27 जून 2026
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क्या पीएम मोदी ने आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन किया और भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को सराहा?

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क्या पीएम मोदी ने आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन किया और भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को सराहा?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन किया और भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया। इस समझौते ने 140 करोड़ भारतीयों और यूरोपीय देशों के लिए नए अवसरों का द्वार खोला है।

मुख्य बातें

भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा गया है।
एनर्जी सेक्टर में भारत को 500 बिलियन डॉलर का निवेश का अवसर है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
अंडमान और निकोबार बेसिन अगला हाइड्रोकार्बन हब बनने की ओर अग्रसर है।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तेजी से विस्तारित हो रहा है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 के चौथे संस्करण का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की सराहना करते हुए इसे सभी डील्स की जननी और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

उद्घाटन के बाद, प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा करने के लिए भारत आए हैं, मैं सभी का स्वागत करता हूं। इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) ने बहुत कम समय में बातचीत और कार्रवाई के लिए एक वैश्विक मंच स्थापित कर लिया है। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत एनर्जी सेक्टर के लिए अपार अवसरों की भूमि बन चुका है।

उन्होंने इस पर जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि यहां एनर्जी प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। आज हम पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के लिए दुनिया के शीर्ष पांच देशों में से हैं। हमारा निर्यात 150 से अधिक देशों तक पहुंचता है। भारत की क्षमता आपके लिए बहुत उपयोगी होगी, इसीलिए एनर्जी वीक जैसा मंच हमारी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतरीन जगह है।

पीएम मोदी ने एक महत्वपूर्ण विकास का जिक्र किया, जिसमें भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण समझौते के लगभग पूरा होने की बात कही। उन्होंने भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के बारे में बात करते हुए कहा कि दुनिया इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कह रही है। इस समझौते ने भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों लोगों के लिए ज़बरदस्त अवसर लाए हैं।

भारत और ईयू ने एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी कर ली है, जिसे व्यापार बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस डील की घोषणा आज बाद में होने वाली है।

प्रधानमंत्री ने एफटीए को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया, जो उनके अनुसार, दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यह समझौता न सिर्फ व्यापार को मजबूत करता है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। इसके अलावा, ईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ब्रिटेन और ईएफटीए के साथ हुए समझौतों को भी पूरा करेगा। इससे व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन दोनों मजबूत होंगे। मैं इसके लिए भारत के युवाओं और देश के सभी नागरिकों को बधाई देता हूं।

उन्होंने टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, चमड़ा और फुटवियर जैसे सेक्टर और हर दूसरे सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को भी बधाई दी।

उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील न सिर्फ भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी, बल्कि सेवा से जुड़े सेक्टरों का भी ज्यादा विस्तार होगा। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हर बिज़नेस और निवेशक के लिए भारत पर दुनिया का भरोसा और मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत हर सेक्टर में वैश्विक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा, "अगर मैं सिर्फ़ एनर्जी सेक्टर की बात करूं, तो यहां एनर्जी वैल्यू चेन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में बहुत ज्यादा निवेश की संभावना है। उदाहरण के लिए, एक्सप्लोरेशन सेक्टर को ही लें - भारत ने अपने एक्सप्लोरेशन सेक्टर को काफी हद तक खोल दिया है। आप हमारे डीप सी एक्सप्लोरेशन मिशन के बारे में भी जानते हैं। हम इस दशक के अंत तक अपने ऑयल और गैस सेक्टर में निवेश को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य एक्सप्लोरेशन एरिया को एक मिलियन स्क्वायर किलोमीटर तक बढ़ाना है। इसी विजन के तहत, 1.7 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर से ज़्यादा के ब्लॉक पहले ही दिए जा चुके हैं। अंडमान और निकोबार बेसिन भी हमारा अगला हाइड्रोकार्बन हब बन रहा है। क्यों? क्योंकि हमने एक्सप्लोरेशन सेक्टर में बड़े सुधार किए हैं। 'नो-गो' एरिया को बहुत कम कर दिया गया है।

