बाछेन भूकंप: 7.0 तीव्रता के झटके के बाद 12,489 लोग सुरक्षित, पूर्वनिर्मित आवासों में बसाए गए
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के नागछू शहर स्थित बाछेन जिले में 22 अक्टूबर 2026 की रात 10 बजकर 33 मिनट पर 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से शुरू किए गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 16 लोगों की मौत हुई है, 76 लोग घायल हैं और 12,489 विस्थापितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 24 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक 16 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। 76 घायलों में से 11 की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि 65 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। भूकंप की उच्च तीव्रता को देखते हुए राहत एजेंसियों ने युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया।
पूर्वनिर्मित आवासों में बसाए गए प्रभावित लोग
25 अक्टूबर को सर्वाधिक प्रभावित मारू टाउनशिप के गाँव नंबर 2 में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया गया। समुद्र तल से 4,400 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित इस शिविर में 60 पूर्वनिर्मित आवास तैयार किए गए हैं। इन आवासों में विशेष तापरोधी व्यवस्था की गई है ताकि अत्यधिक ठंड में प्रभावित लोगों को गर्म वातावरण मिल सके। 25 अक्टूबर की शाम से ही विस्थापित परिवार इन आवासों में स्थानांतरित होने लगे।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र तिब्बती पठार पर स्थित है जहाँ सर्दियों में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, इसलिए आश्रय और हीटिंग व्यवस्था बचाव कार्यों की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।
बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल
स्टेट ग्रिड की शीत्सांग शाखा ने भूकंप के तत्काल बाद आपातकालीन टीमें रवाना कीं। 24 अक्टूबर की रात 8 बजकर 38 मिनट तक संपूर्ण भूकंप प्रभावित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी गई। इस अभियान में 301 कर्मचारी, 39 वाहन, 19 जनरेटर वाहन (मध्यम एवं निम्न वोल्टेज) और 83 आपातकालीन उपकरण तैनात किए गए।
मौके पर तैनात कमांड टीम ने 'एक आवास तैयार होते ही उसे बिजली से जोड़ने' के सिद्धांत पर काम किया, जिससे तंबुओं और पूर्वनिर्मित आवासों में एक साथ बिजली कनेक्शन का काम पूरा किया गया।
राहत कार्यों की प्राथमिकताएँ
हीटिंग उपकरणों के वितरण और पूर्वनिर्मित आवासों के निर्माण में आई तेज़ी से प्रभावित लोगों की रहने की स्थिति में क्रमशः सुधार हो रहा है। राहत अभियान का जोर अब केवल सुरक्षित ठिकाना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ठंड से बचाव और गर्म आवास सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है।
यह ऐसे समय में आया है जब तिब्बती पठार पर सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है, जिससे राहत अभियान की चुनौतियाँ और बढ़ जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में और अधिक पूर्वनिर्मित आवास तथा गर्म वस्त्र वितरित किए जाएंगे।