तिब्बत में 7.0 के भूकंप के बाद फिर झटका: 4.4 तीव्रता दर्ज, 16 मौतें, 300+ घर ढहे
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बत में गुरुवार रात 8 बजकर 3 मिनट पर आए 7.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर धरती एक बार फिर काँप उठी। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, इस ताज़े झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.4 दर्ज की गई। मुख्य भूकंप में 16 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से अधिक घर ध्वस्त हो गए हैं।
भूकंप का केंद्र और गहराई
NCS के आँकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह का 4.4 तीव्रता का आफ्टरशॉक धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका अधिकेंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था। इससे पहले गुरुवार रात के मुख्य भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 15 किलोमीटर नीचे बताया गया था।
मुख्य भूकंप से नुकसान
गुरुवार की रात आए 7.0 तीव्रता के झटके ने भारी तबाही मचाई। 300 से अधिक घर ढह गए और 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो के अनुसार, 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से 11 की हालत शुक्रवार सुबह 2 बजकर 25 मिनट तक गंभीर बनी हुई थी। भूकंप से हुए नुकसान का आकलन अभी भी जारी है।
राहत और बचाव कार्य
प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान तेज़ गति से चलाया जा रहा है। 300 से अधिक पुलिसकर्मियों को भूकंप के अधिकेंद्र वाले इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय अग्निशमन एवं बचाव विभाग के 347 कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, घायलों तक मदद पहुँचाना प्राथमिकता है।
तिब्बत में भूकंप का इतिहास
गौरतलब है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इससे पहले 3 सितंबर को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई लगभग 14 किलोमीटर थी। जनवरी 2025 में आए 6.8 तीव्रता के बड़े भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र की जनता अभी पिछली आपदाओं के घावों से उबरी भी नहीं है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और अधिक बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ताज़े आफ्टरशॉक ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर किया है। राहत कार्यों की निगरानी जारी है और आने वाले दिनों में नुकसान का पूरा आकलन सामने आने की उम्मीद है।