इंडिया एनर्जी वीक के पिछले एडिशन के दौरान मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने कानूनों और नियमों में सुधार किए हैं। अगर आप भारत के एक्सप्लोरेशन सेक्टर में निवेश करते हैं, तो आपकी कंपनी का लाभ बढ़ना तय है।

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, एनर्जी सेक्टर में भारत को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाने वाली एक और ताकत हमारी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है। उन्होंने कहा, "हम रिफाइनिंग क्षमता में दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं और जल्द ही नंबर एक होंगे। आज, भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 260 मिलियन टन है। इसे बढ़ाकर 300 मिलियन टन से ज्यादा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।"

ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर उन्होंने कहा, "एलएनजी ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास जहाजों की जरूरत होती है और हम उन्हें भारत में ही बनाने पर काम कर रहे हैं। हाल ही में भारत में जहाज निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपए का एक प्रोग्राम शुरू किया गया है। साथ ही, देश के बंदरगाहों पर एलएनजी टर्मिनल बनाने में भी निवेश के कई मौके हैं। एलएनजी के लिए बड़ी पाइपलाइनों की भी जरूरत है।"

उन्होंने कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भारत के कई शहरों तक पहुंच गया है और सरकार दूसरे शहरों को भी तेजी से जोड़ रही है और इसे निवेश के लिए बहुत आकर्षक सेक्टर बताया। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत की आबादी इतनी बड़ी है, और हमारी अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है। ऐसे भारत में पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की मांग भी लगातार बढ़ने वाली है। इसलिए, हमें एक बहुत बड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होगी। और इसमें आपका निवेश भी आपको काफी ग्रोथ देगा। इन सबके अलावा, भारत में डाउनस्ट्रीम एक्टिविटीज़ में भी निवेश के कई मौके हैं।"

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब 'रिफॉर्म्स एक्सप्रेस' पर सवार है और हर सेक्टर में तेजी से सुधार लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन को बढ़ावा देने और वैश्विक सहयोग के लिए एक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल माहौल बनाने के लिए सुधार कर रहा है।

उन्होंने कहा, "भारत अब एनर्जी सिक्योरिटी से आगे बढ़कर एनर्जी इंडिपेंडेंस के मिशन पर काम कर रहा है... हमारा एनर्जी सेक्टर हमारी आकांक्षाओं के केंद्र में है। इसमें 500 बिलियन डॉलर के निवेश का मौका है। मैं आपको इस आह्वान के साथ आमंत्रित करता हूं -- मेक इन इंडिया, इनवेट इन इंडिया, स्केल विद इंडिया, इन्वेस्ट इन इंडिया

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर, कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन, साथ ही अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और ग्लोबल साउथ के उच्च पदस्थ मंत्री दक्षिण गोवा जिले के बेटुल गांव में उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे। आईईडब्ल्यू का मकसद एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ाना, इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना, और डीकार्बनाइजेशन के लिए असरदार, स्केलेबल तरीकों को बढ़ावा देना है, जिन्हें डेवलपमेंट के अलग-अलग स्टेज वाली इकॉनमी अपना सकती हैं।

इस तीन-दिवसीय इवेंट में अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे, जो ग्लोबल एनर्जी डिप्लोमेसी में आईईडब्ल्यू के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। आईईडब्ल्यू को उम्मीद है कि 120 से ज्यादा देशों से 75,000 से ज़्यादा एनर्जी प्रोफेशनल्स इसमें शामिल होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति को और मजबूत करेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत अब ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह न केवल आर्थिक अवसरों को बढ़ाएगा, बल्कि हमारे युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं भी खोलेगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन कब हुआ?
आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन 27 जनवरी को हुआ।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का महत्व क्या है?
यह समझौता व्यापार को बढ़ावा देने और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता कितनी है?
भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 260 मिलियन टन है, जिसे बढ़ाकर 300 मिलियन टन से अधिक करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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