकंप क्षेत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है?
173 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित होने के कारण सतह पर प्रत्यक्ष नुकसान अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन फ्लैश फ्लड से पहले से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे और जारी पुनर्वास कार्यों पर इसका असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र की भूगर्भीय नाज़ुकता को और उजागर करता है।
फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल को कितनी राहत राशि की जरूरत है?
नेपाल सरकार के अनुमान के अनुसार 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड आपदा के बाद शुरुआती राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए करीब 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी। इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई और 5,285 लोग लापता बताए गए।
विशेषज्ञ तिब्बत-नेपाल क्षेत्र में बढ़ती आपदाओं को किससे जोड़ते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ती चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ा रही हैं। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर भी स्थित है, जो इसे भूकंप-प्रवण बनाता है।
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