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तिब्बत में 7.0 के भूकंप के बाद फिर झटका: 4.4 तीव्रता दर्ज, 16 मौतें, 300+ घर ढहे

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तिब्बत में 7.0 के भूकंप के बाद फिर झटका: 4.4 तीव्रता दर्ज, 16 मौतें, 300+ घर ढहे

सारांश

तिब्बत में गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 4.4 का आफ्टरशॉक आया। 16 मौतें, 32 घायल, 300+ घर ध्वस्त — और राहत कार्य अभी जारी है। जनवरी 2025 के 6.8 तीव्रता के भूकंप के बाद यह इस क्षेत्र की दूसरी बड़ी त्रासदी है।

मुख्य बातें

शुक्रवार सुबह 5:54 बजे तिब्बत में 4.4 तीव्रता का आफ्टरशॉक दर्ज किया गया, जिसका केंद्र 173 किलोमीटर गहराई पर था।
गुरुवार रात 8:03 बजे आए 7.0 तीव्रता के मुख्य भूकंप में 16 लोगों की मौत और 32 लोग घायल हुए।
300 से अधिक घर ध्वस्त; 11 घायलों की हालत शुक्रवार तड़के तक गंभीर।
300 से अधिक पुलिसकर्मी और 347 अग्निशमन कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्य में तैनात।
ताज़े आफ्टरशॉक का केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था।
जनवरी 2025 में इसी क्षेत्र में 6.8 तीव्रता के भूकंप से 120 से अधिक लोग मारे गए थे।

तिब्बत में गुरुवार रात 8 बजकर 3 मिनट पर आए 7.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर धरती एक बार फिर काँप उठी। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, इस ताज़े झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.4 दर्ज की गई। मुख्य भूकंप में 16 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से अधिक घर ध्वस्त हो गए हैं।

भूकंप का केंद्र और गहराई

NCS के आँकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह का 4.4 तीव्रता का आफ्टरशॉक धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका अधिकेंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था। इससे पहले गुरुवार रात के मुख्य भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 15 किलोमीटर नीचे बताया गया था।

मुख्य भूकंप से नुकसान

गुरुवार की रात आए 7.0 तीव्रता के झटके ने भारी तबाही मचाई। 300 से अधिक घर ढह गए और 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो के अनुसार, 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से 11 की हालत शुक्रवार सुबह 2 बजकर 25 मिनट तक गंभीर बनी हुई थी। भूकंप से हुए नुकसान का आकलन अभी भी जारी है।

राहत और बचाव कार्य

प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान तेज़ गति से चलाया जा रहा है। 300 से अधिक पुलिसकर्मियों को भूकंप के अधिकेंद्र वाले इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय अग्निशमन एवं बचाव विभाग के 347 कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, घायलों तक मदद पहुँचाना प्राथमिकता है।

तिब्बत में भूकंप का इतिहास

गौरतलब है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इससे पहले 3 सितंबर को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई लगभग 14 किलोमीटर थी। जनवरी 2025 में आए 6.8 तीव्रता के बड़े भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र की जनता अभी पिछली आपदाओं के घावों से उबरी भी नहीं है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएँ चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और अधिक बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ताज़े आफ्टरशॉक ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर किया है। राहत कार्यों की निगरानी जारी है और आने वाले दिनों में नुकसान का पूरा आकलन सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जनवरी 2025 से अब तक की घटनाएँ यह साबित करती हैं कि यहाँ की बस्तियाँ पुनर्निर्माण से पहले ही अगली आपदा की चपेट में आ जाती हैं। 7.0 की तीव्रता के मात्र घंटों बाद 4.4 का आफ्टरशॉक इस बात का संकेत है कि ज़मीन अभी स्थिर नहीं हुई है। सवाल यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में दीर्घकालिक आपदा-रोधी निर्माण और पूर्व-चेतावनी प्रणाली को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं — केवल राहत दल भेजना पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिब्बत में शुक्रवार को आए भूकंप की तीव्रता कितनी थी?
शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। यह गुरुवार रात के 7.0 तीव्रता के मुख्य भूकंप का आफ्टरशॉक था, जिसका केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई पर था।
तिब्बत के भूकंप में कितने लोगों की मौत हुई?
आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो के अनुसार गुरुवार रात के 7.0 तीव्रता के भूकंप में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से 11 की हालत शुक्रवार सुबह तक गंभीर थी।
तिब्बत भूकंप में राहत और बचाव कार्य कैसे चल रहा है?
प्रभावित क्षेत्रों में 300 से अधिक पुलिसकर्मी और क्षेत्रीय अग्निशमन एवं बचाव विभाग के 347 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो के अनुसार राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
तिब्बत में पहले कब बड़े भूकंप आए हैं?
जनवरी 2025 में तिब्बत में 6.8 तीव्रता के भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को भी 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई लगभग 14 किलोमीटर थी।
तिब्बत में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार चिंगहाई-तिब्बत पठार भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत सक्रिय क्षेत्र है। बढ़ता तापमान, तेज़ी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएँ इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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