PM मोदी ने FAO महानिदेशक को भेंट कीं भारत की 5 दुर्लभ चावल किस्में और मिलेट बार्स
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पाँच देशों की यात्रा — संयुक्त अरब अमीरात, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे — के दौरान संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंगयु को भारत की पाँच पारंपरिक चावल किस्मों के नमूने तथा हेल्दी मिलेट बार्स भेंट किए। 21 मई को स्वदेश लौटे मोदी की यह भेंट भारत की कृषि विरासत और खाद्य विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
कौन-सी किस्में हुईं भेंट
प्रधानमंत्री द्वारा FAO प्रमुख को सौंपे गए उपहारों में केरल का पलक्कड़ रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोबिंदभोग चावल, इंडो-गंगेटिक मैदान का बासमती चावल, असम का जोहा राइस और उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले का कालानमक चावल शामिल थे। इनके साथ ज्वार और बाजरा से बनी मिलेट बार्स भी भेंट की गईं। इन सभी उत्पादों की अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पोषण-संबंधी विशेषताएँ हैं।
पाँचों किस्मों की विशेषताएँ
पलक्कड़ रेड राइस — जिसे 'मट्टा' या 'पालक्काडन मट्टा' भी कहते हैं — केरल के पलक्कड़ की काली मिट्टी में उगाई जाने वाली जीआई-टैग प्राप्त किस्म है। इसका लाल-भूरा रंग और मोटा दाना न्यूनतम पॉलिशिंग के कारण सुरक्षित रहता है, और यह फाइबर, मैग्नीशियम तथा विटामिन बी6 से समृद्ध है।
गोबिंदभोग चावल को 'बंगाल का राइस बाउल' कहा जाता है। इसके छोटे अंडाकार दाने, दूधिया चमक और मक्खन जैसी मीठी सुगंध इसे पायेश व खिचुड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के लिए आदर्श बनाते हैं।
बासमती चावल — जिसे 'सुगंध की रानी' (Queen of Fragrance) कहा जाता है — उपजाऊ इंडो-गंगेटिक मैदानों की लंबे दाने वाली किस्म है। पकने पर इसके दाने लगभग दोगुने हो जाते हैं। यह ग्लूटेन-फ्री है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम है।
जोहा राइस असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में उगाई जाने वाली 'साली' (शीतकालीन) धान की किस्म है। इसके छोटे दाने और तीव्र मीठी सुगंध — जो वाष्पशील तेलों की अधिकता से उत्पन्न होती है — इसकी पहचान हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है।
कालानमक चावल — जिसे 'बुद्धा राइस' भी कहते हैं — उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, विशेषकर सिद्धार्थनगर ज़िले की प्राचीन सुगंधित धान किस्म है। इसका काला छिलका और मध्यम-पतले दाने इसे अलग पहचान देते हैं। यह आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स से युक्त है तथा इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है।
मिलेट बार्स: परंपरा और आधुनिकता का संगम
प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई मिलेट बार्स महाराष्ट्र के सोलापुर, अहमदनगर और मराठवाड़ा क्षेत्र में उगाए जाने वाले ज्वार (सोरघम) और बाजरा (पर्ल मिलेट) से तैयार की गई हैं। ये फसलें अर्ध-शुष्क जलवायु और कम वर्षा वाली परिस्थितियों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
मिलेट्स में प्रचुर मात्रा में आहार फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक खनिज पाए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर 'श्री अन्न' अभियान के तहत भारत ने मिलेट्स को पोषण-सुरक्षा के एक टिकाऊ विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है, और मिलेट बार्स इसी दिशा में आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुँचने का माध्यम हैं।
कूटनीतिक संदर्भ और महत्व
यह भेंट ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा चर्चाओं में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। गौरतलब है कि FAO वैश्विक खाद्य नीति और कृषि विविधता संरक्षण में केंद्रीय भूमिका निभाता है। पारंपरिक किस्मों के नमूने भेंट करना भारत की जैव-विविधता और कृषि-सांस्कृतिक धरोहर को राजनयिक स्तर पर रेखांकित करने का प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
मोदी की यह पाँच देशों की यात्रा रणनीतिक और द्विपक्षीय मसलों पर केंद्रित रही, और FAO प्रमुख से यह मुलाकात उसी यात्रा का हिस्सा थी। भविष्य में भारत-FAO सहयोग के और गहरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।